भारत ने ब्रिक्स शेरपा को नेपाल में नया राजदूत बनाने का दिया बड़ा प्रस्ताव

भारत ने ब्रिक्स शेरपा को नेपाल में नया राजदूत बनाने का दिया बड़ा प्रस्ताव

दक्षिण एशिया के कूटनीतिक गलियारों और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को मजबूती देने की दिशा में भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। भारत ने अपने एक बेहद अनुभवी और वरिष्ठ राजनयिक (Career Diplomat) तथा वर्तमान में ब्रिक्स शेरपा की जिम्मेदारी संभाल रहे सुधाकर दलेला को नेपाल में भारत का अगला राजदूत बनाने का औपचारिक प्रस्ताव आगे बढ़ाया है। नेपाल की राजधानी काठमांडू में कूटनीतिक स्तर पर इस नए नाम के सामने आने के बाद से ही दोनों देशों के राजनीतिक खेमे में हलचल तेज हो गई है। सामान्य तौर पर नेपाल में अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को राजदूत बनाकर भेजा जाता रहा है, लेकिन एक उच्च पदस्थ सचिव स्तर के अनुभवी कूटनीतिज्ञ को इस जिम्मेदारी के लिए चुना जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अपने इस पड़ोसी और मित्र राष्ट्र के साथ संबंधों को कितनी उच्च प्राथमिकता दे रहा है।

कौन हैं सुधाकर दलेला और क्या रहा है उनका तीन दशक लंबा शानदार कूटनीतिक करियर

वर्ष 1993 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) के बेहद तेज-तर्रार और मंझे हुए अधिकारी माने जाने वाले सुधाकर दलेला का कूटनीतिक सफर तीन दशकों से भी अधिक पुराना और उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इजराइल के तेल अवीव स्थित भारतीय मिशन से की थी और उसके बाद अमेरिका के वाशिंगटन डीसी, ब्राजील के ब्रासीलिया, जिनेवा, शिकागो और बांग्लादेश के ढाका जैसे दुनिया के महत्वपूर्ण सामरिक केंद्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में भी अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। हाल ही में उन्होंने वर्ष 2022 से 2025 तक भूटान में भारत के राजदूत के रूप में बेहद सफलतापूर्वक अपना कार्यकाल पूरा किया है। कूटनीति के जानकारों का मानना है कि दक्षिण एशियाई मामलों की गहरी समझ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में उनके लंबे अनुभव के कारण ही उन्हें काठमांडू की इस संवेदनशील और अहम जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया है।

नेपाल और भूटान मामलों का पुराना अनुभव और ब्रिक्स शेरपा के रूप में उनकी वैश्विक भूमिका

सुधाकर दलेला का नेपाल और हिमालयी पड़ोसी देशों के साथ पुराना और गहरा नाता रहा है, क्योंकि वे विदेश मंत्रालय में उत्तर (North) डिवीजन के संयुक्त सचिव के रूप में कार्य करते हुए नेपाल और भूटान से जुड़े द्विपक्षीय संबंधों को बहुत करीब से संभाल चुके हैं। उन्हें कूटनीतिक स्तर पर यह अच्छी तरह पता है कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और रणनीतिक समीकरण किस तरह काम करते हैं। इसके अलावा वर्तमान समय में वे विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंध (ER) विभाग के सचिव पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और साथ ही ब्रिक्स (BRICS), आईबीएसए (IBSA) और I2U2 जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों पर भारत के शेरपा के रूप में देश का नेतृत्व कर रहे हैं। व्यापार नीति, विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मामलों और वैश्विक आर्थिक मंचों पर उनकी मजबूत पकड़ का सीधा फायदा भारत को नेपाल के साथ आगामी आर्थिक, जल विद्युत और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने में मिलेगा।

भारत-नेपाल रिश्तों के नए दौर की शुरुआत और इस नियुक्ति के दूरगामी कूटनीतिक परिणाम

भारत और नेपाल के बीच सदियों से रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है, लेकिन समय-समय पर भू-राजनीतिक कारणों से द्विपक्षीय वार्ताओं में कुछ कड़वाहट या गतिरोध भी देखने को मिलते रहे हैं। ऐसे समय में सुधाकर दलेला जैसे वरिष्ठ और परिपक्व राजनयिक को काठमांडू भेजना इस बात को साबित करता है कि नई दिल्ली द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़, भरोसेमंद और आर्थिक रूप से सहयोगात्मक बनाना चाहती है। नेपाल के साथ ऊर्जा व्यापार, सीमा पार कनेक्टिविटी, आर्थिक साझेदारी और सुरक्षा मामलों पर नए सिरे से तालमेल बिठाने के लिए एक अनुभवी दूत की जरूरत थी, जिसे यह प्रस्ताव पूरी तरह पूरा करता है। जैसे ही नेपाल सरकार की तरफ से इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगेगी, श्री दलेला कार्यभार संभालेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद में एक नया सकारात्मक अध्याय जुड़ जाएगा और क्षेत्रीय स्थिरता को और अधिक मजबूती मिलेगी।