UNGA सत्र के दौरान भारत और लाइबेरिया के बीच ऐतिहासिक रक्षा और समुद्री सहयोग समझौता

UNGA सत्र के दौरान भारत और लाइबेरिया के बीच ऐतिहासिक रक्षा और समुद्री सहयोग समझौता

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्चस्तरीय वार्षिक सत्र के इतर वैश्विक कूटनीति के मंच से भारत ने एक और बड़ी कूटनीतिक और सामरिक सफलता हासिल की है। न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के समीप अफ्रीकी देश लाइबेरिया के साथ भारत सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नए समझौते का मुख्य केंद्र बिंदु समुद्री सुरक्षा (Maritime Security), नेविगेशन की स्वतंत्रता और हिंद महासागर व अटलांटिक महासागर के जलक्षेत्र में आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। पश्चिम अफ्रीका के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश लाइबेरिया के साथ इस बड़ी डिफेंस और मैरीटाइम डील के बाद भारत को समुद्री इलाके में जबरदस्त फायदा मिलने वाला है। इस समझौते से न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के रणनीतिक प्रभाव को भी एक अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस व्यस्त सप्ताह के दौरान दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों और राजनयिकों की मौजूदगी में दोनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों ने इस रणनीतिक समझौते की रूपरेखा पर मुहर लगाई। लाइबेरिया दुनिया के सबसे बड़े शिपिंग रजिस्टरों में से एक का संचालन करता है, जिसका मतलब है कि वैश्विक स्तर पर चलने वाले हजारों मालवाहक जहाज लाइबेरिया के ध्वज तले समुद्र में सफर करते हैं। ऐसे में भारत जैसे विशाल आर्थिक और विनिर्माण राष्ट्र के लिए लाइबेरिया के साथ मैरीटाइम सेक्टर में यह सहयोग बेहद दूरगामी परिणाम देने वाला साबित होगा। इस डील के तहत दोनों देश समुद्री सुरक्षा, एंटी-पाइरेसी (समुद्री डकैती रोधी) अभियानों, तकनीकी सहायता, नाविकों के प्रशिक्षण और बंदरगाह प्रबंधन के क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को निर्बाध बनाए रखने और समुद्री लुटेरों के आतंक से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करने के लिहाज से इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों द्वारा एक मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।

समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक व्यापारिक मार्गों को मिलेगा बढ़ावा

भारत और लाइबेरिया के बीच हुई इस उच्चस्तरीय डील के लागू होने से दोनों देशों की नौसेनाओं और तटरक्षक बलों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान (Information Sharing) और अधिक तीव्र हो जाएगा। अटलांटिक महासागर के तटीय क्षेत्रों और पश्चिमी अफ्रीकी जलमार्गों में सुरक्षा के लिहाज से लाइबेरिया एक बेहद अहम कड़ी है। इस समझौते के बाद भारतीय जहाजों और समुद्री बेड़ों को अफ्रीकी तटों के करीब बेहतर रसद, तकनीकी सहायता और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, भारत अपनी समुद्री क्षमताओं, शिपबिल्डिंग और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में लाइबेरिया को अत्याधुनिक तकनीक और साजो-सामान उपलब्ध कराने पर भी विचार कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योग में एक नए युग की शुरुआत होगी।

भारत की अफ्रीकी कूटनीति और 'ग्लोबल साउथ' का बढ़ता कद

कूटनीतिक जानकारों का यह स्पष्ट मानना है कि UNGA के मंच के दौरान इस प्रकार के रणनीतिक समझौते करना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल अपने क्षेत्रीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों का नेतृत्व करते हुए वैश्विक पटल पर अपनी धमक लगातार बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय विदेश नीति अफ्रीकी महाद्वीप के देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रही है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई जैसे मुद्दे शामिल हैं। लाइबेरिया के साथ हुआ यह समझौता आने वाले समय में अन्य अफ्रीकी देशों के साथ भी भारत के रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगा। इस डील से भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मंचों पर और अधिक कूटनीतिक समर्थन मिलेगा तथा हिंद महासागर से लेकर अटलांटिक तक भारत की रणनीतिक पहुंच को एक नया आयाम प्राप्त होगा।