यूपी और उत्तराखंड की 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का बिगुल बजा

यूपी और उत्तराखंड की 11 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का बिगुल बजा

देश के राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील राज्यों उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में राज्यसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दोनों राज्यों की कुल 11 राज्यसभा सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें उत्तर प्रदेश की 10 और पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की 1 सीट शामिल है। मौजूदा सांसदों का कार्यकाल पूरा होने के चलते इन रिक्त हो रही सीटों पर सियासी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस चुनाव की घोषणा के साथ ही दोनों राज्यों की राजधानी लखनऊ से लेकर देहरादून और दिल्ली तक राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है, क्योंकि विधानसभा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर इन सीटों के नतीजों का दूरगामी राजनीतिक असर पड़ना तय माना जा रहा है।

जानिए क्या है पूरा चुनाव कार्यक्रम और महत्वपूर्ण तिथियां

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, राज्यसभा की इन सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह तय समय के तहत संपन्न कराई जाएगी। इसके तहत आधिकारिक अधिसूचना 29 सितंबर को जारी कर दी गई है, जिसके साथ ही नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की छंटनी (स्क्रूटनी) की जाएगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर 2026 तय की गई है। मतदान की प्रक्रिया आगामी 16 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक संपन्न होगी। खास बात यह है कि वोटिंग खत्म होने के ठीक बाद यानी उसी दिन 16 अक्टूबर की शाम 5:00 बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी और परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को 19 अक्टूबर तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर रिटायर होने वाले दिग्गजों की सूची

उत्तर प्रदेश में जिन 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, उनके वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल नवंबर के अंत में समाप्त हो रहा है। इन सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। सूची के अनुसार हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, बी.एल. वर्मा और सीमा द्विवेदी का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। साथ ही, पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की सीट पहले ही खाली हो चुकी है, क्योंकि उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उनका इस्तीफा प्रभावी हुआ था। इन तमाम सीटों के लिए राजनीतिक दलों के भीतर टिकट वितरण को लेकर जोड़-तोड़ शुरू हो चुकी है।

उत्तराखंड की एकमात्र सीट पर भी टिकी सबकी नजरें

पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव का ऐलान हो चुका है। यहां से भाजपा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा होने के कारण यह चुनाव जरूरी हो गया है। उत्तराखंड विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखा जाए तो कुल 70 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में सत्ताधारी दल के पास मजबूत बहुमत है, जिससे इस सीट पर जीत का पलड़ा किसके पक्ष में झुकेगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। इसके बावजूद दोनों प्रमुख दलों द्वारा अपनी रणनीतिक चालें चली जा रही हैं ताकि उच्च सदन में अधिक से अधिक मजबूती दर्ज की जा सके। पहाड़ी राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस एक सीट के चुनाव को लेकर भी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है।

विधानसभा के संख्या बल और राजनीतिक समीकरणों पर टिकी नजर

यूपी और उत्तराखंड के इस उच्च सदन के चुनाव में दोनों राज्यों के विधायकों को मतदान करना है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के वर्तमान राजनीतिक आंकड़ों और दलीय स्थिति को देखते हुए यह चुनाव बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। हालांकि पिछली बार की तुलना में इस बार सदन के समीकरण अलग हैं, जिससे यह साफ है कि कौन सा दल कितनी सीटें आसानी से जीत पाएगा और किस पार्टी को पसीना बहाना पड़ेगा। विपक्षी दल भी अपनी सेंधमारी और वोटों के गणित को साधने की जुगत में लगे हुए हैं। आने वाले कुछ हफ्तों में नामांकन और समीकरणों के स्पष्ट होने के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि उच्च सदन में पहुंचने वाले नए चेहरे कौन होंगे।