ओज़ेम्पिक और वेगोवी की छुट्टी? इस नई दवा ने बिना सर्जरी घटा दिया 85 पाउंड वजन, ट्रायल के नतीजे देख डॉक्टर भी रह गए दंग
वजन घटाने और मोटापे से छुटकारा पाने की चाहत रखने वालों के लिए मेडिकल साइंस की दुनिया से एक बेहद क्रांतिकारी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। फार्मास्युटिकल कंपनी 'एली लिली' (Eli Lilly) की एक नई प्रायोगिक दवा के अंतिम चरण (क्लीनिकल ट्रायल) के नतीजों ने दुनिया भर के डॉक्टरों और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। इस नई दवा का नाम 'रेटैट्रुटाइड' (Retatrutide) है। कंपनी द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस दवा के इस्तेमाल से मरीजों का औसतन 70 से 85 पाउंड (लगभग 32 से 38 किलो) तक वजन कम हुआ है। इसके असर को देखकर बड़े-बड़े मेडिकल एक्सपर्ट्स इसकी तुलना सीधे बैरिएट्रिक सर्जरी (वजन घटाने का ऑपरेशन) से करने लगे हैं।
80 हफ्तों में घटा शरीर का 28% वजन: मोटापे की कैटेगरी से बाहर आए लोग
एली लिली द्वारा घोषित परीक्षण के परिणामों के अनुसार, रेटैट्रुटाइड दवा की उच्च खुराक लेने वाले मरीजों ने महज 80 हफ्तों के भीतर अपने शरीर के कुल वजन का लगभग 28% हिस्सा कम कर लिया। इतना ही नहीं, जो मरीज गंभीर मोटापे से ग्रस्त थे और दो साल तक इस दवा के कोर्स पर रहे, उनके वजन में 30% तक की भारी गिरावट देखी गई और उनका वजन औसतन 85 पाउंड तक कम हो गया। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि इस दवा को लेने के बाद लगभग दो-तिहाई मरीज मोटापे की श्रेणी से पूरी तरह बाहर आ गए और उनका बीएमआई (BMI) 30 से नीचे दर्ज किया गया। एनबीसी की मशहूर मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. नताली अजार ने बताया कि यह परिणाम हूबहू वैसे ही हैं जैसे जटिल बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद देखने को मिलते हैं।
ओज़ेम्पिक और वेगोवी से क्यों कई गुना बेहतर है 'रेटैट्रुटाइड'
वर्तमान में दुनिया भर में ओज़ेम्पिक, वेगोवी और ज़ेपबाउंड जैसी दवाएं वजन घटाने के लिए बेहद लोकप्रिय हैं। लेकिन रेटैट्रुटाइड इन सबसे एक कदम आगे निकल गई है। दरअसल, वेगोवी (सेमाग्लूटाइड) शरीर के सिर्फ एक आंत हार्मोन 'जीएलपी-1' (GLP-1) की नकल करके भूख को नियंत्रित करती है, जिससे 15% वजन कम होता है। ज़ेपबाउंड (तिरज़ेपेटाइड) दो हार्मोन 'जीएलपी-1' और 'जीआईपी' को टारगेट करती है, जिससे 21% वजन घटता है। मगर रेटैट्रुटाइड को वैज्ञानिक "ट्रिपल-एगोनिस्ट" या "ट्रिपल जी" दवा कह रहे हैं, क्योंकि यह एक साथ तीन हार्मोनों (जीएलपी-1, जीआईपी और ग्लूकागॉन) की नकल करती है। ये तीनों हार्मोन मिलकर भूख पर काबू पाते हैं, कैलोरी बर्न करने की रफ्तार बढ़ाते हैं और फैट मेटाबॉलिज्म को तेज कर देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि आप जितने ज्यादा हार्मोनों को टारगेट करेंगे, वजन उतनी ही तेजी से गायब होगा। Endocrinologist डॉ. सुसान स्प्रैट के अनुसार, उन्होंने आज तक किसी भी दवा के परीक्षण में इतने चमत्कारी नतीजे नहीं देखे हैं।
केवल मोटापा ही नहीं, दिल की सेहत में भी हुआ जादुई सुधार
इस क्लिनिकल ट्रायल में एक और अच्छी बात यह सामने आई कि रेटैट्रुटाइड ने केवल वजन ही कम नहीं किया, बल्कि मरीजों के दिल की सेहत (Heart Health) को भी काफी सुधारा है। दवा के नियमित इस्तेमाल से प्रतिभागियों की कमर का घेरा (Waist Circumference) कम हुआ, उनका हाई ब्लड प्रेशर नियंत्रित हुआ और शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल (नॉन-एचडीएल कोलेस्ट्रॉल) के स्तर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे भविष्य में दिल के दौरे का खतरा बेहद कम हो जाता है।
क्या हैं इस दवा के साइड इफेक्ट्स और किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
बाजार में मौजूद अन्य वेट लॉस दवाओं की तरह रेटैट्रुटाइड के भी कुछ सामान्य दुष्प्रभाव (Side Effects) देखे गए हैं, जो मुख्य रूप से पेट से जुड़े हैं। इनमें जी मिचलाना, उल्टी, दस्त और कब्ज जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं शामिल हैं। इसके अलावा कुछ मरीजों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) और त्वचा में हल्की असहजता भी देखी गई। इन दिक्कतों के चलते करीब 11% लोगों ने ट्रायल के बीच में ही दवा लेना बंद कर दिया था।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह दवा उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जिनका बीएमआई 35 या उससे अधिक है और जो गंभीर मोटापे का शिकार हैं। साथ ही यह दवा उन मरीजों के लिए भी बेहद कारगर होगी जिन पर ओज़ेम्पिक या वेगोवी जैसी मौजूदा दवाओं का असर होना बंद हो गया है या जिनका वजन एक निश्चित स्तर पर आकर रुक (Weight Loss Plateau) गया है। हालांकि इस दवा को अभी अमेरिकी एफडीए (FDA) से मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के अंत तक इसे ग्लोबल मार्केट में लॉन्च करने की हरी झंडी मिल सकती है।