आतंकवाद पर पाकिस्तान की पोल खोलते हुए दुनिया को सुनाई दो टूक खरी-खखरी बातें

आतंकवाद पर पाकिस्तान की पोल खोलते हुए दुनिया को सुनाई दो टूक खरी-खखरी बातें

वैश्विक राजनीति के सबसे बड़े मंच न्यूयॉर्क से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक बार फिर अपनी बेबाक कूटनीति से पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के माहौल के बीच उन्होंने पश्चिमी देशों और अमेरिका के उस दोहरे रवैये पर तीखा प्रहार किया है, जिसे लंबे समय से दुनिया नजरअंदाज करती आ रही थी। विदेश मंत्री ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि दुनिया भर में लोकतंत्र और मानवाधिकारों का दिखावा करने वाले अमेरिका और अन्य बड़ी ताकतों का मुखौटा अब पूरी तरह से उतर चुका है। आतंकवाद को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर आईना दिखाते हुए जयशंकर ने साफ कर दिया कि भारत अब सीमा पार से होने वाली हर नापाक हरकत का जवाब देने के लिए किसी के रहमदिल इशारे का इंतजार नहीं करेगा। इस आक्रामक और स्पष्टवादी अंदाज ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है।

अमेरिका और पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये पर तीखा कटाक्ष

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन और वार्ताओं के दौरान वैश्विक व्यवस्था की उन विसंगतियों को बेनकाब किया जो विकासशील देशों के साथ अन्याय करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिकता और नियमों का पाठ पढ़ाने वाले देश जब अपने भू-राजनीतिक हितों की बात आती है, तो उन्हीं सिद्धांतों को ताक पर रख देते हैं। अमेरिका और पश्चिमी ताकतों का यह पाखंड अब ग्लोबल साउथ और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के सामने छिपा नहीं है। जयशंकर के इस कड़े बयान ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब किसी भी बाहरी महाशक्ति के दबाव में अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता करने वाला नहीं है। जब वैश्विक सुरक्षा नियमों को अपने हिसाब से मोड़ने की कोशिश की जाती है, तो भारत जैसी बड़ी शक्ति का मुखर होकर सामने आना अंतरराष्ट्रीय संतुलन के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।

पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद पर न्यूयॉर्क से फूटा भारत का गुस्सा

दक्षिण एशिया में दशकों से नासूर बने आतंकवाद के मुद्दे पर विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को उसकी असली औकात बता दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेताया कि आतंकवाद कभी भी कूटनीति का साधन नहीं हो सकता और जो देश इसे अपनी नीति का हिस्सा मानते हैं, वे खुद अपने ही बुने हुए जाल में फंस रहे हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र की धरती से एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि 'रक्त और आतंकवाद' के साये में पड़ोसी मुल्क के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत की गुंजाइश अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठ और प्रोपेगैंडा की धज्जियां उड़ाते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया अब आतंकवाद के पीड़ितों और उसके सौदागरों के बीच का फर्क अच्छी तरह समझ चुकी है, और भारत अपनी सुरक्षा के खातिर हरसंभव कड़ा कदम उठाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

भू-राजनीतिक बदलाव और ग्लोबल साउथ की मजबूत होती आवाज

आज का भारत 1990 या उसके पहले का वह दौर पीछे छोड़ चुका है जो हर बात के लिए पश्चिमी देशों की तरफ देखता था। विदेश मंत्री के इन कड़े बयानों से यह साफ झलकता है कि भारत अब स्वतंत्र विदेश नीति के बलबूते पर दुनिया की दिशा तय कर रहा है। ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की अगुवाई करते हुए भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, व्यापारिक नियमों और सुरक्षा परिषदों में सुधार समय की सबसे बड़ी मांग है। जब तक दुनिया की महाशक्तियां अपनी दादागिरी छोड़कर समानता के सिद्धांत को नहीं अपनाएंगी, तब तक वैश्विक शांति और स्थिरता एक छलावा बनी रहेगी। जयशंकर का यह कड़क रुख इस बात का प्रतीक है कि भारत दुनिया की हर आंख में आंख मिलाकर बात करने का माद्दा रखता है।

भविष्य के कूटनीतिक समीकरण और भारत का दबदबा

न्यूयॉर्क के मंच से एस जयशंकर द्वारा दिए गए इन बयानों के दूरगामी परिणाम पूरी दुनिया की राजनीति पर पड़ने तय हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि वे भारत को केवल अपने रणनीतिक साझीदार के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते, बल्कि भारत के अपने स्वतंत्र हित और क्षेत्रीय प्राथमिकताएं सर्वोपरि हैं। पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह संदेश साफ है कि आतंकवाद के बलबूते भारत पर दबाव बनाने के दिन अब ल लद चुके हैं। एक मजबूत, आत्मनिर्भर और मुखर भारत के रूप में नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह स्थापित कर दिया है कि वह अपने फैसलों से न कभी डरी है और न कभी झुकेगी।