परमाणु समझौते पर नई सहमत: ईरान तीसरे देश को भेज सकता है यूरेनियम

परमाणु समझौते पर नई सहमत: ईरान तीसरे देश को भेज सकता है यूरेनियम

मध्य पूर्व में महीनों से जारी भारी सैन्य तनाव और संभावित युद्ध के बाद कूटनीतिक गलियारों से एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच महीनों तक चले कूटनीतिक गतिरोध के बाद अब युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने और शांति बहाल करने के लिए एक विस्तृत 8-सूत्रीय ड्राफ्ट ढांचा (Draft Framework) तैयार किया गया है। इस शांति सौदे की सबसे बड़ी शर्त यह सामने आई है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) के विशाल भंडार को किसी तीसरे तटस्थ देश को हस्तांतरित करने या फिर इसके संवर्धन स्तर को कम करने पर सहमत हो सकता है। कतर की मध्यस्थता और वाशिंगटन-तेहरान के बीच पर्दे के पीछे हुई इस वार्ता के बाद आए इस प्रस्ताव ने वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई उम्मीद जगाई है।

ईरान-अमेरिका शांति समझौते के नए ड्राफ्ट की 8 अहम शर्तें

1. तीसरे देश में यूरेनियम का हस्तांतरण: समझौते के तहत ईरान अपने उच्च समृद्ध यूरेनियम के भंडार को किसी आपसी सहमति वाले तीसरे देश (जैसे चीन या कतर) में स्थानांतरित करेगा या फिर परमाणु हथियार बनाने की सीमा से नीचे इसके संवर्धन स्तर को घटाएगा।

2. होर्मुज जलडमरूमध्य की 7 दिनों में बहाली: प्रारंभिक समझ बनने के महज 7 दिनों के भीतर ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से फिर से खोल देगा।

3. अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी में ढील: ईरान द्वारा परमाणु संवर्धन रोकने के बदले में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी हटाएगा और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में चरणबद्ध तरीके से ढील देगा।

4. दोहा में होगी सीधी आमने-सामने की वार्ता: दोनों देशों के बीच औपचारिक और सीधी कूटनीतिक वार्ताओं का अगला दौर इस्तांबुल के बजाय कतर की राजधानी दोहा में आयोजित किया जाएगा।

5. अंतरराष्ट्रीय सत्यापन तंत्र (Verification Mechanism): किसी भी शर्त को लागू करने से पहले एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निकाय दोनों पक्षों द्वारा उठाए गए कदमों का सत्यापन (Verify) करेगा ताकि कोई भी देश धोखा न दे सके।

6. चीन बनेगा गारंटीकर्ता देश: इस ऐतिहासिक शांति समझौते को सुचारू रूप से लागू कराने और अमेरिकी या ईरानी पक्ष द्वारा इसका उल्लंघन रोकने के लिए चीन को एक तटस्थ गारंटर (Guarantor) के रूप में शामिल किया जा सकता है।

7. विवाद निवारण तंत्र (Dispute Resolution): यदि भविष्य में समझौते के क्रियान्वयन में कोई बाधा या देरी आती है, तो सैन्य कार्रवाई के बजाय मध्यस्थ देशों के जरिए समाधान निकाला जाएगा।

8. संघर्ष विराम और कैदियों की अदला-बदली: दोनों देश सभी प्रकार की सैन्य गतिविधियों और एक-दूसरे के खिलाफ जारी हमलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएंगे।

कतर की मध्यस्थता और अमेरिकी प्रशासन का कड़ा रुख

इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के वरिष्ठ सलाहकारों की टीम ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। कतरी दूतों ने तेहरान का दौरा कर ईरानी अधिकारियों को अमेरिकी प्रशासन का पत्र भी सौंपा, जिसे ईरान ने सकारात्मक रूप से प्राप्त किया। दूसरी ओर, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि अमेरिका सैन्य दबाव बनाए रखते हुए कूटनीति के लिए भी तैयार है, लेकिन अमेरिका बिना किसी ठोस गारंटी के पीछे नहीं हटेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व की शांति पर पड़ेगा इसका बड़ा असर

यदि इस 8-सूत्रीय शांति समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो इससे न केवल मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बादल छंट जाएंगे, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह ड्राफ्ट 2015 के पुराने जेसीपीओए (JCPOA) समझौते की तुलना में एक अधिक व्यावहारिक और कड़ा ढांचा प्रदान करता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता की नींव रख सकता है।