हरिद्वार के पतंजलि फूड पार्क से CISF की सुरक्षा पूरी तरह खत्म
उत्तराखंड की पावन और आध्यात्मिक धर्मनगरी हरिद्वार से देश के औद्योगिक और सुरक्षा गलियारों से एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। योग गुरु बाबा रामदेव के प्रसिद्ध पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क कैंपस से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ (CISF) ने अपनी सुरक्षा स्थायी रूप से हटा ली है। यह सुरक्षा पिछले कई वर्षों से लगातार इस औद्योगिक परिसर को मिल रही थी, लेकिन अब गृह मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाते हुए इस यूनिट के लिए स्वीकृत सभी 34 पदों को पूरी तरह से खत्म करने का आधिकारिक निर्देश जारी कर दिया है। इस बड़े प्रशासनिक फैसले के बाद से औद्योगिक सुरक्षा और कॉर्पोरेट जगत के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है कि आखिर किस वजह से देश की इस दिग्गज संस्था से केंद्रीय सुरक्षा बल को हटाया गया है और अब पतंजलि परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की कमान किसके हाथों में होगी।
जानिए कब से और किन परिस्थितियों में तैनात थी पतंजलि पार्क में CISF की टुकड़ी
हरिद्वार स्थित पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क देश के सबसे बड़े और आधुनिक हर्बल एवं फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में से एक माना जाता है, जहां हर दिन हजारों की संख्या में कर्मचारी, आगंतुकों और देश-विदेश से लोग आते हैं। इस महत्वपूर्ण औद्योगिक परिसर की संवेदनशीलता और सुरक्षा को देखते हुए जून 2015 में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के आदेश पर सीआईएसएफ (CISF) की एक विशेष टुकड़ी को तैनात किया गया था। सीआईएसएफ के जवान पिछले लगभग एक दशक से इस विशाल कैंपस की चौबीसों घंटे किलेबंदी और सुरक्षा चाक-चौबंद बनाए रखने का काम कर रहे थे। केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण इस परिसर को एक विशेष प्रकार का सरकारी और सुरक्षात्मक कवच प्राप्त था। हालांकि, समय के साथ सुरक्षा समीक्षा और आंतरिक प्रबंधों के आकलन के बाद बीते मई महीने में सीआईएसएफ ने अपनी इस यूनिट को यहां से पूरी तरह हटा लिया था, जिसके बाद अब गृह मंत्रालय ने इसके आधिकारिक पदों को ही समाप्त करने का यह बड़ा निर्णय लिया है।
गृह मंत्रालय का कड़ा निर्देश: सुरक्षा विंग के सभी 34 पद किए गए समाप्त
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी किए गए आदेश के अनुसार, हरिद्वार के पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क के लिए सीआईएसएफ के तहत स्वीकृत सभी 34 सुरक्षा पदों को रद्द कर दिया गया है। जब भी किसी निजी या अर्ध-सरकारी संस्थान से केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाया जाता है, तो उसके बाद प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उन पदों का विलोपन (Abolition of Posts) कर दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि अब इस विशेष इकाई के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कोई भी सीआईएसएफ बल तैनात नहीं रहेगा। गृह मंत्रालय के इस निर्देश के बाद अब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि पतंजलि प्रबंधन को अपने इस विशाल कैंपस की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से निजी सुरक्षा एजेंसियों (Private Security Agencies) या राज्य पुलिस के स्थानीय प्रबंधों पर निर्भर रहना होगा। इस प्रकार के बड़े फैसले देश के अन्य औद्योगिक घरानों के लिए भी एक बड़ा संकेत माने जा रहे हैं, जहां केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की समीक्षा लगातार की जाती है।
पतंजलि पार्क की सुरक्षा और भविष्य के वैकल्पिक इंतजामों पर असर
सीआईएसएफ की सुरक्षा हटने और गृह मंत्रालय द्वारा सभी पद समाप्त किए जाने के बाद अब पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क प्रबंधन ने अपने स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता और वैकल्पिक इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। इतने बड़े औद्योगिक और मैन्युफैक्चरिंग हब में सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए आधुनिक सीसीटीवी सर्विलांस, मेटल डिटेक्टर्स और प्रशिक्षित प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की तैनाती बढ़ाई जा रही है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी इस बात पर नजर बनाए हुए है कि कैंपस की आंतरिक और बाहरी कानून-व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रहे। हालांकि, केंद्रीय सुरक्षा बल के हटने से परिसरों की वीआईपी सुरक्षा और स्टेट-ऑफ-द-आर्ट डिफेंस मैकेनिज्म में थोड़ा बदलाव जरूर आया है, लेकिन प्रबंधन का दावा है कि वहां आने वाले उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और उत्पादों की सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित और चाक-चौबंद है।
उत्तराखंड के औद्योगिक गलियारों में इस फैसले की चर्चा और इसके दूरगामी मायने
हरिद्वार और सिडकुल (SIDCUL) क्षेत्र उत्तराखंड का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाता है, जहां देश की कई दिग्गज कंपनियां अपने कारखाने चला रही हैं। पतंजलि फूड पार्क से सीआईएसएफ की सुरक्षा हटने और पदों के खत्म होने की इस खबर ने पूरे तराई और पहाड़ी क्षेत्र के व्यापारिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। लोग यह जानना चाहते हैं कि केंद्रीय बलों की वापसी के क्या कूटनीतिक और प्रशासनिक कारण रहे होंगे। जानकारों का मानना है कि गृह मंत्रालय देश भर के विभिन्न निजी और औद्योगिक संस्थानों में तैनात सुरक्षा बलों की समय-समय पर समीक्षा करता है ताकि सरकारी बलों का उपयोग मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक प्रतिष्ठानों के लिए किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के बीच पतंजलि प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि धर्मनगरी हरिद्वार के इस प्रमुख उद्यम को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या सुरक्षात्मक समस्या का सामना न करना पड़े।