डीजे की कर्णभेदी और तेज आवाज ने ली 17 साल की मासूम की जान
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक बेहद हैरान करने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने शादियों और सार्वजनिक आयोजनों में बजाए जाने वाले डीजे (DJ) की तेज आवाज और कान के पर्दे फाड़ देने वाले शोर पर एक बहुत बड़ा नैतिक और कानूनी सवाल खड़ा कर दिया है। बैतूल में एक 17 साल की नौवीं कक्षा की छात्रा की उस समय अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी, जब पास में ही डीजे पर बहुत तेज आवाज में गाने बज रहे थे। आनन-फानन में परिजनों और स्थानीय लोगों द्वारा उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस अचानक हुई दर्दनाक मौत के बाद से मृतका के परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों ने डीजे की अत्यधिक तेज और कंपन पैदा करने वाली आवाज को ही इस मौत की मुख्य वजह करार दिया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम के साथ-साथ इस बात को लेकर भी तीव्र आक्रोश है कि आखिर प्रशासन की रोक के बावजूद रिहायशी इलाकों में इतने उच्च डेसिबल का शोर क्यों परवान चढ़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका अपने परिवार के साथ एक पारिवारिक और सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गई हुई थी। कार्यक्रम स्थल पर काफी तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाए जा रहे थे, जिसकी धमक से आसपास का माहौल थर्रा रहा था। अचानक से उस 17 साल की किशोरी को असहज महसूस होने लगा और वह डीजे के शोर के बीच ही चक्कर खाकर अचानक बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद गर्मी या घबराहट की वजह से उसकी तबियत थोड़ी खराब हुई है, लेकिन जब कुछ देर तक उसके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई और उसकी सांसें धीमी पड़ने लगीं, तो परिवार वालों के हाथ-पांव फूल गए। उसे तुरंत उठाकर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद ही उसे मृत घोषित कर दिया। कम उम्र की इस होनहार छात्रा की इस तरह अचानक हुई मौत से हर कोई स्तब्ध है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
मेडिकल साइंस के नजरिए से क्यों खतरनाक है डीजे का अत्यधिक शोर?
इस दुखद घटना के सामने आने के बाद से स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने भी एक बार फिर से इस बात की चेतावनी दी है कि डीजे या बड़े साउंड सिस्टम की हाई-डेसिबल आवाज इंसानी शरीर, विशेषकर दिल और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के लिए कितनी घातक साबित हो सकती है। सामान्य बातचीत की आवाज 40 से 60 डेसिबल (dB) के बीच होती है, लेकिन आज के समय में कार्यक्रमों में बजाए जाने वाले डीजे 100 से 120 डेसिबल या उससे भी अधिक के शोर स्तर को पार कर जाते हैं। इतनी तेज और कंपन वाली आवाज जब कानों के जरिए दिमाग और दिल तक पहुंचती है, तो युवाओं या कम उम्र के लोगों में भी कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest), पैनिक अटैक या हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याएं अचानक पैदा हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से कोई हल्की स्वास्थ्य समस्या या घबराहट की शिकायत होती है, उनके लिए इस तरह का कर्णभेदी शोर जानलेवा साबित हो सकता है।
पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
घटना के बाद स्थानीय निवासियों और परिजनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और स्थानीय प्रशासन के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि रात के समय या रिहायशी इलाकों में एक तय डेसिबल सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाना पूरी तरह से गैरकानूनी है, इसके बावजूद धड़ल्ले से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पुलिस अब इस मामले में मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि यह वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट हो सके कि छात्रा की मौत का असली कारण हार्ट अटैक था या कोई अन्य अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर समाज के सामने यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि हमारे जश्न और उत्सव दूसरों की जिंदगी पर भारी न पड़ जाएं।
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