Diabetes Alert: 4,700 लोगों पर 6 साल तक चला दुनिया का सबसे बड़ा मेडिकल रिसर्च, लाइफस्टाइल के ये 3 बदलाव 31% तक घटा देंगे डायबिटीज का खतरा
भारत सहित पूरी दुनिया में डायबिटीज (मधुमेह) एक साइलेंट किलर और बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (IDF) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि भारत में इस समय लगभग 10.1 करोड़ लोग मधुमेह की चपेट में हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज (मधुमेह की शुरुआती अवस्था) के दौर से गुजर रहे हैं। यह संख्या आम लोगों की सोच से कहीं ज्यादा तेजी से पैर पसार रही है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस जानलेवा बीमारी के बढ़ने के पीछे सबसे मुख्य वजह हमारी रोजमर्रा की खराब आदतें और असंतुलित खान-पान है। इसी बीच चिकित्सा जगत से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। यूरोप में हुए एक ऐतिहासिक और बड़े पोषण अध्ययन (Nutritional Study) में यह साबित हुआ है कि यदि हम अपनी दिनचर्या में तीन बेहद आसान बदलाव कर लें, तो डायबिटीज होने के रिस्क को 31 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
क्या है प्रीडिमेड-प्लस परीक्षण? 4700 वयस्कों पर ऐसे हुआ दुनिया का सबसे बड़ा शोध
प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन' (Annals of Internal Medicine) में प्रकाशित इस शोध को प्रीडिमेड-प्लस (PREDIMED-Plus) परीक्षण का हिस्सा माना जा रहा है। इस विशाल वैज्ञानिक रिसर्च के तहत शोधकर्ताओं ने 55 से 75 वर्ष की आयु के लगभग 4,700 वयस्कों के स्वास्थ्य और उनकी आदतों पर लगातार 6 वर्षों तक बारीकी से नजर रखी। ये सभी प्रतिभागी पहले से ही 'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' से पीड़ित थे, जो कि मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, पेट के आसपास जमा अस्वस्थ चर्बी और ब्लड शुगर के असंतुलन से जुड़ा एक गंभीर लक्षण है।
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने इन लोगों को दो अलग-अलग ग्रुप्स में बांट दिया। पहले ग्रुप को एक विशेष और अनुशासित लाइफस्टाइल प्लान का पालन करने को कहा गया, जबकि दूसरे ग्रुप को उनका सामान्य खान-पान जारी रखने की छूट दी गई। 6 साल बाद जब अंतिम नतीजे सामने आए, तो वह बेहद हैरान करने वाले थे। जिस ग्रुप ने वैज्ञानिक लाइफस्टाइल को अपनाया था, उनमें डायबिटीज होने का खतरा 31 प्रतिशत तक कम हो गया। साथ ही उनके वजन और कमर के घेरे (कमर की परिधि) में भारी कमी आई और उनका चयापचय स्वास्थ्य (Metabolic Health) पहले से कई गुना बेहतर हो गया।
पहला बदलाव: भूमध्यसागरीय शैली (Mediterranean Diet) के खान-पान को अपनाएं
इस शोध में सबसे कारगर और मुख्य बदलाव भूमध्यसागरीय शैली के आहार पद्धति को अपनाना पाया गया। इस डाइट चार्ट के तहत लोगों को अपनी थाली में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, सूखे मेवे (नट्स), अलसी या कद्दू के बीज और जैतून के तेल (ओलीव ऑयल) जैसे हेल्दी फैट्स को शामिल करने पर विशेष जोर दिया जाता है। इस खान-पान का सीधा और सरल सिद्धांत है—अधिक से अधिक फाइबर युक्त और प्राकृतिक रूप से तैयार ताजा भोजन खाना और डिब्बाबंद या अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह दूरी बना लेना। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पौष्टिक आहार शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) को तेजी से बढ़ाता है, जिससे खून में ग्लूकोज का स्तर अचानक नहीं बढ़ता और शुगर नियंत्रित रहती है। प्रसिद्ध जर्नल 'एडवांसेज इन न्यूट्रिशन' ने भी इस डाइट को टाइप-2 डायबिटीज को रोकने में रामबाण माना है।
दूसरा बदलाव: दैनिक कैलोरी काउंट में 600 कैलोरी की मध्यम कटौती
डायबिटीज के जोखिम को मात देने के लिए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण कदम कैलोरी की मात्रा में नियंत्रित कमी करना था। इस परीक्षण के दौरान विशेषज्ञों की देखरेख और सटीक मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने अपने दैनिक कैलोरी सेवन में हर दिन लगभग 600 कैलोरी की कटौती की। इस मामूली और सुरक्षित कैलोरी डेफिसिट के कारण शरीर में जमा अतिरिक्त वसा (फैट) तेजी से बर्न होने लगी, जिससे वजन घटाने में बहुत मदद मिली। अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि कैलोरी की मात्रा में की गई यह मध्यम कमी न केवल मोटापे से संबंधित मधुमेह के खतरे को टालती है, बल्कि हमारा लिवर और पेनक्रियाज इंसुलिन को अधिक कुशलता से प्रोसेस करने में सक्षम हो जाते हैं।
तीसरा बदलाव: डाइट कंट्रोल के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि का अनूठा मेल
शोधकर्ताओं ने इस बात को पूरी गंभीरता से स्पष्ट किया है कि केवल डाइट में बदलाव कर लेने से लंबे समय तक मनचाहा परिणाम नहीं मिल सकता, जब तक कि आपकी दैनिक दिनचर्या में व्यायाम और एक्टिविटी शामिल न हो। इस चिकित्सा कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को खान-पान में सुधार के साथ-साथ हर दिन नियमित रूप से पैदल चलने (ब्रिस्क वॉकिंग) और हल्के स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग या बॉडीवेट एक्सरसाइज) जैसी मध्यम शारीरिक गतिविधियों को करने के लिए प्रेरित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञों द्वारा वजन प्रबंधन के लिए निरंतर मोटिवेशन और सपोर्ट भी दिया गया। पोषण में सुधार और नियमित कसरत के इस कॉम्बो ने शरीर की कोशिकाओं को ब्लड शुगर को ऊर्जा में बदलने में बेहद मददगार बनाया।
अल्पकालिक इंटरनेट ट्रेंड्स नहीं, बल्कि विज्ञान पर आधारित हैं ये आदतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह 3 बुनियादी सिफारिशें किसी शॉर्ट-टर्म इंटरनेट या सोशल मीडिया पर चलने वाले किसी क्रैश डाइट ट्रेंड का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह शरीर के भीतर होने वाली सूजन (इन्फ्लेमेशन), मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन रिस्पॉन्स से जुड़े ठोस वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित हैं। 'पीएलओएस वन' (PLOS One) पत्रिका में प्रकाशित एक बड़े मेटा-रिव्यू में भी यह पाया गया है कि फाइबर और साबुत अनाज से भरपूर भोजन हमारे आंतों के स्वास्थ्य (Gut Health) को मजबूत करता है और क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन को कम कर देता है।
चिकित्सकों के अनुसार, ये जीवनशैली में सुधार उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा जीवनदायी साबित हो सकते हैं जो प्रीडायबिटीज, अत्यधिक मोटापे या मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे हैं, या जिनके परिवार में माता-पिता को डायबिटीज होने का इतिहास (फैमिली हिस्ट्री) रहा है। इस पूरे 6 साल के अध्ययन ने जिस सबसे जरूरी बात पर बार-बार जोर दिया, वह थी—कंसिस्टेंसी यानी निरंतरता। अचानक से शुरू किए गए किसी कड़े डाइट प्लान या कुछ दिनों के भारी वर्कआउट की तुलना में जीवन में नियमित रूप से अपनाई जाने वाली ये छोटी और व्यावहारिक आदतें ही वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोगों को डायबिटीज के चंगुल से बचा सकती हैं।