फ्रिज न पंखा... पाकिस्तान में गर्मी से निपटने के लिए इस्तेमाल हो रहीं बर्फ की सिल्लियां, अगस्त में 50 डिग्री तापमान क्यों?

फ्रिज न पंखा... पाकिस्तान में गर्मी से निपटने के लिए इस्तेमाल हो रहीं बर्फ की सिल्लियां, अगस्त में 50 डिग्री तापमान क्यों?

पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) इन दिनों एक भीषण और अकल्पनीय प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। जहां एक तरफ पूरी दुनिया में अगस्त के महीने में मानसून की बारिश और सुहाने मौसम की उम्मीद की जाती है, वहीं पाकिस्तान के कई इलाकों में झुलसा देने वाली गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आलम यह है कि देश के बड़े हिस्से में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के खतरनाक स्तर को छू रहा है। बिजली की भारी कटौती, ग्रिड फेल होने और आधुनिक उपकरणों की नाकामी के चलते आम जनता कूलर, एसी और फ्रिज को भूलकर अब पारंपरिक तरीकों यानी बर्फ की सिल्लियों के सहारे अपनी जिंदगी बचाने को मजबूर हो गई है।

अगस्त के महीने में आखिर क्यों उबल रहा है पाकिस्तान?

मौसम विज्ञानियों और जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में अगस्त के इस दौर में रिकॉर्ड तोड़ 50 डिग्री तापमान पहुंचने के पीछे कई गंभीर भौगोलिक और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हैं।

  • हीट डोम (Heat Dome) का असर: देश के ऊपर वायुमंडलीय दबाव का एक ऐसा घेरा बन गया है जो गर्म हवाओं को बाहर जाने से रोक रहा है, जिससे चिलचिलाती धूप का प्रभाव कई गुना बढ़ गया है।

  • क्लाइमेट चेंज और अल नीनो का प्रभाव: वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Global Climate Change) के कारण दक्षिण एशियाई देशों में मौसम चक्र पूरी तरह से असंतुलित हो गया है, जिससे मानसूनी हवाएं समय पर बारिश लाने में विफल साबित हुई हैं।

  • शहरी ऊर्ध्व ताप द्वीप (Urban Heat Island): कराची, लाहौर और सुक्कुर जैसे बड़े शहरों में कंक्रीट के जंगल और हरियाली की भारी कमी के चलते तापमान का ग्राफ आसमान छू रहा है।

बिजली गायब, ऐसे में 'बर्फ की सिल्लियां' बनीं लोगों का एकमात्र सहारा

पाकिस्तान के सिंध, बलूचिस्तान और पंजाब प्रांत के कई जिलों में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि वहां लगातार कई-कई घंटे बिजली गुल रहती है। देश का पावर ग्रिड इस भीषण मांग को झेलने में असमर्थ साबित हो रहा है, जिसके कारण ट्रांसफॉर्मर फुंकने की घटनाएं आम हो गई हैं। घरों में न तो पंखे चल पा रहे हैं और न ही फ्रिज काम कर रहे हैं। ऐसे में गर्मी से राहत पाने के लिए गरीब और मध्यम वर्ग के लोग बर्फ की बड़ी-बड़ी सिल्लियों (Ice Slabs) को खरीदने के लिए मजबूर हैं। लोग कमरों में बर्फ की सिल्लियां रखकर उसके सामने बैठने या गीले कपड़ों के सहारे किसी तरह अपनी रातें गुजार रहे हैं।

स्वास्थ्य आपातकाल और आम जनजीवन पर भारी संकट

इस भयंकर गर्मी और लू (Heatwave) के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई है। डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और उल्टी-दस्त से पीड़ित लोगों को तुरंत भर्ती कराया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो रहा है। स्थानीय प्रशासन ने कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी कर लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी है। इसके बावजूद दिहाड़ी मजदूरों और रोज कमाने-खाने वाले तबके के लिए यह स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है, क्योंकि उन्हें अपने परिवार का पेट पालने के लिए इस चिलचिलाती धूप में भी बाहर काम करना पड़ रहा है।

आर्थिक बदहाली और ऊर्जा संकट की दोहरी मार

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति और ऊर्जा संकट ने इस प्राकृतिक आपदा को और अधिक गंभीर बना दिया है। देश के पास न तो इतनी बिजली बनाने की क्षमता है और न ही इस तरह के आपातकालीन तापमान से निपटने के लिए आधुनिक और मजबूत बुनियादी ढांचा (Infrastructure) मौजूद है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु वित्तपोषण और मदद की मांग के बावजूद जमीनी स्तर पर आम नागरिकों को जिस प्रकार की मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, वह दक्षिण एशिया में मंडरा रहे जलवायु संकट की एक डरावनी तस्वीर पेश करता है।