जहर बन रहे दूध पर यूपी सरकार का बड़ा प्रहार: मिलावटखोरों पर होगी सीधी एफआईआर और डेयरियां होंगी सील

जहर बन रहे दूध पर यूपी सरकार का बड़ा प्रहार: मिलावटखोरों पर होगी सीधी एफआईआर और डेयरियां होंगी सील

क्या आप जो दूध पी रहे हैं वह वाकई शुद्ध है? इस सवाल का जवाब अब उत्तर प्रदेश सरकार ने बहुत गंभीरता से लिया है। प्रदेश में दूध के नाम पर सफेद जहर बेचने वालों के खिलाफ एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक अभियान शुरू हो गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने साफ कर दिया है कि अब डेयरी उत्पादों में मिलावट करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यूपी देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जो सिर्फ जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सीधे फैक्ट्री बंद करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई का नियम लाया है।

अब केवल सैंपल जांच नहीं बल्कि पूरा स्टॉक होगा नष्ट

खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ रोशन जैकब ने नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। पहले जब किसी डेयरी में गड़बड़ी मिलती थी तो अधिकारी केवल जांच के लिए नमूना लेकर चले जाते थे। नए नियम के तहत अगर किसी दूध निर्माण इकाई में हानिकारक केमिकल या बाहरी फैट मिलता है तो सिर्फ नमूना नहीं लिया जाएगा। प्रशासन तुरंत पूरा का पूरा स्टॉक जब्त करके उसे नष्ट कर देगा। सरकार का मुख्य मकसद मिलावट के इस पूरे गोरखधंधे को जड़ से खत्म करना है।

सीधे दर्ज होगी एफआईआर और छिनेगा लाइसेंस

जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले ऐसे लोगों पर अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सीधे केस दर्ज किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा कानून 2006 की धारा 34 का इस्तेमाल करते हुए ऐसी फैक्ट्रियों के खिलाफ इमरजेंसी रोक लगा दी जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि जब तक कानूनी कार्रवाई पूरी नहीं होती तब तक वहां उत्पादन पूरी तरह ठप रहेगा। साथ ही इन डेयरियों का फूड लाइसेंस भी तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाएगा।

बाहरी राज्यों के ब्रांड पर भी लगेगा पूर्ण बैन

प्रशासन की नजर सिर्फ राज्य की डेयरियों पर ही सीमित नहीं है। अगर किसी दूसरे राज्य में बना ब्रांडेड दूध यूपी में बिक रहा है और उसमें भी खतरनाक रसायन पाए जाते हैं तो पूरे उत्तर प्रदेश में उसकी बिक्री पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि आम जनता तक सिर्फ सुरक्षित और पौष्टिक उत्पाद ही पहुंचें।

दूध में मिलाए जा रहे थे डिटर्जेंट और जानलेवा केमिकल

विभागीय जांच और छापेमारी में कई डरावने खुलासे हुए हैं। मुनाफा कमाने के चक्कर में डेयरियों में रिफाइंड तेल और सोयाबीन का जमकर इस्तेमाल हो रहा था। दूध को असली और गाढ़ा दिखाने के लिए टैल्कम पाउडर के साथ डिटर्जेंट और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे जानलेवा रसायन मिलाए जा रहे थे। जांच में लिक्विड ग्लूकोज और हाइड्रोजन पेरोक्साइड के अलावा रानीपाल व टिनोपाल जैसे ब्लीचिंग एजेंट का भी पता चला है। ये सस्ते केमिकल लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा हैं। प्रशासन अब ऐसे सभी जानलेवा धंधों पर अंतिम प्रहार करने जा रहा है।