संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के भाषण की उड़ी धज्जियां

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के भाषण की उड़ी धज्जियां

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का वार्षिक सत्र हर साल दुनिया भर के नेताओं को अपने देशों की बात रखने का एक बड़ा मंच प्रदान करता है, लेकिन इस बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का भाषण अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की साख बढ़ाने के बजाय उनके अपने ही देश में एक बड़ा मज़ाक बनकर रह गया है। यूएन के मंच से हमेशा की तरह एक बार फिर कश्मीर का घिसा-पिटा राग अलापने और दुनिया भर के सामने अपनी आर्थिक बदहाली का रोना रोने वाले शहबाज शरीफ को लेकर सोशल मीडिया से लेकर पाकिस्तानी राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पाकिस्तान के आम नागरिकों, सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी दलों ने उनके इस भाषण को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की 'कठपुतली' और देश की अर्थव्यवस्था को रसातल में पहुंचाने वाला 'अंतरराष्ट्रीय भिखारी' तक करार दे दिया है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तानी हुक्मरान किस तरह अपनी घरेलू नाकामियों, जनता के भारी आक्रोश और महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए हर साल संयुक्त राष्ट्र के मंच का इस्तेमाल केवल एक सियासी ड्रामे के रूप में करते हैं, जिसकी पोल अब खुद उनके अपने देश के लोग ही खोलने लगे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के भव्य हॉल में जब शहबाज शरीफ ने दुनिया के तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्षों को संबोधित करना शुरू किया, तो शुरुआत से ही उनके भाषण की टोन और तेवर में वही पुराना और खोखलापन नजर आया जो दशकों से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए अपनाते आए हैं। अपने संबोधन के एक बड़े हिस्से में उन्होंने भारत के खिलाफ अनर्गल प्रलाप किया और कश्मीर मुद्दे को जबरन घसीटने की कोशिश की, ताकि देश के कट्टरपंथी तत्वों और सेना को खुश रखा जा सके। हालांकि, उनके इस भाषण का दूसरा पहलू और भी अधिक शर्मनाक था, जिसमें उन्होंने दुनिया भर के वित्तीय संस्थानों, अमीर देशों और अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से पाकिस्तान के लिए कर्ज, राहत पैकेजों और आर्थिक मदद की गुहार लगाई। पाकिस्तान जैसी परमाणु शक्ति संपन्न होने का दावा करने वाली व्यवस्था के प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार वैश्विक मंचों पर जाकर इस तरह कटोरा लेकर खड़े होने की तस्वीरों ने दुनिया भर के सामने पाकिस्तान की एक लाचार और दयनीय छवि पेश कर दी। जैसे ही उनका यह भाषण समाप्त हुआ और सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, वैसे ही पाकिस्तान की अवाम का गुस्सा फूट पड़ा और देश के भीतर ही उनके खिलाफ आलोचनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

सोशल मीडिया पर फूटा पाकिस्तानी अवाम का गुस्सा और 'कठपुतली' वाले तंज

पाकिस्तान के भीतर इस समय इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शहबाज शरीफ के इस यूएनजीए भाषण को लेकर मीम्स, तीखी टिप्पणियों और आलोचनाओं की बाढ़ आ गई है। ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर #PuppetPM और #InternationalBeggar जैसे ट्रेंड तेजी से वायरल होने लगे, जिनमें आम पाकिस्तानी नागरिकों ने अपने प्रधानमंत्री की खुलकर धज्जियां उड़ाईं। लोगों का यह साफ तौर पर कहना है कि देश की जनता पहले ही आसमान छूती महंगाई, भारी-भरकम बिजली के बिलों, बेरोजगारी और बुनियादी संकटों से जूझ रही है, और ऐसे समय में देश के प्रधानमंत्री का अमेरिका जाकर अपनी झूठी शान की रोटियां सेकना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर देश की इज्जत को नीलाम करना बेहद शर्मनाक है। पाकिस्तानी अवाम का यह मानना है कि शहबाज शरीफ अपनी मर्जी से कोई भी कड़े फैसले लेने में पूरी तरह असमर्थ हैं और वे केवल और केवल पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के हाथों की एक ऐसी कठपुतली बनकर रह गए हैं, जो सेना के हर इशारे पर नाचती है। जनता का यह भी कहना है कि जब तक देश में चुनी हुई सरकारों के बजाय सेना का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण रहेगा, तब तक दुनिया के किसी भी मंच पर पाकिस्तान को कभी सम्मान नहीं मिल सकता और देश हमेशा आर्थिक बर्बादी के कगार पर ही खड़ा रहेगा।

विपक्षी दलों का हमला और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी

शहबाज शरीफ के इस ड्रामेबाज और दिशाहीन भाषण पर केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने भी कड़ा प्रहार किया है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और अन्य राजनीतिक विरोधियों ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यूएनजीए का मंच किसी भी देश के नेता के लिए एक गंभीर कूटनीतिक अवसर होता है, लेकिन वर्तमान नेतृत्व ने अपनी अदूरदर्शिता और चापलूसी की नीतियों के कारण इस मंच को भी एक तमाशा बना दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि दुनिया अब पाकिस्तान की इन नौटंकियों को अच्छी तरह समझ चुकी है और कोई भी देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन अब पाकिस्तान के झूठे आश्वासनों और मदद की गुहारों पर ध्यान देने को तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जानकारों का भी यही मानना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पालना-पोसना बंद नहीं करता और अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को सुधारने के बजाय कश्मीर राग अलापने में अपनी ऊर्जा बर्बाद करता रहेगा, तब तक वैश्विक समुदाय में उसकी स्थिति एक 'फेल स्टेट' और 'अंतरराष्ट्रीय भिखारी' से ज्यादा कुछ नहीं होगी। इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शहबाज शरीफ सरकार अपनी जनता का विश्वास पूरी तरह खो चुकी है और दुनिया के सामने भी उसकी कूटनीतिक साख रसातल में जा चुकी है।