डोनाल्ड ट्रंप ने किया बड़ा दावा, बोले- 'दोनों पक्ष तुरंत रोकें हमले'; जेलेंस्की बोले- 'मेरे लिए यह नई खबर'
लगभग साढ़े चार साल से जारी रूस और यूक्रेन के विनाशकारी युद्ध के बीच एक बेहद चौंकाने वाला कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए ऐलान किया है कि रूस और यूक्रेन दोनों ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने के लिए तैयार हो गए हैं और दोनों देशों के बीच तत्काल प्रभाव से 'एनर्जी सीजफायर' (Energy Ceasefire) लागू हो गया है। ट्रंप ने अपनी संक्षिप्त लेकिन सख्त पोस्ट में लिखा, "तत्काल प्रभाव से रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा संघर्षविराम लागू होता है। दोनों पक्ष इस पर सहमत हो गए हैं। इसे बिल्कुल न तोड़ें! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद"। ट्रंप के इस अप्रत्याशित ऐलान ने वाशिंगटन से लेकर कीव और मॉस्को तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों और वैश्विक कूटनीति के गलियारों में खलबली मचा दी है।
ऊर्जा ढांचे पर लगातार हमले और इस सीजफायर का सामरिक महत्व
रूस और यूक्रेन के युद्ध में पिछले कई महीनों से दोनों देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) सबसे बड़े निशाने पर रहे हैं। एक ओर जहां रूसी सेना लगातार मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों के जरिए यूक्रेन के पावर ग्रिड्स, थर्मल पावर प्लांट्स और सब-स्टेशनों को तबाह कर रही थी, जिससे भीषण सर्दियों के आगमन से पहले पूरे यूक्रेन में बिजली और हीटिंग का गंभीर संकट खड़ा हो गया था। वहीं दूसरी ओर, यूक्रेन ने भी पश्चिमी हथियारों और लंबी दूरी के स्वदेशी ड्रोनों की मदद से रूस के भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों, डिपो और ऊर्जा केंद्रों पर ताबड़तोड़ हमले कर रूसी तेल आपूर्ति श्रृंखला को भारी चोट पहुंचाई थी। यदि यह सीजफायर जमीनी स्तर पर टिकता है, तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि दोनों देश एक-दूसरे के बिजली संयंत्रों, तेल शोधक कारखानों और गैस पाइपलाइनों पर बमबारी बंद कर देंगे, जिससे आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मिलने में कुछ राहत मिल सकती है।
जेलेंस्की का हैरान करने वाला बयान: 'मेरे लिए यह नई खबर, पर हम तैयार'
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे के तुरंत बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की ओर से आई प्रतिक्रिया ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस सीजफायर की पूर्व में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं थी और यह उनके लिए 'एक नई खबर' जैसी है। हालांकि, जेलेंस्की ने यह भी जोड़ा कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यक्तिगत तौर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस पर सहमति बना ली है, तो यूक्रेन भी इसके लिए पूरी तरह तैयार है। जेलेंस्की ने कहा, "अगर राष्ट्रपति ट्रंप ने पुतिन के साथ इस पर बातचीत कर ली है, तो कृपया हमें बताएं कि यह संघर्षविराम कब से शुरू हो रहा है; हम तैयार हैं और हम इसे स्वीकार करेंगे, बशर्ते रूस भी इसका पूरी तरह पालन करे"। इसके साथ ही यूक्रेनी अधिकारियों ने चिंता जताई कि ट्रंप के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद यूक्रेन के खार्किव में एक बिजली संयंत्र पर हमला होने की खबरें भी सामने आईं, जिससे समझौते के तुरंत लागू होने पर संशय बना हुआ है।
रूसी डीजल सौदे से उपजा विवाद और ट्रंप-जेलेंस्की के बीच तीखा टकराव
ट्रंप का यह ऐलान ऐसे नाजुक समय में आया है जब हाल के दिनों में अमेरिका और यूक्रेन के रिश्तों में भारी खटास देखने को मिली है। दरअसल, अमेरिका ने घरेलू स्तर पर ईंधन की आसमान छूती कीमतों को थामने के लिए रूस के साथ डीजल आपूर्ति समझौते को अंतिम रूप दिया था। इस फैसले पर जेलेंस्की ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे एक 'कमजोर और अनुचित' कदम बताया था। जेलेंस्की का तर्क था कि रूस से डीजल खरीदकर वाशिंगटन पुतिन को अरबों डॉलर का अतिरिक्त युद्ध फंड मुहैया करा रहा है, जिससे वे यूक्रेन पर और ज्यादा ताकत से हमला करेंगे। इस आलोचना से नाराज ट्रंप ने जेलेंस्की पर पलटवार करते हुए कहा था कि यूक्रेन को रूसी रिफाइनरियों पर हमले तुरंत बंद करने चाहिए। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यहां तक कह दिया था कि यूक्रेन को युद्ध खत्म करने और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अब एक 'नए राष्ट्रपति' की जरूरत है, जिसने दोनों नेताओं के बीच तल्खी को चरम पर पहुंचा दिया था।
मॉस्को का सधा हुआ रुख और शांति की राह में खड़ी बड़ी चुनौतियां
दूसरी तरफ, क्रेमलिन यानी रूस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद नपा-तुला रुख देखने को मिल रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विदेशी नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने पिछले दिनों ट्रंप और पुतिन के बीच फोन पर हुई बातचीत की पुष्टि तो की, लेकिन रूस ने औपचारिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया है कि युद्ध विराम की शर्तें पूरी तरह तय हो चुकी हैं। जानकारों का कहना है कि पुतिन यह अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका में होने वाले आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक तेल कीमतों के दबाव के चलते वाशिंगटन युद्ध को जल्द से जल्द खत्म कराने की जल्दी में है। ऐसे में रूस किसी भी समझौते पर तब तक पूरी तरह हामी नहीं भरेगा जब तक कि उसकी क्षेत्रीय और सामरिक मांगें पूरी नहीं होतीं। यूक्रेन का कहना है कि सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित सीजफायर युद्ध का स्थायी हल नहीं है, बल्कि इसके लिए कम से कम 60 दिनों का संपूर्ण सीजफायर होना चाहिए ताकि देश में पारदर्शी चुनाव और व्यापक कूटनीतिक बातचीत संभव हो सके।
क्या खत्म होगा चार साल पुराना युद्ध या यह केवल चुनावी दांव?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह 'एनर्जी सीजफायर' का दावा एक बड़ा कूटनीतिक प्रयोग है, जिसका मकसद वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित रखना और खुद को एक सफल वैश्विक शांतिदूत के तौर पर स्थापित करना है। यदि दोनों पक्ष इस सहमति का सम्मान करते हैं, तो यह पिछले चार वर्षों में पहली बार होगा जब दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर कोई औपचारिक रोक लगेगी। हालांकि, बिना किसी तीसरे पक्ष की निगरानी और स्पष्ट जमीन नियमों के बिना यह संघर्षविराम कितने दिनों तक टिक पाएगा, इस पर अभी भी बड़ा सवालिया निशान बना हुआ है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि क्या पुतिन और जेलेंस्की वाकई ट्रंप के इस आदेश का पालन करते हुए अपनी मिसाइलों का रुख मोड़ते हैं या फिर यह घोषणा केवल सोशल मीडिया की सुर्खियां बनकर रह जाएगी।