यूनिपोलर और बाइपोलर डिप्रेशन के बीच के इस बारीक और अहम फर्क को जरूर समझें
भागदौड़ भरी इस आधुनिक जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) से जुड़ी समस्याएं आज के समय में आम बात बन चुकी हैं, और अक्सर हम उदासी या मानसिक थकान को एक ही शब्द 'डिप्रेशन' यानी अवसाद के नाम से पुकार देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर डिप्रेशन एक जैसा नहीं होता और इसके कई अलग-अलग प्रकार व रूप होते हैं, जिनमें 'यूनिपोलर डिप्रेशन' (Unipolar Depression) और 'बाइपोलर डिप्रेशन' (Bipolar Depression) सबसे प्रमुख हैं? बहुत से लोग इन दोनों मानसिक विकारों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि चिकित्सा विज्ञान और मनोचिकित्सकों के अनुसार इन दोनों की प्रकृति, इनके लक्षण और इनका इलाज करने का तरीका एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। यदि आप या आपका कोई अपना लंबे समय से मूड स्विंग्स, अत्यधिक उदासी या ऊर्जा की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तो इन दोनों के बीच के बुनियादी अंतर को समझना बेहद जरूरी है ताकि सही समय पर सही मेडिकल मदद ली जा सके।
यूनिपोलर डिप्रेशन क्या है और इसके मुख्य लक्षण क्या हैं: जानिए लगातार उदासी और ऊर्जाहीनता का यह चक्र
यूनिपोलर डिप्रेशन, जिसे आम भाषा में केवल 'क्लिनिकल डिप्रेशन' या मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (Major Depressive Disorder) कहा जाता है, मानसिक स्वास्थ्य की एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति लगातार लंबे समय तक गहरे दुख, निराशा और उदासी के दौर से गुजरता है। इस स्थिति की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इसमें व्यक्ति का मूड हमेशा नकारात्मक दिशा में ही नीचे रहता है और उसे जीवन की किसी भी चीज में आनंद या रुचि (Anhedonia) महसूस नहीं होती है। यूनिपोलर डिप्रेशन से पीड़ित इंसान को अक्सर अत्यधिक थकान, भूख या तो बहुत ज्यादा लगना या बिल्कुल न लगना, नींद में भारी गड़बड़ी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और कई बार मन में आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें मूड के 'मैनिया' या अत्यधिक उत्साह वाले चरण कभी नहीं आते हैं, बल्कि व्यक्ति लगातार एक ही डिप्रेस्ड फेज या एकतरफा (Unipolar) मानसिक स्थिति में बना रहता है, जिसका कारण जेनेटिक, बायोलॉजिकल या जीवन के कोई गहरे आघात हो सकते हैं।
बाइपोलर डिप्रेशन क्या है और यह यूनिपोलर से किस प्रकार है बिल्कुल अलग: मूड स्विंग्स के दो चरम छोर
दूसरी ओर, बाइपोलर डिप्रेशन (Bipolar Depression) एक ऐसा जटिल मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति के मूड में दो बिल्कुल विपरीत और चरम बदलाव (Extreme Mood Swings) देखने को मिलते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति की मानसिक स्थिति में कभी तो अत्यधिक उत्साह, ऊर्जा, अति-आत्मविश्वास और बिना सोचे-समझे बड़े फैसले लेने का दौर यानी 'मैनिया' (Mania) या 'हाइपोमेनिया' आता है, तो वहीं कुछ हफ्तों या महीनों बाद वही व्यक्ति अचानक गहरे और गंभीर डिप्रेशन के कुएं में चला जाता है। बाइपोलर डिप्रेशन के दौरान मरीज को अत्यधिक सुस्ती, निराशा और ऊर्जा की भारी कमी महसूस होती है, जो देखने में यूनिपोलर डिप्रेशन जैसी ही लगती है, लेकिन इसका इलाज और इसके लिए दी जाने वाली दवाइयां पूरी तरह अलग होती हैं। यदि किसी बाइपोलर मरीज को केवल साधारण एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां दे दी जाएं, तो उनका मैनिया और अधिक गंभीर हो सकता है, इसलिए मनोचिकित्सक द्वारा सही डायग्नोसिस होना इस बीमारी में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
सही पहचान, समय पर इलाज और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत
चूंकि यूनिपोलर और बाइपोलर डिप्रेशन के लक्षण शुरुआती दौर में एक जैसे लग सकते हैं, इसलिए बिना किसी डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के खुद से निष्कर्ष निकालना मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना इसलिए भी जरूरी है ताकि लोग डिप्रेशन को केवल 'कमजोर इच्छाशक्ति' या 'उदासी' समझकर नजरअंदाज न करें, बल्कि इसे एक मेडिकल कंडीशन मानकर उसका पेशेवर इलाज करवाएं। थेरेपी, काउंसलिंग, सही दवाइयां और एक अनुशासित जीवनशैली अपनाकर इन दोनों ही प्रकार के डिप्रेशन से पूरी तरह उबरा जा सकता है और एक सामान्य तथा खुशहाल जिंदगी जी जा सकती है। अपने आस-पास के लोगों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को समझें, उनकी बात सुनें और जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी अच्छे मनोचिकित्सक के पास ले जाने में बिल्कुल भी संकोच न करें, क्योंकि आपकी एक सही समझ किसी कीमती जिंदगी को बचा सकती है।