दिल्ली में कांग्रेस की मेगा रैली के बीच गरमाई राजनीति

दिल्ली में कांग्रेस की मेगा रैली के बीच गरमाई राजनीति

देश की राजधानी नई दिल्ली में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार की नीतियों, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ ऐतिहासिक 'रामलीला मैदान' में एक विशाल मेगा रैली का आयोजन कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों के 'INDIA' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन के शीर्ष नेताओं की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने की अटकलें अचानक बेहद तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विपक्षी गठबंधन देश के ज्वलंत संवैधानिक मुद्दों, विपक्ष के नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की कथित मनमानी कार्रवाई और देश के मौजूदा हालातों को लेकर राष्ट्रपति भवन का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। रामलीला मैदान में जुटे लाखों कार्यकर्ताओं के हुजूम और राष्ट्रपति भवन में प्रस्तावित इस उच्चस्तरीय मुलाकात की खबरों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच नई हलचल पैदा कर दी है।

कांग्रेस की रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन: जनसैलाब और शीर्ष नेताओं की हुंकार

दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित इस मेगा रैली को विपक्षी एकता और आगामी राजनीतिक अभियानों की मजबूत नींव के रूप में देखा जा रहा है। सुबह से ही देश के कोने-कोने से हजारों और लाखों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक हाथों में तिरंगे और पार्टी के झंडे लेकर राजधानी पहुंचने लगे थे। रैली के मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। अपने आक्रामक भाषणों में राहुल गांधी और खड़गे ने केंद्र की सत्ता पर काबिज सरकार की आर्थिक नीतियों, कॉर्पोरेट घरानों के साथ कथित सांठगांठ और संवैधानिक संस्थाओं के क्षरण पर जोरदार हमला बोला। इस विशाल रैली ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि मुख्य विपक्षी दल सड़क से लेकर संसद तक सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ने वाला है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की अटकलें: विपक्षी एकजुटता का नया मोड़

मेगा रैली के समानांतर ही राष्ट्रपति भवन से आ रही खबरों ने कूटनीतिक और राजनीतिक पंडितों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सूत्रों के मुताबिक, INDIA गठबंधन के घटक दलों के प्रमुख नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर एक ज्ञापन सौंपने की योजना बना रहा है। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से संसद में उठने वाली आवाजों को दबाने, विपक्षी शासित राज्यों में राज्यपालों के कथित हस्तक्षेप, और केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI, IT) के दुरुपयोग का मुद्दा उठाए जाने की संभावना है। यदि विपक्षी दल एकसाथ राष्ट्रपति भवन पहुंचते हैं, तो यह कदम न केवल उनकी आपसी एकजुटता की तस्वीर पेश करेगा बल्कि सरकार पर नैतिक और राजनीतिक दबाव बनाने का एक बड़ा माध्यम भी साबित होगा।

भाजपा और सत्ता पक्ष का पलटवार: रैली को बताया 'हताशा का प्रदर्शन'

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और केंद्र सरकार के मंत्रियों ने कांग्रेस की इस मेगा रैली और राष्ट्रपति से मुलाकात की खबरों पर करारा पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह विशाल रैली देश के विकास से ध्यान भटकाने और अपनी बिखरती साख को बचाने का हताश प्रयास है। सत्ता पक्ष का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नेता खुद को बचाने के लिए जांच एजेंसियों पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं और राष्ट्रपति मुर्मू के दफ्तर का राजनीतिकरण करने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि देश की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के सर्वांगीण विकास के साथ खड़ी है और विपक्ष के इन पैंतरों का जनता पर कोई असर नहीं होने वाला।