डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने संकट से जूझ रहे किसानों और मजदूरों के लिए खोले तिजोरी के द्वार

डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने संकट से जूझ रहे किसानों और मजदूरों के लिए खोले तिजोरी के द्वार

महाराष्ट्र राज्य के किसानों और ग्रामीण इलाकों से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे राज्य के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मानसूनी बारिश की बेरुखी, समय पर पानी न मिलने और जलाशयों के सूख जाने के कारण महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के बीड और धराशिव (उस्मानाबाद) समेत लगभग 75 प्रतिशत जिलों को आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त (Drought Declared) घोषित कर दिया है। इस भयानक प्राकृतिक आपदा और सूखे के संकट के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण आबादी को राहत देने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक वित्तीय ऐलानों की झड़ी लगा दी है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन लाखों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और संबल प्रदान करना है, जिनकी पूरी सालभर की फसलें बारिश न होने के कारण खेतों में ही सूख चुकी हैं और वे भुखमरी तथा कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।

पिछले कुछ महीनों से मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिमी महाराष्ट्र के कई जिलों में बारिश का कोटा बेहद कम रहा है, जिसके कारण खरीफ की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। कुओं और बोरवेल का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है, जिससे पीने के पानी का भी भारी संकट पैदा हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासनों की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है। बीड, धराशिव, लातूर, जालना और छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद) जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। किसानों की इस दर्दनाक स्थिति को समझते हुए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस कठिन घड़ी में पूरी तरह से अन्नदाताओं के साथ खड़ी है और उन्हें किसी भी हाल में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

राहत पैकेज और किसानों के कर्ज तथा बिजली बिलों में बड़ी राहत

उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा घोषित किए गए राहत पैकेजों के तहत प्रभावित किसानों को तुरंत प्रभाव से वित्तीय सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित किए गए सभी 75% इलाकों में किसानों के कृषि पंपों के बिजली बिलों (Electricity Bills) को माफ करने और बकाया लोन की वसूली पर रोक लगाने का ऐलान किया है। इसके अलावा, जिन किसानों की फसलें 50 प्रतिशत से अधिक नष्ट हो चुकी हैं, उन्हें राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के मानदंडों से बढ़कर विशेष मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फसल बीमा कंपनियों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के दावों का निपटारा जल्द से जल्द करें ताकि समय पर उनके खातों में पैसे पहुंच सकें और वे अगली रबी की बुआई की तैयारी कर सकें।

पेयजल आपूर्ति और मनरेगा के तहत मजदूरों के लिए रोजगार की गारंटी

फसलों के नुकसान के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में मवेशियों के लिए चारे और इंसानों के लिए पीने के पानी की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने बीड, धराशिव और अन्य सूखाग्रस्त जिलों में टैंकरों के जरिए जलापूर्ति बढ़ाने और युद्ध स्तर पर मवेशियों के लिए चारा छावनियां (Cattle Camps) शुरू करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कृषि कार्यों से वंचित हो चुके ग्रामीण मजदूरों और भूमिहीन किसानों को आजीविका का संकट दूर करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGS) के तहत काम के दिनों की संख्या को बढ़ाने का भी बड़ा निर्णय लिया गया है ताकि कोई भी परिवार रोजगार के अभाव में पलायन करने को मजबूर न हो। राज्य सरकार के इन कदमों से किसानों को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।