एक आंख की रोशनी और शरीर में 200 छर्रे: एफआईआर में साहिल लोचब ने दिल्ली पुलिस पर लगाए ये गंभीर आरोप

एक आंख की रोशनी और शरीर में 200 छर्रे: एफआईआर में साहिल लोचब ने दिल्ली पुलिस पर लगाए ये गंभीर आरोप

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र साहिल लोचब (Sahil Lochab) के मामले में आखिरकार दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई तब हुई जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पीड़ित छात्र के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर करीब 7 से 8 घंटे तक धरने पर बैठे रहे। इस घटना ने देश की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साहिल ने अपनी शिकायत में जो आपबीती बताई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

20 जुलाई के प्रदर्शन और मार्च की खौफनाक दास्तान

अपनी आधिकारिक शिकायत में 19 वर्षीय साहिल लोचब ने बताया कि वह 20 जुलाई को परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शन और 'संसद चलो' मार्च में शामिल हुए थे। उनके हाथ में तिरंगा झंडा था और वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे। तभी अचानक पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के कारण वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। साहिल भागते हुए कनॉट प्लेस के पालिका बाजार इलाके तक पहुंचे, जहां स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी।

"नीली वर्दी वाले शख्स ने मुझ पर दागे थे पैलेट"

शिकायत में साहिल ने सीधे तौर पर पुलिस बल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वह भीड़ के बीच खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक उनके चेहरे, दाईं आंख, छाती और बाजू पर जोरदार धमाका हुआ। जब उन्होंने मुड़कर देखा तो नीली वर्दी पहने हुए एक सुरक्षाकर्मी के हाथ में बड़ी बंदूक थी, जिससे उन पर धातु के पैलेट (छर्रे) दागे गए थे। साहिल का दावा है कि उन पर पांच से छह बार गोलियां चलाई गईं, जिससे उनके शरीर से खून की धारा बह निकली और वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।

शरीर में 200 छर्रे और आंख की 99% रोशनी खत्म

घायल अवस्था में साहिल को पहले लेडी हार्डिंग अस्पताल, फिर सफदरजंग और अंत में एम्स (AIIMS) के ट्रॉमा सेंटर व आरपीसी आई सेंटर में भर्ती कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट्स और सीटी स्कैन का हवाला देते हुए एफआईआर में बताया गया है कि साहिल के शरीर में कुल 200 से अधिक धातु के छर्रे धंसे हुए हैं। इनमें से तीन छर्रे उनकी दाईं आंख में और कुछ छर्रे दिल के बेहद पास फंसे हुए हैं, जिन्हें डॉक्टर निकालने में असमर्थ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी दाईं आंख की रोशनी लगभग 99% यानी हमेशा के लिए जा चुकी है।

पुलिस से की गई सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग

साहिल ने अपनी शिकायत में दिल्ली पुलिस से यह मांग भी की है कि 20 जुलाई की घटना से जुड़े जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों के तमाम सीसीटीवी फुटेज व ड्रोन कैमरे के रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। उन्होंने कहा कि वह तो केवल एक छात्र के रूप में अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे थे, लेकिन इस हादसे ने उनसे उनकी आंख और पुलिस में भर्ती होने का सपना दोनों छीन लिया। अब इस मामले की जांच शुरू होने के बाद देखना यह होगा कि पुलिस इस पूरी संवेदनहीनता पर क्या कदम उठाती है।