कभी लोहे जैसी फौलादी बॉडी और स्टेरॉयड के बेताज बादशाह थे रोनी कोलमैन

कभी लोहे जैसी फौलादी बॉडी और स्टेरॉयड के बेताज बादशाह थे रोनी कोलमैन

दुनिया भर में जब भी बॉडी बिल्डिंग और फिटनेस के इतिहास का जिक्र होता है, तो एक ऐसा नाम सबसे ऊपर और स्वर्ण अक्षरों में लिया जाता है जिसे पूरी दुनिया 'द किंग' के रूप में जानती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं आठ बार लगातार मिस्टर ओलंपिया (Mr. Olympia) का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाले महान अमेरिकी बॉडी बिल्डर रोनी कोलमैन (Ronnie Coleman) की। अपने करियर के चरम पर रोनी कोलमैन की शारीरिक बनावट, उनकी मांसमट्ठा जैसी फौलादी मांसपेशियां और लोहे से भी मजबूत शरीर को देखकर अच्छे-अच्छे दिग्गजों के होश उड़ जाते थे। वे अपनी भारी-भरकम वजन उठाने की क्षमता और अद्भुत जेनेटिक्स के लिए जाने जाते थे, जिसके चलते उन्हें दुनिया का सबसे शक्तिशाली बॉडीबिल्डर माना जाता था। लेकिन हर चमकती हुई चीज के पीछे एक छिपा हुआ काला सच भी होता है, और रोनी कोलमैन की जिंदगी इस बात का सबसे बड़ा और दर्दनाक उदाहरण बन चुकी है। कभी स्टेज पर अपने डोले-शोले और परफेक्ट वी-टेपर बॉडी से लाखों युवाओं को प्रेरित करने वाले रोनी कोलमैन आज अपनी जिंदगी के उस दौर से गुजर रहे हैं जहां उन्हें चलने-फिरने के लिए व्हीलचेयर या बैसाखियों का सहारा लेना पड़ता है। उनकी लटकी हुई स्किन, कमजोर हो चुका शरीर और शारीरिक लाचारी को देखकर आज उनके करोड़ों फैंस का दिल भर आता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि रोनी कोलमैन के जीवन में यह भयावह बदलाव कैसे आया और उनके इस हाल के पीछे स्टेरॉयड, अत्यधिक वर्कआउट और जिम की दुनिया का कौन-सा कड़वा सच छिपा हुआ है।

जानिए कौन हैं रोनी कोलमैन और क्यों उन्हें कहा जाता है बॉडी बिल्डिंग की दुनिया का बेताज बादशाह

रोनी कोलमैन का जन्म अमेरिका में हुआ था और अपने शुरुआती जीवन में वे एक पुलिस अधिकारी (Police Officer) के रूप में कार्य करते थे, साथ ही उन्हें जिम जाने और वजन उठाने का शौक था। धीरे-धीरे उन्होंने बॉडी बिल्डिंग को अपना मुख्य पेशा बनाया और साल 1998 से लेकर 2005 तक लगातार आठ बार मिस्टर ओलंपिया का खिताब जीतकर अर्नाल्ड श्वार्जनेगर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। उनकी रीढ़ और कंधों पर जितना वजन उठाने की क्षमता थी, उतना वजन उस दौर में कोई दूसरा एथलीट उठाने की हिम्मत नहीं कर पाता था। वे जिम में बिना रुके घंटों तक भारी-भरकम स्क्वाट्स (Heavy Squats) और डेडलिफ्ट (Deadlifts) लगाते थे। उनके शरीर का हर एक इंच मांस किसी ग्रेनाइट के पत्थर की तरह कठोर और मजबूत दिखाई देता था। दुनिया भर के युवा उन्हें अपना आदर्श मानते थे और उनके जैसा बनने के लिए जिम में पसीना बहाते थे। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि जिस बॉडी को वे भगवान का वरदान समझ रहे हैं, वही शरीर एक दिन उनकी सबसे बड़ी सजा बन जाएगा।

स्टेरॉयड, सिंथेटिक हार्मोन्स और शरीर की सीमाओं से परे जाकर वजन उठाने का खतरनाक दौर

बॉडी बिल्डिंग की इस जादुई और प्रतिस्पर्धी दुनिया में शिखर पर बने रहने के लिए रोनी कोलमैन ने अपने शरीर को मानवीय सीमाओं से भी कहीं आगे तक झोंक दिया था। विशेषज्ञों और खुद रोनी के खुलासों के अनुसार, उन्होंने अपने करियर के दौरान एनाबॉलिक स्टेरॉयड (Anabolic Steroids), ह्यूमन ग्रोथ हॉर्मोन (HGH) और अन्य परफॉर्मेंस एनहांसिंग ड्रग्स का भारी मात्रा में सेवन किया था। इसके अलावा, जिम के अंदर अपनी मांसपेशियों को बड़ा करने की होड़ में वे अपनी शारीरिक क्षमता से कई गुना अधिक वजन (जैसे 800 पाउंड का स्क्वाट्स) उठाते थे। जब आप सिंथेटिक ड्रग्स के सहारे अपने शरीर को ताकत देते हैं और जोड़ों तथा हड्डियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालते हैं, तो अंदरूनी रूप से हड्डियां और कार्टिलाज कमजोर होने लगते हैं। रोनी का शरीर बाहर से तो लोहे जैसा मजबूत दिखता था, लेकिन अंदर ही अंदर उनकी रीढ़ की हड्डियां और नसों का जाल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था, जिसे वे उस समय केवल पेनकिलर (Painkillers) खाकर दबा दिया करते थे।

लगातार सर्जरी, रीढ़ की हड्डी का टूटना और व्हीलचेयर तक पहुंचने की दर्दनाक कहानी

जब रोनी कोलमैन ने बॉडी बिल्डिंग से संन्यास लिया, तब उनके शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया। उनके शरीर में दर्द का ऐसा सैलाब उमड़ा कि उन्हें एक के बाद एक कई बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी (Spine) में कई बार जटिल ऑपरेशन हुए, जिसमें टाइटेनियम के रॉड और स्क्रू डाले गए ताकि वे सीधे खड़े हो सकें। लेकिन अत्यधिक डैमेज हो चुके नर्वस सिस्टम और घिस चुके जोड़ों के कारण उनकी टांगों ने काम करना बंद कर दिया। आज स्थिति यह है कि वे बिना सहारे के खड़े तक नहीं हो सकते। कभी स्टेज पर शान से चलने वाले रोनी कोलमैन अब ज्यादातर समय व्हीलचेयर पर ही नजर आते हैं। उनके शरीर की वह कसी हुई मांसपेशियां अब उम्र ढलने और ड्रग्स के प्रभाव कम होने के कारण ढीली पड़ चुकी हैं, उनकी स्किन पूरी तरह लटक चुकी है और उनका वजन भी काफी कम हो गया है। इस दर्दनाक बदलाव को देखकर आज के युवा फिटनेस ट्रेनर्स और एथलीटों के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ऐसी बॉडी का कोई फायदा है जो बुढ़ापे में इंसान को अपंग बना दे।

आज की नई पीढ़ी के लिए क्या सबक है रोनी कोलमैन की इस दुर्दशा से सीखने को

रोनी कोलमैन की यह कहानी आज की उस युवा पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी और आंखें खोल देने वाला सबक है जो सोशल मीडिया पर लाइक, फॉलोअर्स और रातों-रात मस्कुलर बॉडी बनाने के चक्कर में शॉर्टकट अपनाती है। आज के समय में जिम जाने वाले बहुत से युवा बिना सोचे-समझे और बिना किसी मेडिकल गाइडेंस के प्रोटीन पाउडर के नाम पर या जल्दी बॉडी बनाने के लिए स्टेरॉयड और सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें यह समझ नहीं आता कि सिंथेटिक तरीके से बनाई गई बॉडी केवल कुछ सालों की चमक होती है, जिसके बाद शरीर अंदर से पूरी तरह खोखला हो जाता है। रोनी कोलमैन ने खुद एक इंटरव्यू में यह कहा था कि अगर उन्हें अपने अतीत में वापस जाने का मौका मिले, तो वे शायद अपनी ट्रेनिंग के तरीकों में कुछ बदलाव करेंगे ताकि उन्हें बुढ़ापे में इस तरह का असहनीय दर्द और व्हीलचेयर का सामना न करना पड़े। फिटनेस का मतलब केवल बाहरी दिखावा और बड़े डोले-शोले नहीं है, बल्कि लंबी उम्र तक स्वस्थ, सक्रिय और दर्दमुक्त जीवन जीना असली सेहत है।

निष्कर्ष: चमक-दमक के पीछे छिपी सच्चाई को पहचानें और प्राकृतिक फिटनेस को अपनाएं

संक्षेप में कहा जाए तो रोनी कोलमैन आज भले ही शारीरिक रूप से लाचार हो चुके हों, लेकिन फिटनेस की दुनिया में उनका नाम हमेशा अमर रहेगा। उनकी जिंदगी हमें यह सिखाती है कि शरीर की अपनी एक प्राकृतिक सीमा होती है, और जब हम लालच में आकर उस सीमा को पार करने की कोशिश करते हैं, तो प्रकृति हमें इसकी बहुत भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर देती है। इसलिए, शॉर्टकट छोड़कर हमेशा नेचुरल वर्कआउट, संतुलित खानपान और अनुशासित जीवनशैली को ही अपनी प्राथमिकता बनाएं।