अचानक भरभराकर गिरी भारी मेटल स्लैब, मलबे में फंसे 15 मजदूर; ऐसे बचाई गई जान
गुजरात की राजधानी गांधीनगर के कुडासन इलाके में बुधवार रात करीब 9 बजे एक निर्माणाधीन साइट पर उस समय चीख-पुकार मच गई, जब निर्माण कार्य के दौरान अचानक भारी धातु (मेटल) की स्लैब नीचे आ गिरी।
उस समय मजदूर साइट पर सामान्य रूप से काम में जुटे हुए थे। स्लैब गिरते ही कई श्रमिक मलबे और लोहे के भारी ढांचे के नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन राहत दल मौके पर पहुंचे और तत्काल युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।
राहत और बचाव का रातभर चला अभियान: 15 मजदूर सुरक्षित बाहर निकाले गए
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि राहत कर्मियों ने मलबे के नीचे फंसे सभी 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी रात तलाशी और मलबा हटाने का अभियान जारी रखा कि कोई भी व्यक्ति मलबे में दबा न रह जाए। घटनास्थल पर नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) और स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) की विशेष टीमें प्लाज्मा कटर और गैस कटर जैसी आधुनिक मशीनों के साथ डटी रहीं और विशालकाय मेटल ढांचे को काटकर रास्ता बनाया गया।
सिविल अस्पताल में 13 घायल भर्ती, सभी की हालत स्थिर
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने स्वास्थ्य स्थिति पर विवरण देते हुए स्पष्ट किया कि मलबे से निकाले गए लोगों में से 13 घायलों को इलाज के लिए गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम ने सभी का गहन परीक्षण किया है और गनीमत यह रही कि किसी भी श्रमिक की हालत गंभीर या चिंताजनक नहीं है। गांधीनगर के कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट रविंद्र खटाले ने पुष्टि की कि हादसे में किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई है और सभी 15 लोग सुरक्षित व स्थिर स्थिति में हैं।
अस्पताल पहुंचे उपमुख्यमंत्री और विधायक, लिया मरीजों का हालचाल
हादसे की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया और गांधीनगर की विधायक ऋताबेन केतनभाई पटेल घायलों की सुध लेने सीधे सिविल अस्पताल पहुंचे। नेताओं ने उपचाराधीन मजदूरों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और डॉक्टरों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। विधायक ऋताबेन पटेल ने बताया कि अमूमन साइट पर करीब 20 मजदूर कार्यरत रहते थे, लेकिन गनीमत रही कि घटना के समय वहां केवल 13-15 मजदूर ही मौजूद थे। फिलहाल प्रशासन मलबे के अंतिम हिस्से को हटाने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की जांच में जुटा है।