रखाइन के बाजार में बमबारी से 49 बेगुनाहों की दर्दनाक मौत, मची चीख-पुकार
म्यांमार में गृहयुद्ध के हालात दिन-प्रतिदिन बेहद भयानक और खूनी होते जा रहे हैं। देश की सत्ता पर काबिज सैन्य जुंटा (Myanmar Army) ने विद्रोही गुटों के खिलाफ अपनी क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए रखाइन (Rakhine State) प्रांत के विद्रोही नियंत्रण वाले एक व्यस्त इलाके में भीषण हवाई हमला (Airstrike) कर दिया है। बाजार के ठीक ऊपर हुई इस अंधाधुंध बमबारी में कम से कम 49 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। म्यांमार सेना की इस अमानवीय कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस क्रूर हमले की कड़ी निंदा की है। सैन्य शासन लगातार अपनी खोती हुई जमीन और नियंत्रण को वापस पाने के लिए नागरिकों को निशाना बना रहा है, जिससे देश में मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
रखाइन प्रांत में सैन्य जुंटा का खूनी तांडव और बाजार में तबाही
म्यांमार का रखाइन राज्य लंबे समय से अराकान आर्मी (Arakan Army) और म्यांमार की सैन्य सरकार के बीच भीषण संघर्ष का मुख्य केंद्र बना हुआ है। हाल ही में जब स्थानीय लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए एक स्थानीय बाजार में जुटे हुए थे, तभी म्यांमार वायु सेना के फाइटर जेट्स ने आसमान से अचानक मौत बरसाना शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हवाई हमले में बाजार की दुकानें, मलबे का ढेर बन गईं और चारों तरफ लाशें बिछ गईं। चश्मदीदों के अनुसार, मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, जो इस सैन्य बर्बरता का शिकार बन गए। सैन्य जुंटा को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि रखाइन का एक बड़ा हिस्सा उनके नियंत्रण से बाहर होकर विद्रोही गुटों के हाथ में चला गया है, और इसी बौखलाहट में वह अब आम जनता को सामूहिक सजा देने पर उतारू हो गई है।
अराकान आर्मी का बढ़ता प्रभाव और सेना की बढ़ती हताशा
पिछले कुछ महीनों में म्यांमार के विभिन्न हिस्सों में जातीय सशस्त्र संगठनों और विद्रोही गुटों ने सैन्य सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए कई रणनीतिक चौकियों और कस्बों पर कब्जा कर लिया है। रखाइन प्रांत में अराकान आर्मी की ताकत लगातार मजबूत हो रही है, जिससे म्यांमार की सेना का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। मैदानी इलाकों और जंगलों में विद्रोहियों के हाथों लगातार मिल रही हार से बौखलाई सेना अब अपनी हवाई ताकत का इस्तेमाल करके नागरिकों को आतंकित करने की रणनीति पर काम कर रही है। सैन्य जुंटा जानबूझकर उन रिहायशी इलाकों, स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों को निशाना बना रही है जहां विद्रोहियों का परोक्ष प्रभाव माना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि सेना की यह सैन्य कार्रवाई उसकी सामरिक मजबूती को नहीं, बल्कि उसकी घोर लाचारी और आसन्न हार को दर्शाती है।
गहराता मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर सवाल
म्यांमार में चल रहे इस खूनी संघर्ष के कारण देश के भीतर लाखों लोग अपने घर-बार छोड़कर शरणार्थी बनने को मजबूर हो चुके हैं। भोजन, साफ पानी, दवाइयों और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी के कारण स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। रखाइन में हुए इस ताजा हवाई हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि म्यांमार के नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा करने में वैश्विक समुदाय और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं। मानवाधिकार संगठनों ने म्यांमार की सेना द्वारा किए जा रहे इन युद्ध अपराधों (War Crimes) की स्वतंत्र जांच कराने और सैन्य नेतृत्व पर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग की है। हालांकि, कूटनीतिक वार्ताओं और बयानों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई न होने के कारण म्यांमार के आम लोगों को हर दिन अपनी जान की कीमत चुकानी पड़ रही है।
भविष्य के संकेत और म्यांमार के गृहयुद्ध की भीषण विभीषिका
जिस प्रकार से म्यांमार की सेना नागरिकों पर अत्याचार बढ़ा रही है, उससे साफ जाहिर होता है कि देश में शांति बहाلی की उम्मीदें फिलहाल बहुत दूर की कौड़ी हैं। विद्रोही गुटों ने भी सेना के इन हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने का संकल्प लिया है, जिससे आने वाले दिनों में गृहयुद्ध और अधिक हिंसक रूप ले सकता है। पड़ोसी देशों और आसियान (ASEAN) के देशों पर भी इस शरणार्थी संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता का गहरा असर पड़ रहा है। रखाइन के बाजार में हुए इस नरसंहार ने पूरी दुनिया के जमीर को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन जब तक अंतरराष्ट्रीय बिरादरी म्यांमार की जुंटा सरकार के खिलाफ कोई निर्णायक और कड़ा कदम नहीं उठाती, तब तक वहां की अवाम का यह खून-खराबा रुकने वाला नहीं है।