जम्मू-कश्मीर में नशे के सौदागरों पर काल बनकर टूटी पुलिस: 31 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 600 से ज्यादा तस्कर सलाखों के पीछे
जम्मू-कश्मीर को ड्रग्स मुक्त बनाने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में शुरू किया गया अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले एक महीने में पुलिस और सुरक्षाबलों ने नशे के नेटवर्क को इस कदर ध्वस्त किया है कि तस्करों में हड़कंप मच गया है। 11 अप्रैल से शुरू हुए इस 100 दिवसीय विशेष अभियान के पहले 30 दिनों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि घाटी में अब नशे की खेती और व्यापार करने वालों की खैर नहीं है।
तस्करों के घर हुए जमींदोज, करोड़ों की संपत्ति जब्त
इस अभियान के तहत न केवल गिरफ्तारियां की जा रही हैं, बल्कि तस्करों की कमर आर्थिक रूप से भी तोड़ी जा रही है। जांच एजेंसियों ने ड्रग माफियाओं से जुड़ी 31 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को या तो जब्त कर लिया है या उन्हें ध्वस्त कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल 37 बड़े माफियाओं के घरों पर प्रशासन का बुलडोजर चला है। इसके अलावा, अफीम की अवैध खेती को भी जड़ से उखाड़ फेंका गया है।
भारी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद, 646 गिरफ्तार
पुलिस ने इस दौरान 260 किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। नशे के इस काले कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए अब तक 614 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 646 तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया है। सख्त कार्रवाई का आलम यह है कि तस्करी में शामिल लोगों के 252 ड्राइविंग लाइसेंस और 111 वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, नियमों की अनदेखी करने वाली 104 दवा दुकानों (मेडिकल स्टोर्स) के लाइसेंस भी निलंबित किए गए हैं।
जन-जन तक पहुंचा जागरूकता का संदेश
यह अभियान सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक जन आंदोलन का रूप दिया गया है। करीब एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने इस कैंपेन में हिस्सा लिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2.16 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। स्कूलों और कॉलेजों में रैलियों और पदयात्राओं के जरिए युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति सचेत किया गया। खुद एलजी मनोज सिन्हा ने कई जगहों पर पदयात्रा का नेतृत्व कर नागरिकों को इस लड़ाई में साथ आने के लिए प्रेरित किया।
तकनीक और निगरानी का पहरा
नशे की सप्लाई चेन को ट्रैक करने के लिए संवेदनशील इलाकों में 2,800 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही, 3,000 से ज्यादा दवा दुकानों और करीब 1,000 स्कूलों व अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया गया है। नशे की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए 'Tele-MANAS' हेल्पलाइन चौबीसों घंटे काम कर रही है। अभी इस अभियान के दो महीने शेष हैं, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि जम्मू-कश्मीर से नशे का पूरी तरह सफाया हो जाएगा।