यूपी में गो सेवा से चमकेगी किस्मत! सरकार तैयार करेगी 10 हजार 'गो मित्र', जानिए कैसे होगी बंपर कमाई
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गो संरक्षण अभियान को एक नए और आधुनिक आयाम पर ले जाने की तैयारी पूरी कर ली है। अब गो सेवा को केवल धार्मिक या सामाजिक कार्यों तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण रोजगार, प्राकृतिक खेती और युवाओं के भविष्य से जोड़ने का बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार की इस अनूठी योजना के तहत राज्य भर में करीब 10 हजार 'गो मित्र' तैयार किए जाएंगे जो गांव-गांव जाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ेंगे।
1. युवा पीढ़ी को गो सेवा और हरित अर्थव्यवस्था से जोड़ना
इस अभियान के तहत सबसे पहले मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे जो आगे चलकर ग्रामीण इलाकों में जागरूकता फैलाएंगे। स्कूली बच्चों और युवाओं को देसी गोवंश के महत्व, प्राकृतिक खेती के फायदों, बायोगैस और गाय के गोबर से बनने वाले उत्पादों के बारे में जानकारी दी जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को यह समझाना है कि गो सेवा भविष्य में रोजगार और हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) का एक बड़ा जरिया बन सकती है।
2. आश्रय स्थलों में 12 लाख से अधिक गोवंश सुरक्षित
आंकड़ों के मुताबिक इस समय उत्तर प्रदेश में 7,500 से ज्यादा गो आश्रय स्थल सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश को सुरक्षित आश्रय और संरक्षण मिल रहा है। सरकार ने इनकी देखभाल को और बेहतर बनाने के लिए प्रति गोवंश मिलने वाली सहायता राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर सीधे 50 रुपये प्रतिदिन कर दिया है। इसके अलावा कई गोशालाओं में सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
3. पशुपालकों की आमदनी का जरिया बनी सरकार की योजनाएं
'मुख्यमंत्री सहभागिता योजना' और 'पोषण मिशन' के माध्यम से अब तक लगभग 1.15 लाख पशुपालकों को करीब 1.85 लाख गोवंश देखभाल के लिए सौंपे गए हैं। सरकार का साफ मकसद यह है कि पशुपालन केवल शौक न रहे बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय का एक मजबूत साधन बन सके।
4. गोबर से बनेगी कमाई, महिलाओं को मिलेगा रोजगार
गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। अब गोबर और गोमूत्र से गो-काष्ठ (लकड़ी), इको-फ्रेंडली गो-पेंट, वर्मीकंपोस्ट खाद, धूपबत्ती, गमले और मिट्टी के दीये जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन तमाम कामों में ग्रामीण महिलाओं के स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups) को भी शामिल किया गया है, जिससे महिलाओं के लिए घर बैठे स्वरोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।
5. जिले की मांग के अनुसार तय होगी रोजगार की रूपरेखा
हर जिले की भौगोलिक स्थिति और उसकी क्षमता को ध्यान में रखकर गोशालाओं का विशेष मूल्यांकन किया जा रहा है। जिन इलाकों में बायोगैस की ज्यादा संभावना होगी, वहां प्लांट लगाए जाएंगे। वहीं दूसरी जगहों पर जैविक खाद, गो-काष्ठ या अन्य उत्पादों की इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इससे एक तरफ जहां बेसहारा गोवंश को स्थायी संरक्षण मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।