अंतरिक्ष से हैरान करने वाली तस्वीर: आसमान में बादलों ने भारत के मौसम को दो हिस्सों में बांटा

अंतरिक्ष से हैरान करने वाली तस्वीर: आसमान में बादलों ने भारत के मौसम को दो हिस्सों में बांटा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के मौसम उपग्रह INSAT-3DS ने अंतरिक्ष से एक बेहद हैरान करने वाली और दिलचस्प तस्वीर भेजी है, जिसने देश के मौसम को लेकर एक नए राजनीतिक और भौगोलिक समीकरण को सामने ला दिया है। इस सैटेलाइट इमेज में साफ देखा जा सकता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी (Monsoon Withdrawal) के इस दौर में बादलों ने पूरे भारत के आसमान को दो स्पष्ट हिस्सों में बांट दिया है। देश के एक हिस्से में जहां काले घने बादलों का डेरा है और भारी बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरा हिस्सा बिल्कुल साफ और सूखा नजर आ रहा है। अंतरिक्ष से ली गई इस अद्भुत तस्वीर ने मौसम वैज्ञानिकों और आम लोगों दोनों का ही ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि यह भारत की मौसमी विविधता और वायुमंडलीय बदलावों की एक अनोखी कहानी बयां कर रही है।

जैसे-जैसे सितंबर का महीना अपने अंतिम चरण में पहुंच रहा है, भारतीय मौसम विभाग (IMD) की घोषणा के अनुसार मानसून ने देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों यानी राजस्थान और आसपास के इलाकों से अपनी वापसी शुरू कर दी है। सामान्य तौर पर मानसून के लौटने की प्रक्रिया इसी तरह होती है, लेकिन इस बार अंतरिक्ष से जो थर्मल इन्फ्रारेड तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने मौसम में एक अजीब सी लकीर खींच दी है। इस तस्वीर के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से लेकर पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी प्रायद्वीप के कई राज्यों तक बादलों का एक विशाल और चमकीला समूह छाया हुआ है। इसके विपरीत, देश का पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी इलाका पूरी तरह बादलों से मुक्त और साफ दिखाई दे रहा है, जिससे आसमान में बादलों का यह दो फाड़ होना देशवासियों के लिए कौतुक का विषय बन गया है।

ISRO के INSAT-3DS सैटेलाइट ने कैद किया आसमान का यह अद्भुत नजारा

ISRO का एडवांस्ड मौसम उपग्रह INSAT-3DS लगातार पृथ्वी के वायुमंडल, बादलों की स्थिति और तापमान पर पैनी नजर बनाए रखता है। इस सैटेलाइट ने अपने थर्मल इन्फ्रारेड चैनल की मदद से जो ताजा तस्वीरें कैप्चर की हैं, वे यह दिखाती हैं कि किस तरह एक ही समय पर भारत के अलग-अलग कोनों में मौसम के दो बिल्कुल विपरीत रूप एक्टिव हैं। पूर्वी भारत और बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय नमी से भरी हवाएं और कम दबाव के क्षेत्र बादलों का भारी जमावड़ा बनाए हुए हैं। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी व पूर्वी राज्यों में इन बादलों के कारण लगातार हलचल बनी हुई है और कई जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है। दूसरी तरफ, गुजरात, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों के आसमान पूरी तरह साफ हो चुके हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वहां से मानसूनी बादलों ने अब विदा ले ली है।

मौसम का यह दोहरा रूप कृषि और आम जनजीवन के लिए क्या है मायने?

मानसून के इस तरह दो हिस्सों में बंटने और अलग-अलग राज्यों में अलग मिजाज दिखाने का सीधा असर देश की कृषि, खासकर खरीफ की फसलों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। एक तरफ जहां पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में सक्रिय मानसूनी तंत्र और डिप्रेशन के कारण मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं और खेतों में नमी बनी हुई है, वहीं पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत के किसान अब रबी की फसलों की बुवाई और खेतों की तैयारी की जुगत में जुट गए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का यह मानना है कि यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि मानसून के जाने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन जाते-जाते भी यह देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी अलग छाप छोड़ रहा है। अंतरिक्ष से ली गई ISRO की यह तस्वीर न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है, बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि भारत की जलवायु प्रणाली कितनी जटिल और अद्भुत है।