लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान देने की तैयारी: नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों को दुनिया तक पहुंचाएगी धामी सरकार

लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान देने की तैयारी: नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों को दुनिया तक पहुंचाएगी धामी सरकार

उत्तराखंड की संस्कृति, लोक संगीत और पहाड़ों की अनूठी माटी की खुशबू को अब पूरी दुनिया में गूंजाने के लिए धामी सरकार ने अपनी रफ्तार और तेज कर दी है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक और जन-जन की आवाज बन चुके नरेंद्र सिंह नेगी के गीत अब ग्लोबल मंच पर अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उत्तराखंड की लोक संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और पहाड़ी संगीत को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने विशेष कार्ययोजना पर काम करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि उत्तराखंड की संस्कृति यहां की असली पहचान है और इसे देश-दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है।

लोक संस्कृति और पारंपरिक धरोहर को ग्लोबल मंच देने का प्रयास

उत्तराखंड की लोक संस्कृति, खान-पान, पहनावा और पारंपरिक संगीत हमेशा से अपनी समृद्ध विरासत के लिए जाने जाते रहे हैं। नरेंद्र सिंह नेगी के गीत सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे पहाड़ के संघर्ष, संस्कृति, प्रेम और सामाजिक वास्तविकताओं के सजीव दस्तावेज माने जाते हैं। सरकार की इस नई पहल का उद्देश्य पहाड़ी संस्कृति के इन अनमोल मोतियों को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत मंच प्रदान करना है। इसके तहत आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च), सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल स्ट्रीमिंग के जरिए नेगी दा के गीतों और उत्तराखंड के लोक कलाकारों की कला को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे प्रवासी उत्तराखंडी भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़े रहें।

धामी सरकार की सांस्कृतिक नीतियों से बढ़ रहा पहाड़ी कलाकारों का मान

पिछले कुछ वर्षों में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने उत्तराखंड की कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। पारंपरिक मेलों, त्योहारों और लोक कलाओं को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 'हाउस ऑफ हिमालयाज' और अन्य सांस्कृतिक अभियानों की तर्ज पर अब लोक संगीत को भी वैश्विक पहचान देने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। सरकार का यह प्रयास न केवल राज्य की लोक संस्कृति को सहेजेगा, बल्कि ग्लोबल टूरिज्म और कल्चरल एक्सचेंज को भी बढ़ावा देगा, जिससे देश-विदेश के पर्यटक उत्तराखंड की लोक कला की ओर आकर्षित होंगे।