ईंधन संकट के बीच फिर लौटेगा 'Work From Home' का दौर? रिलायंस और टाटा जैसी बड़ी कंपनियां बना रही हैं मेगा प्लान

ईंधन संकट के बीच फिर लौटेगा 'Work From Home' का दौर? रिलायंस और टाटा जैसी बड़ी कंपनियां बना रही हैं मेगा प्लान

Up kiran, Digital Desk : ईरान युद्ध के चलते गहराते वैश्विक ऊर्जा संकट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का असर अब देश के कॉरपोरेट जगत पर दिखने लगा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा ग्रुप और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां एक बार फिर अपने कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) पर भेजने की तैयारी में हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करना है ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे बोझ को हल्का किया जा सके।

रिलायंस और टाटा में मंथन शुरू: हाइब्रिड मॉडल से पूरी तरह WFH की ओर बढ़ने के संकेत

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने संकेत दिए हैं कि वे पीएम मोदी की अपील के बाद अपनी मौजूदा कार्यप्रणाली का फिर से आकलन कर रहे हैं। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, वर्तमान में लागू 'हाइब्रिड मॉडल' को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, टाटा समूह की कंपनियों में भी इस नीति को लेकर उच्च स्तरीय चर्चाएं जारी हैं। दिग्गज संस्थान यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि कामकाज की उत्पादकता (Productivity) प्रभावित हुए बिना ईंधन की बचत कैसे सुनिश्चित की जाए।

आईटी सेक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के सामने अलग-अलग चुनौतियां

जहाँ कोर आईटी कंपनियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू करना आसान है, वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों के लिए यह एक बड़ी पहेली बना हुआ है। L&T जैसी कंपनियों के अधिकांश कर्मचारी ऑनसाइट (On-site) काम करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कंपनियां पूरी तरह घर से काम नहीं दे सकतीं, लेकिन उन्होंने अपने कर्मचारियों को यात्रा कम करने और डिजिटल मीटिंग्स को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

कोरोना काल जैसी पॉलिसी की होगी वापसी? कंपनियों को पलटने पड़ेंगे अपने फैसले

पिछले दो सालों से कंपनियां अपने कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुलाने (Work from Office) के लिए प्रोत्साहित कर रही थीं। कई कंपनियों ने तो हाइब्रिड मॉडल भी खत्म कर दिया था। लेकिन अब युद्ध के कारण उपजे 'आर्थिक आपातकाल' जैसे हालात ने कंपनियों को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर कर दिया है। यदि यह मॉडल दोबारा लागू होता है, तो सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा, जिससे सीधे तौर पर करोड़ों लीटर ईंधन की बचत होने की उम्मीद है।

पीएम मोदी की 'सप्तपदी' अपील: केवल तेल ही नहीं, सोना भी बचाना है लक्ष्य

बता दें कि प्रधानमंत्री ने रविवार को देशवासियों से 7 विशेष अपील की थीं। इनमें पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, वर्क फ्रॉम होम अपनाना और सोने की खरीदारी कम करना सबसे प्रमुख था। सरकार का मानना है कि यदि निजी क्षेत्र इसमें सहयोग करता है, तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

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