मिडिल ईस्ट में महायुद्ध का खतरा टला? फाइनल डील के बेहद करीब अमेरिका और ईरान; तेहरान जा सकते हैं पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में पिछले लंबे समय से चले आ रहे युद्ध के बाद अब दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। लगातार जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच सूत्रों के हवाले से मिली ताजा रिपोर्टों में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम युद्धविराम समझौते (Final Ceasefire Deal) के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए बेहद गंभीर और गोपनीय राजनयिक प्रयास चल रहे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी बैकचैनल बातचीत में पड़ोसी देश पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान 'अल अरबिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर बुधवार को अचानक ईरान की राजधानी तेहरान का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि वे वहां वाशिंगटन और तेहरान के बीच 'अंतिम मसौदा समझौता' पूरा होने का एक बड़ा और ऐतिहासिक ऐलान कर सकते हैं।
हज के बाद इस्लामाबाद में होगी अगली बड़ी बैठक, बैकचैनल वार्ता हुई तेज
सामने आई रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि आगामी पवित्र हज के मौसम के संपन्न होने के ठीक बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इस महावार्ता का अगला और बेहद महत्वपूर्ण दौर आयोजित होने की पूरी संभावना है। इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों महाशक्तियों के बीच चल रही सीक्रेट बैकचैनल वार्ता में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण और रणनीतिक भूमिका को एक बार फिर से दुनिया के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। ये तमाम सकारात्मक घटनाक्रम बीते अप्रैल महीने से लागू बेहद नाजुक और अस्थायी युद्धविराम के दौरान सामने आ रहे हैं। पिछले करीब एक महीने से पाकिस्तान इस अस्थायी युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते में तब्दील करने और दोनों कट्टर विरोधी पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत को सुविधाजनक बनाने में दिन-रात सक्रिय भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इस संवेदनशील मोड़ पर इस्लामाबाद और तेहरान की ओर से अभी तक जनरल आसिम मुनीर की इस हाई-प्रोफाइल यात्रा की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्रीय मीडिया और शीर्ष राजनयिक सूत्रों ने इसकी प्रबल संभावना जताई है।
क्या है इस ऐतिहासिक समझौते का ड्राफ्ट और इसके प्रमुख मुद्दे?
डिप्लोमैटिक सोर्सेज के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित इस शांति समझौते के मसौदे में कई बड़े वैश्विक और रणनीतिक मुद्दों को शामिल किया गया है। इस डील के मुख्य बिंदुओं में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से पूरी तरह खोलना, ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में बड़ी ढील देना, समुद्री सुरक्षा की अंतरराष्ट्रीय गारंटी सुनिश्चित करना और दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध (Full-Scale War) की आशंका को हमेशा के लिए टालने के लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र बनाना शामिल है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार की थी कि तेहरान से मध्यस्थों के जरिए एक नया संशोधित प्रस्ताव मिलने के बाद उन्होंने फिलहाल ईरान पर होने वाले बड़े अमेरिकी सैन्य हमलों को पूरी तरह रोक दिया है। ट्रंप ने खुलासा किया था कि सऊदी अरब, यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) और कतर जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं ने उनसे कूटनीति को एक और मौका देने की विशेष अपील की थी। दूसरी तरफ, ईरान का इस बातचीत में बिल्कुल स्पष्ट रुख है कि किसी भी स्थायी समझौते में प्रतिबंधों से तत्काल राहत, विदेशों में जमे उसके अरबों डॉलर के फंड की रिहाई और अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना अनिवार्य होना चाहिए।
शांति वार्ता के बीच ईरान के मुख्य वार्ताकार की सख्त चेतावनी
एक तरफ जहां शांति समझौते की टेबल सजी है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच बयानों के तीर भी चल रहे हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने बुधवार सुबह एक बयान देकर सबको चौंका दिया कि अमेरिका असल में मध्य पूर्व में फिर से युद्ध भड़काने की साजिश रच रहा है। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में जवाबी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ट्रंप प्रशासन इस शांति समझौते की शर्तों पर ईमानदारी से सहमत नहीं हुआ, तो ईरान भी उसे उसकी ही भाषा में करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरानी सरकारी मीडिया में प्रसारित अपने एक ऑडियो संदेश में गालिबाफ ने सीधे तौर पर कहा कि दुश्मन तमाम आर्थिक और राजनीतिक दबावों के बावजूद अपने सैन्य इरादों से पीछे नहीं हटा है और एक नया युद्ध थोपने की कोशिश कर रहा है।
जेडी वेंस बोले- प्रगति अच्छी है, लेकिन हमारी सेना भी तैयार है
आपको बता दें कि बीते 8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच हुए एक अस्थायी युद्धविराम ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच के उस सीधे और भयानक सैन्य संघर्ष को रोक दिया था, जिसने पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल के बाजार को हिलाकर रख दिया था। उस सीजफायर के बाद से ही दोनों पक्षों के बीच लगातार जुबानी जंग जारी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर ईरान को पूरी तरह तबाह करने और नई सैन्य कार्रवाई की खुली धमकियां दी हैं, तो वहीं ईरानी अधिकारियों ने भी अमेरिका को विनाशकारी अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। इन सबके बावजूद, पाकिस्तानी मध्यस्थता के चलते दोनों देशों के शीर्ष राजनयिकों के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है। इस पूरे मामले पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि शांति वार्ता में काफी अच्छी प्रगति हो रही है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने ईरान को सख्त लहजे में चेताया कि डिप्लोमेसी अपनी जगह है, लेकिन अमेरिकी सेना किसी भी चुनौती से निपटने के लिए हर समय पूरी तरह मुस्तैद खड़ी है।