2004 में क्यों ठुकराई थी PM की कुर्सी? 'अंतरात्मा की आवाज' का पूरा सच बताएंगी सोनिया गांधी; 10 नवंबर को दुनिया पढ़ेगी अनकही कहानी

2004 में क्यों ठुकराई थी PM की कुर्सी? 'अंतरात्मा की आवाज' का पूरा सच बताएंगी सोनिया गांधी; 10 नवंबर को दुनिया पढ़ेगी अनकही कहानी

साल 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद भारतीय राजनीति में एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ आया जिसने सबको हैरान कर दिया था। चुनाव जीतने के बावजूद कांग्रेस की शीर्ष नेत्री सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया था और अपने इस फैसले के पीछे 'अंतरात्मा की आवाज' का हवाला दिया था। अब दो दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद, खुद सोनिया गांधी इस राज से पर्दा उठाने जा रही हैं। 10 नवंबर को आने वाली उनकी नई आत्मकथा या संस्मरण के जरिए दुनिया उस अनकही कहानी और राजनीतिक परिस्थितियों से रूबरू हो सकेगी, जिसके कारण उन्होंने देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद को ठुकराने का बड़ा फैसला लिया था।

राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से बना रहा रहस्य

वर्ष 2004 में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) ने अप्रत्याशित जीत हासिल की थी, तब हर किसी को यह उम्मीद थी कि सोनिया गांधी देश की अगली प्रधानमंत्री बनेंगी। हालांकि, अंतिम समय में उनके इस फैसले ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी चौंका दिया था। तब से लेकर आज तक इस बात पर लगातार कयास लगाए जाते रहे हैं कि आखिर उस समय पर्दे के पीछे क्या हुआ था। क्या यह पारिवारिक दबाव था, राजनीतिक मजबूरियां थीं या फिर वाकई कोई आंतरिक अंतरात्मा का बुलावा? इन सभी सवालों के जवाब अब पाठकों और राजनीतिक प्रेमियों को मिलने वाले हैं।

10 नवंबर को सामने आएगी इतिहास के पन्नों की अनकही सच्चाई

सोनिया गांधी के जीवन और उनके राजनीतिक सफर के कई ऐसे पहलू हैं जो अब तक आम जनता की नजरों से दूर रहे हैं। आगामी 10 नवंबर को आने वाली इस विशेष पुस्तक या संस्मरण में उनके शुरुआती जीवन, राजनीति में प्रवेश, संकट के दौर और 2004 के उस ऐतिहासिक फैसले का प्रामाणिक विवरण मिलने की उम्मीद है। राजनीतिक इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह किताब एक बड़ा दस्तावेज साबित हो सकती है, जो भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय को स्पष्ट करेगी।