उत्तराखंड नगरीय चुनाव : विधायक तिलक राज बेहड़ की सियासी ताकत मजबूत
उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों और पहाड़ी अंचलों से इस वक्त कांग्रेस पार्टी के लिए एक बेहद उत्साहजनक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। हाल ही में संपन्न हुए उत्तराखंड के नगरीय निकाय चुनावों (Uttarakhand Urban Local Body Elections) में कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई महत्वपूर्ण नगर निकायों और सीटों पर भगवा दल को पछाड़ते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इस शानदार और करिश्माई जीत के बाद से प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता और किच्छा से लोकप्रिय विधायक तिलक राज बेहड़ (Tilak Raj Behar) का राजनीतिक कद और रसूख पार्टी के भीतर कई गुना बढ़ गया है। राजनीति के उतार-चढ़ाव को बहुत करीब से देखने वाले तिलक राज बेहड़ के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद खास और भावनात्मक मानी जा रही है, क्योंकि कुछ समय पहले जब उन्हें कुछ राजनीतिक चुनौतियों और अपनों की बेरुखी का सामना करना पड़ा था, तब एक सार्वजनिक मंच पर उनके आंसू छलक आए थे, और आज उसी माटी में उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और जनसमर्थन के दम पर यह शानदार सफलता हासिल करके आलोचकों को करारा जवाब दिया है।
उधम सिंह नगर और कुमाऊं क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा: कैसे तिलक राज बेहड़ की रणनीति ने पलटी पूरी बाजी
उत्तराखंड के तराई और कुमाऊं क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उधम सिंह नगर जिले और आसपास के इलाकों में नगरीय निकाय चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर आज भी जनता के बीच तिलक राज बेहड़ की पकड़ कितनी मजबूत और गहरी है। जब चुनाव प्रचार का दौर चल रहा था, तब विरोधी दलों ने उन्हें घेरने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन बेहड़ ने धरातल पर उतरकर घर-घर जनसंपर्क किया और आम जनता के बुनियादी मुद्दों जैसे सड़क, पानी, सफाई और स्थानीय विकास को अपने प्रचार का मुख्य हथियार बनाया। उनकी इसी सूक्ष्म रणनीति और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के कौशल का नतीजा यह रहा कि कई नगर निगमों और नगर पालिका परिषदों पर कांग्रेस समर्थित अध्यक्षों और पार्षदों ने भारी मतों से जीत का परचम फहरा दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि इस जीत ने उत्तराखंड में कांग्रेस के मुरझाए हुए सांगठनिक ढांचे में एक नई जान फूंकने का काम किया है।
वो भावनात्मक पल जब छलके थे आंसू: संघर्ष से लेकर इस ऐतिहासिक जीत तक का सफर
राजनीति में आंसू आना और उनका राजनीतिक मतलब निकलना बहुत आम बात नहीं होती, लेकिन तिलक राज बेहड़ के जीवन से जुड़ा वह प्रसंग आज भी लोगों के जेहन में ताजा है जब कुछ महीने पहले एक कार्यक्रम के दौरान उनके आंखें नम हो गई थीं और वे सार्वजनिक रूप से रो पड़े थे। उस दौरान उनके विरोधियों ने इसे उनकी कमजोरी के रूप में पेश करने की कोशिश की थी और यह कयास लगाए जाने लगे थे कि शायद अब उनका राजनीतिक सफर ढलान पर है, लेकिन एक अनुभवी और जुझारू नेता की यही पहचान होती है कि वह आंसुओं को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बना लेता है। बेहड़ ने उस घटना के बाद निराश होने के बजाय दोगुनी ऊर्जा के साथ जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और हर सुदूर गांव व वार्ड तक जाकर लोगों का भरोसा जीता। आज जब नगरीय चुनाव के परिणाम उनके पक्ष में आए हैं और उनके समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया है, तो ऐसा लग रहा मानो उन आंसुओं का एक-एक कतरा इस बड़ी जीत की इबारत लिखने में कामयाब रहा हो।
उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर बढ़ा कद: आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए टॉनिक साबित होगी यह सफलता
तिलक राज बेहड़ की इस शानदार कामयाबी और नगरीय चुनावों में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के बाद अब उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) में उनका कद और रुतबा और अधिक ऊंचा हो गया है। पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने उन्हें इस सफलता के लिए बधाई दी है और यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य स्तर की रणनीतिक बैठकों में उनकी राय को सबसे ज्यादा तरजीह दी जाएगी। उत्तराखंड की राजनीति में हमेशा से क्षेत्रीय समीकरणों और मजबूत क्षत्रपों की भूमिका अहम रही है, और ऐसे समय में जब पार्टी राज्य में सत्ता वापसी के लिए छटपटा रही है, बेहड़ की यह जीत एक संजीवनी बूटी की तरह काम कर रही है। कार्यकर्ता अब पूरी तरह जोश से भर चुके हैं और आने वाले बड़े राजनीतिक मुकाबलों के लिए कमर कस चुके हैं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि राजनीति में धैर्य, संघर्ष और जनता का अटूट साथ कभी बेकार नहीं जाता।