ईरान-पाक सीमा बंद: अमेरिका के इशारे पर असीम मुनीर का बड़ा खेल

ईरान-पाक सीमा बंद: अमेरिका के इशारे पर असीम मुनीर का बड़ा खेल

मध्य पूर्व में बढ़ते वैश्विक तनाव और अस्थिरता के बीच दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के मुहाने पर एक नया कूटनीतिक मोड़ आ गया है। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा ईरान से लगी अपनी सीमा व्यापार को अचानक रोक दिए जाने से क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद दोनों पड़ोसियों के रिश्तों में जमी बर्फ और सख्त हो गई है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के इस फैसले पर अब अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी राजनीतिक विशेषज्ञ और प्रोफेसर मुक़्तदर खान ने खुलासा किया है कि यह कदम किसी स्थानीय सुरक्षा चिंता का नतीजा नहीं, बल्कि वाशिंगटन के बढ़ते दबाव और सऊदी अरब के रणनीतिक गठजोड़ का सीधा असर है।

अमेरिका के दबाव में झुका पाकिस्तान: प्रोफेसर मुक़्तदर खान का बड़ा दावा

विदेश नीति और भू-राजनीतिक मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ प्रोफेसर मुक़्तदर खान ने पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों के साथ चर्चा में इस फैसले के पीछे की कड़वी सच्चाई उजागर की। पाकिस्तानी मीडिया भले ही इसे प्रशासनिक या स्थानीय सुरक्षा मुद्दा बताकर ढकने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन हकीकत में इस्लामाबाद ने यह कदम अमेरिकी प्रशासन की नाराजगी से बचने के लिए उठाया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर बढ़ाए गए कड़े प्रतिबंधों और तेहरान को अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा बनते हुए पाकिस्तान की सेना ने तुरंत यह सीमा बंद करने का फैसला ले लिया। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार ठप हो गया है, बल्कि बलूचिस्तान के ताफ्तान और गब्द-रीमडान बॉर्डर पर हजारों मालवाहक ट्रक फंस गए हैं।

असीम मुनीर की कूटनीतिक असफलता और मध्यस्थता की कोशिश में झटका

पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश की थी। खबरों के मुताबिक, वह अमेरिकी संदेश लेकर तेहरान भी गए थे, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने किसी भी दबाव में आने से साफ इनकार कर दिया और इस मध्यस्थता को खारिज कर दिया। इस कूटनीतिक असफलता के बाद पाकिस्तान ने तेहरान पर दबाव बनाने के उद्देश्य से सीमा बंद करने का कार्ड खेला। प्रोफेसर खान का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान का ही नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईरान अब कैस्पियन सागर और अन्य उत्तरी मार्गों से अपना व्यापार जारी रख रहा है, जबकि पाकिस्तान अपनी साख और जरूरी तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) सप्लाई संकट में डाल चुका है।

सोशल मीडिया पर ईरान-विरोधी प्रोपेगैंडा का सच

विश्लेषकों ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि बॉर्डर बंद होने के बाद डिजिटल दुनिया में एक अजीबोगरीब बदलाव देखा गया। पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल और बोट्स द्वारा अचानक ईरान-विरोधी अभियान तेज कर दिया गया है। प्रोफेसर खान के अनुसार, यह सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है ताकि आम जनता का ध्यान पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक विफलताओं से हटाया जा सके। पश्चिमी देशों और गल्फ सहयोगियों को खुश करने के लिए असीम मुनीर का प्रशासन ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखा रहा है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।