गोल्डन ऑवर' में किया गया यह एक-एक काम बचा सकता है मरीज की जान

गोल्डन ऑवर' में किया गया यह एक-एक काम बचा सकता है मरीज की जान

आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार बढ़ता मानसिक तनाव, खराब खानपान और बदलती जीवनशैली के कारण दिल से जुड़ी बीमारियां और हार्ट अटैक (Heart Attack) के मामले आज के समय में महामारी की तरह फैलते जा रहे हैं। देश में चाहे युवा हों या बुजुर्ग, हर वर्ग के लोग अचानक कार्डियक अरेस्ट या दिल के दौरे का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में मेडिकल साइंस और कार्डियोलॉजिस्ट्स का यह बार-बार कहना होता है कि जब किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ता है, तो उसके जीवन को बचाने या गंवाने का फैसला अगले कुछ मिनटों और विशेष रूप से शुरुआती एक घंटे के भीतर तय हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस बेहद महत्वपूर्ण और नाजुक समय को 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) कहा जाता है। दिल का दौरा पड़ने के बाद पहले 60 मिनट यानी एक घंटे का समय मरीज के लिए किसी वरदान या अभिशाप की तरह होता है। यदि इस दौरान पीड़ित व्यक्ति के परिवार वाले, आसपास मौजूद लोग या खुद मरीज कुछ बेहद जरूरी और सूझबूझ भरे कदम उठा लें, तो मरीज के बचने की उम्मीद कई गुना तक बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जरा सी घबराहट, गलत फैसले या अस्पताल पहुंचने में देरी उस मरीज की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि हार्ट अटैक के पहले एक घंटे में कौन-से काम करने चाहिए और किन गंभीर गलतियों से बचना चाहिए।

जानिए क्या होता है 'गोल्डन ऑवर' और क्यों इस एक घंटे में टिका होता है सब कुछ

मेडिकल इमरजेंसी के क्षेत्र में 'गोल्डन ऑवर' वह समय अवधि होती है जो किसी दुर्घटना या गंभीर बीमारी के उभरने के ठीक बाद के पहले 60 मिनट को दर्शाती है। हार्ट अटैक के मामले में जब कोरोनरी धमनी (Coronary Artery) में अचानक कोई ब्लॉकेज आ जाती है और हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन युक्त खून का पहुंचना बंद हो जाता है, तो दिल की कोशिकाएं टूटने और मरने लगती हैं। इस शुरुआती एक घंटे के भीतर यदि मरीज को सही मेडिकल सहायता, ऑक्सीजन और ब्लड थिनर जैसी दवाइयां मिल जाएं, तो हृदय के स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है। लेकिन अगर इसी शुरुआती दौर में लोग यह समझ नहीं पाते कि क्या हो रहा है या वे मरीज को इधर-उधर टहलाने, घरेलू नुस्खे आजमाने या किसी छोटे-मोटे झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाने में समय गंवा देते हैं, तो हार्ट की मसल्स पूरी तरह डैमेज हो जाती हैं और स्थिति हाथ से निकल जाती है। यही कारण है कि डॉक्टरों का यह मानना है कि पहले एक घंटे में उठाया गया हर एक कदम जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है।

दिल का दौरा पड़ने पर सबसे पहले पहचानें शुरुआती लक्षण और बिना देर किए लें एक्शन

अक्सर लोग सीने में उठने वाले सामान्य दर्द या एसिडिटी को मामूली गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, और यही सबसे बड़ी भूल साबित होती है। हार्ट अटैक आने से पहले या उसके दौरान जो मुख्य लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें सीने के बीचों-बीच भारीपन, दबाव, जकड़न या सुई चुभने जैसा दर्द शामिल होता है। यह दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई बार बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन, पीठ के ऊपरी हिस्से या पेट के ऊपरी भाग तक फैल जाता है। इसके साथ ही अचानक से ठंडा पसीना आना, चक्कर आना, सांस लेने में भारी दिक्कत होना, घबराहट होना और बेहोशी जैसा महसूस होना इसके प्रमुख संकेत हैं। यदि आपको या आपके आसपास किसी भी व्यक्ति में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो एक सेकंड की भी देरी किए बिना इसे सीरियसली लें। इस स्थिति में समय गंवाने का मतलब अपनी या अपने किसी अपने की जिंदगी को खतरे में डालना है।

पहले एक घंटे में किए जाने वाले वे जरूरी काम जो बचा सकते हैं मरीज की जान

जब यह स्पष्ट हो जाए कि किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत कुछ बेहद महत्वपूर्ण और अनुशासित कदम उठाने चाहिए। सबसे पहला और सबसे जरूरी काम यह है कि मरीज को बिल्कुल शांत अवस्था में बिठा दें या लिटा दें, उसे चलने-फिरने बिल्कुल न दें क्योंकि शारीरिक गतिविधि बढ़ाने से दिल पर पंपिंग का दबाव और अधिक बढ़ जाता है। यदि मरीज के पास एस्पिरिन (Aspirin) जैसी ब्लड थिनर दवा उपलब्ध है और उसे पहले से कोई अन्य गंभीर एलर्जी नहीं है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसे तुरंत चबाकर खाने को दें, क्योंकि यह खून को पतला करके ब्लॉकेज को आगे बढ़ने से रोकने में मदद करती है। इसके अलावा, मरीज की टाइट बेल्ट, कॉलर के बटन या टाई को ढीला कर दें ताकि उसे खुलकर सांस लेने में आसानी हो सके। तुरंत किसी अच्छे कार्डियक अस्पताल की एम्बुलेंस (Ambulance) को कॉल करें या घर के पास के किसी ऐसे अस्पताल में ले जाने की व्यवस्था करें जहां कैथ लैब (Cath Lab) और आईसीयू की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध हो।

इन खतरनाक गलतियों से बचें जो गोल्डन ऑवर में मरीज की जिंदगी के लिए बन सकती हैं काल

बहुत से लोग जानकारी के अभाव में हार्ट अटैक के समय ऐसी गंभीर गलतियां कर बैठते हैं जो मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। सबसे पहली गलती यह की जाती है कि लोग मरीज को अपनी पर्सनल कार या बाइक से किसी बहुत दूर स्थित बड़े अस्पताल में ले जाने का जोखिम उठाते हैं, जबकि रास्ते में ट्रैफिक जाम या देरी के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। हमेशा ऐसी एम्बुलेंस को बुलाएं जिसमें ऑक्सीजन सिलेंडर और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) की सुविधा हो, ताकि रास्ते में ही मरीज को प्राइमरी ट्रीटमेंट मिलना शुरू हो जाए। इसके अलावा, छाती में दर्द होने पर मरीज को जबरदस्ती पानी पिलाने, मालिश करने या उसे यह कहकर टहलाने की कोशिश बिल्कुल न करें कि 'शायद गैस की वजह से दर्द हो रहा है, टहलने से ठीक हो जाएगा'। इस तरह की लापरवाही से हृदय की धड़कन पूरी तरह रुक सकती है और कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

समय पर अस्पताल पहुंचना और सही इलाज से पूरी तरह संभव है रिकवरी

अंत में यह समझना बेहद जरूरी है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और उन्नत तकनीक के इस दौर में हार्ट अटैक अब कोई लाइलाज या शत-प्रतिशत मौत का परवाना नहीं रह गया है। यदि मरीज को 'गोल्डन ऑवर' यानी पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो डॉक्टर एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) या स्टेंट डालकर तुरंत उस ब्लॉकेज को खोल सकते हैं, जिससे मरीज कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट सकता है। इसलिए, जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। अपने परिवार और दोस्तों के बीच इस बात की जानकारी हमेशा साझा करें कि सीने में दर्द होने पर कभी भी अनदेखी न करें और पहले एक घंटे के महत्व को समझकर तुरंत अस्पताल का रुख करें। आपकी एक छोटी सी समझदारी और समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी बचाने के लिए काफी हो सकता है।