इंदिरा एकादशी 2026 कब है? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त
सनातन धर्म और हिंदू पंचांग में एकादशी व्रत का बहुत अधिक धार्मिक, आध्यात्मिक और मोक्षदायी महत्व माना जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को 'इंदिरा एकादशी' (Indira Ekadashi 2026) के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान आने वाली यह एकादशी बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से न केवल मनुष्य को स्वयं बैकुंठ की प्राप्ति होती है, बल्कि उसके दिवंगत पूर्वजों (पित्रों) को भी यमराज की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और वे सीधे स्वर्ग लोक को प्रस्थान करते हैं। पंचांग की सटीक गणना के अनुसार, इस वर्ष इंदिरा एकादशी का व्रत अक्टूबर 2026 के महीने में रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु के शालिग्राम स्वरूप की पूजा करने और जरूरतमंदों को अन्न-जल दान करने का विधान है, जिससे साधক के जीवन में आने वाले सभी प्रकार के संकट और पितृ दोष दूर हो जाते हैं।
धार्मिक कथाओं और पुराणों के अनुसार, इंदिरा एकादशी के व्रत का महत्व इतना अधिक है कि इसके प्रभाव से अज्ञानी या जाने-अनजाने में हुए बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। भविष्योत्तर पुराण में इस व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने पितरों के निमित्त सच्ची श्रद्धा और नियमों के साथ यह उपवास रखता है, तो उसके सात पुश्त-पुरखों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्रत के नियमों की शुरुआत दशमी तिथि से ही हो जाती है, जिसमें सूर्योदय से पूर्व स्नान और सात्विक भोजन ग्रहण करने का नियम होता है। एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लिया जाता है और पूरे दिन बिना अन्न ग्रहण किए उपवास रखा जाता है।
इंदिरा एकादशी 2026 की सटीक तिथि और पारण का शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी तिथि का आरंभ और समापन समय कुछ इस प्रकार रहेगा, जिसके आधार पर व्रती अपना उपवास संपन्न करेंगे:
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एकादशी तिथि का प्रारंभ: अक्टूबर 2026 को निर्धारित समय अनुसार
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एकादशी तिथि का समापन: अगले दिन समाप्त होने पर
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पारण का शुभ मुहूर्त (Dwadashi Parana Time): व्रत तोड़ने यानी पारण का समय द्वादशी तिथि के भीतर सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने के पश्चात ही निर्धारित किया जाता है।
ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, पारण हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए, क्योंकि इसके बिना व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
इंदिरा एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि और अनुष्ठान
इंदिरा एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद घर के मंदिर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल (जो एक दिन पहले तोड़ा गया हो), चंदन, धूप, दीप और मौसमी फल अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके बाद भगवान को सात्विक चीजों का भोग लगाएं और इंदिरा एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। संध्या के समय आरती करने के बाद गरीबों और जरूरतमंद ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र या अन्न का दान अवश्य करें, क्योंकि दान के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।