अरुणाचल से सटी LAC पर चीन की चाल: तिब्बत के 628 गांवों में बसाए लोग

अरुणाचल से सटी LAC पर चीन की चाल: तिब्बत के 628 गांवों में बसाए लोग

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ड्रैगन ने एक बार फिर अपनी विस्तारवादी नीतियों को धार देते हुए अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा के पास बेहद खतरनाक और सुनियोजित खेल शुरू कर दिया है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसके मुताबिक चीन ने एलएसी के बेहद करीब तिब्बत के सीमाई इलाकों में कुल 628 सामरिक गांवों का जाल बिछा दिया है। इन तथाकथित 'वेल-ऑफ विलेजेस' यानी शियाओकांग गांवों में अब तेजी से नागरिकों को लाकर बसाया जा रहा है। बीजिंग की इस सोची-समझी रणनीति का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना और भारत के खिलाफ एक बड़ी जनसांख्यिकीय घुसपैठ को अंजाम देना है। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के सामने आने के बाद भारतीय रक्षा विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।

नागरिक बस्तियों की आड़ में खड़े किए जा रहे हैं खतरनाक सैन्य ठिकाने

चीन की इन बस्तियों को सिर्फ साधारण रिहायशी इलाकों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रक्षा विश्लेषकों और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों का साफ तौर पर मानना है कि चीन नागरिक बस्तियों और गरीबी उन्मूलन योजनाओं की आड़ में इन इलाकों को गुप्त सैन्य अड्डों में तब्दील कर रहा है। इन 628 गांवों में बसाई जा रही आबादी और तैयार किए जा रहे आधुनिक बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल भविष्य में फॉरवर्ड मिलिट्री पोस्ट के रूप में किया जा सकता है। इन बस्तियों के जरिए चीन एलएसी के पास तक पक्की सड़कें, उन्नत संचार नेटवर्क, रसद और हथियारों को छिपाने के ठिकाने बना रहा है। जरूरत पड़ने पर ये गांव चीनी पीपुल्स लिबरनेशन आर्मी यानी पीएलए के सैनिकों के लिए फ्रंटलाइन शेल्टर और ट्रांजिट कैंप के तौर पर काम करेंगे। यानी शांति के संदेश देने वाला चीन अंदर ही अंदर कूटनीतिक और सामरिक मोर्चे पर भारत को घेरने की बहुत बड़ी साजिश रच रहा है।

भारत की सामरिक सुरक्षा और रणनीतिक गहराई पर मंडराता गंभीर संकट

चीन की इस पैंतरेबाजी से भारत की रणनीतिक गहराई को सीधे तौर पर चुनौती मिल रही है। अरुणाचल प्रदेश से लगी सीमा पर इन तथाकथित रक्षा गांवों के जरिए बीजिंग भविष्य में अपनी क्षेत्रीय दावों को कानूनी और कूटनीतिक रूप से मजबूत करने की फिराक में है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन गांवों में बसाए जा रहे लोगों और बस्तियों की लोकेशन का करीब 72 प्रतिशत हिस्सा रणनीतिक रूप से भारत के लिए अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों के सामने स्थित है। ऐसे में यदि सीमा पर कभी कोई सैन्य गतिरोध या संघर्ष की स्थिति बनती है, तो चीन को इन पहले से तैयार बस्तियों और मजबूत सड़क मार्ग के जरिए साजो-सामान और सैनिकों को तुरंत आगे धकेलने में भारी बढ़त मिल जाएगी। भारत के सुरक्षा योजनाकारों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि दुश्मन देश सरहद के ठीक मुहाने पर अपनी नागरिक आबादी की ढाल तैयार कर रहा है।

जनसांख्यिकीय बदलाव और मनोवैज्ञानिक युद्ध का खतरनाक पैंतरेबाज़ खेल

इस पूरी रिपोर्ट का सबसे डरावना पहलू यह है कि चीन इन इलाकों में तिब्बतियों और अन्य नागरिकों को लाकर सीमाई डेमोग्राफी यानी जनसांख्यिकी को पूरी तरह बदलना चाहता है। जानकारों का कहना है कि इन सीमावर्ती गांवों को बसाने के पीछे एक मनोवैज्ञानिक खेल भी काम कर रहा है। चीन का मकसद आने वाली पीढ़ियों के दिलों-दिमाग में यह मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालना है कि इन विवादित और सीमावर्ती क्षेत्रों पर निर्विवाद रूप से ड्रैगन का नियंत्रण है। इन इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासनिक और बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह बीजिंग पर निर्भर रहेंगे, जिससे भारत के खिलाफ स्थानीय स्तर पर एक स्थाई भौगोलिक और सामाजिक दीवार खड़ी की जा सके। यह एक प्रकार का 'हाइब्रिड वॉरफेयर' है, जिसमें युद्ध लड़े बिना ही बस्तियों के जरिए जमीन पर कब्जा जमाने और उसे स्थायी रूप देने की कोशिश की जाती है।

भारत सरकार और सेना का कड़ा रुख और भविष्य की चौकसी

भारतीय सैन्य नेतृत्व और कूटनीतिक स्तर पर इस चुनौती से निपटने के लिए लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। भारत सरकार ने भी स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पर शांति और सामान्य स्थिति बहाली के लिए एलएसी पर स्थिरता पहली शर्त है। भारतीय सेना और बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) द्वारा अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में लगातार आधुनिक सड़कों, सुरंगों और फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट बेस का तेजी से विकास किया जा रहा है। ताकसिंग और सुबनसिरी जैसे दूरदराज के संवेदनशील सेक्टरों में भी हमारे जवानों की पहुंच अब और अधिक सुगम हो चुकी है। चीन की हर हरकत पर भारतीय खुफिया एजेंसियां और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए पैनी नजर रखी जा रही है। हालांकि, इस ताजा रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में भारत को अपनी उत्तरी सीमा पर सुरक्षा के मोर्चे पर और अधिक सतर्क, आक्रामक और तकनीक-युक्त नीति के साथ आगे बढ़ना होगा।