चीन की दोहरी चाल: अरुणाचल पर साजिश, हमदर्दी का नाटक
अरुणाचल प्रदेश से लगती भारतीय सीमा पर चीन का दोहरा और शातिर चरित्र एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। एक तरफ जहां चीनी सेना एलएसी के बेहद करीब अवैध रूप से बस्तियां बसाकर और सैन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण करके भारत की पावन भूमि को हड़पने की नीयत से लगातार घुसपैठ और उकसावे वाली कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर चीन का भोंपू माना जाने वाला सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' दुनिया के सामने बड़ा दिल दिखाने और शांतिदूत बनने का ढोंग रच रहा है। ड्रैगन की इस दोहरी चालबाजी का मुख्य मकसद अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को गुमराह करना और अपनी विस्तारवादी आक्रामकता पर पर्दा डालना है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और रणनीतिक विशेषज्ञ चीन के इस पीआर स्टंट और नापाक इरादों को भली-भांति समझते हैं और सरहद पर ड्रैगन की हर एक कायराना चाल का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
सीमा पर अतिक्रमण की घिनौनी साजिश और ग्लोबल टाइम्स की झूठी कूटनीति का पर्दाफाश
चीन की हमेशा से यह फितरत रही है कि वह अपनी सीमाओं का विस्तार करने के लिए 'सलामी स्लाइसिंग' यानी धीरे-धीरे जमीन दबाने की नीति पर काम करता है। अरुणाचल प्रदेश के सरहदी इलाकों में चीन ने पिछले कुछ समय से जिस तरह से जनसांख्यिकीय बदलाव लाने और रणनीतिक गांव विकसित करने की गति तेज की है, वह सीधे तौर पर भारत की क्षेत्रीय अखंडता के लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा है। इन नापाक हरकतों को छिपाने के लिए चीनी प्रोपेगैंडा मशीनरी यानी ग्लोबल टाइम्स में ऐसे आलेख और विचार छापे जा रहे हैं जिनमें यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि बीजिंग पड़ोसी देशों के साथ मधुर संबंध और आपसी सद्भाव चाहता है। मीडिया में बड़े दिल और दरियादिली का यह खोखला प्रदर्शन वास्तव में एक सुनियोजित मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है, जिससे भारत पर रणनीतिक दबाव बनाया जा सके और वैश्विक स्तर पर अपनी आक्रामक छवि को सुधारा जा सके।
भारतीय सरहद पर सामरिक घुसपैठ और ड्रैगन के छलावे का पूरा सच
अरुणाचल प्रदेश को चीन लंबे समय से दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताकर अपना झूठा दावा ठोकता रहा है, जिसे भारत ने हमेशा सिरे से खारिज किया है। जमीनी हकीकत यह है कि चीनी पीपुल्स लिबरनेशन आर्मी सीमा के पास फॉरवर्ड एयरबेस, राडार स्टेशन और पक्के बंकरों का जाल बिछा रही है। इसके विपरीत, ग्लोबल टाइम्स अपने संपादकीय में शांति, विकास और व्यापारिक सहयोग की बातें करता है। ड्रैगन के इस मुखौटे के पीछे का असल सच यह है कि वह बातचीत की मेज पर तो शांति की बात करता है लेकिन बैकग्राउंड में अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने से बाज नहीं आता। चीन की इस दोहरी कूटनीति का उद्देश्य भारत को भ्रम में रखकर अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना है, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित तनाव के दौरान वह अपनी शर्तों पर सौदेबाजी कर सके।
पूर्वोत्तर सीमा पर सुरक्षा की अभेद्य दीवार और भारत का आक्रामक जवाब
भारत सरकार और भारतीय सशस्त्र बलों ने चीन के इस दोहरे रवैये को भांपते हुए पूर्वोत्तर भारत में अपनी सीमाओं को पूरी तरह से सील और अभेद्य बना दिया है। अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम पहाड़ियों और घाटियों में बीआरओ द्वारा ऑल-वेदर रोड्स, अत्याधुनिक सुरंगों और रणनीतिक पुलों का निर्माण रिकॉर्ड गति से पूरा किया गया है। अब भारतीय सेना किसी भी चीनी दुस्साहस का त्वरित और मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। चीनी प्रोपेगैंडा अखबार के बड़े-बड़े दावों और झूठे बयानों को दरकिनार करते हुए, भारत ने साफ कर दिया है कि जब तक एलएसी पर यथास्थिति बहाल नहीं होती और सीमाओं पर पूरी तरह से शांति नहीं आती, तब तक चीन के साथ संबंधों में सामान्य स्थिति की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है।
वैश्विक कूटनीति के मंच पर बेनकाब होता चीन का प्रोपेगैंडा मॉडल
आज का आधुनिक भारत चीन के प्रोपेगैंडा मीडिया के छलावे में आने वाला नहीं है। वैश्विक स्तर पर भी अब यह बात किसी से छिपी नहीं रही है कि चीन की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर होता है। एक तरफ ग्लोबल टाइम्स का यह दिखाना कि चीन क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थक है और दूसरी तरफ अरुणाचल में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास, बीजिंग के घिनौने विस्तारवादी एजेंडे को उजागर करता है। भारत अपनी संप्रभुता और एक-एक इंच जमीन की रक्षा के लिए पूरी तरह दृढ़ संकल्पित है, और ड्रैगन की ऐसी किसी भी दोहरी चाल या मीडिया प्रोपेगैंडा को भारतीय कूटनीति और सेना जमीन पर ही ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह तैयार है।