जिबूती के पास लाल सागर में पलटी प्रवासियों से भरी दो नावें, 139 लोगों की दर्दनाक मौत; चीखों के बीच डूबे मासूम बच्चे
हॉर्न ऑफ अफ्रीका से खाड़ी देशों की ओर बेहतर जिंदगी और रोजगार की तलाश में निकला प्रवासियों का एक बड़ा जत्था गहरे समुद्र में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया। अफ्रीकी देश जिबूती के तटवर्ती इलाके खोबोर (Khor Ambado) के पास लाल सागर में प्रवासियों से भरी दो बड़ी नावें अनियंत्रित होकर गहरे पानी में पलट गईं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवासन संगठन (International Organization for Migration - IOM) और स्थानीय तटरक्षक बलों के अनुसार, इस दिल दहला देने वाले हादसे में अब तक 139 प्रवासियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अभी भी लापता हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और बचाव दल के मुताबिक, नावों में क्षमता से तीन गुना अधिक लोग सवार थे। गहरे पानी में ऊंची लहरों और तेज हवाओं का थपेड़ा जैसे ही लकड़ी की इन कमजोर नावों से टकराया, वे बीच समुद्र में ही औंधे मुंह पलट गईं। रात के सन्नाटे और खारे पानी के बीच मदद की कोई गुहार काम न आई और सैकड़ों जिंदगी देखते ही देखते लहरों में समा गईं।
मासूम बच्चों और महिलाओं की चीखें, खिलौनों की तरह बिखर गए शव
इस दर्दनाक समुद्री त्रासदी का सबसे हृदयविदारक पहलू यह रहा कि जान गंवाने वालों में बड़ी संख्या में नवजात, मासूम बच्चे और महिलाएं शामिल थीं। गरीबी, युद्ध और भुखमरी से बचने के लिए परिवार के परिवार इन असुरक्षित नावों पर सवार होकर निकल पड़े थे। जब नावें डूबीं, तो तैराकी न जानने और लाइफ जैकेट की कमी के चलते सबसे पहले बच्चे और महिलाएं ही गहरे भंवर में समा गए। हादसे के बाद जब जिबूती कोस्ट गार्ड और स्थानीय गोताखोरों की टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया, तो तट के किनारे मासूम बच्चों के शव तैरते हुए मिले। पानी में तैरते छोटे-छोटे जूते, फटे हुए बैग और राशन की पोटलियां उस असहनीय दर्द की गवाही दे रही थीं जो इन बेबस इंसानों ने डूबते वक्त झेला होगा। बचाव दल के एक सदस्य ने रुंधे गले से बताया कि समुद्र की तलहटी से शवों को बाहर निकालना उनके जीवन का सबसे खौफनाक अनुभव रहा, जहां माता-पिता अपने बच्चों को सीने से चिपकाए हुए ही मौत की आगोश में समा गए थे।
'ईस्टर्न रूट': दुनिया का सबसे जानलेवा और अनसुना समुद्री प्रवासी गलियारा
जिबूती से यमन होकर सऊदी अरब जाने वाला यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'ईस्टर्न माइग्रेशन रूट' (पूर्वी प्रवासन मार्ग) के नाम से जाना जाता है। हर साल इथियोपिया, सोमालिया और एरिट्रिया जैसे पूर्वी अफ्रीकी देशों से लाखों गरीब नागरिक अपने मुल्कों में चल रहे गृहयुद्ध, भीषण सूखे और बेरोजगारी से तंग आकर खाड़ी देशों में मजदूरी करने के सपने के साथ इस रास्ते पर कदम बढ़ाते हैं। तस्कर इन प्रवासियों से मोटी रकम वसूलते हैं और उन्हें जानवरों की तरह छोटी-छोटी नौकाओं में ठूंस देते हैं। यमन पहुंचने के लिए लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को पार करना पड़ता है, जो दुनिया के सबसे जोखिम भरे समुद्री रास्तों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि भूमध्य सागर की तुलना में इस रास्ते पर होने वाली मौतों की चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहुत कम होती है, जिसके चलते मानव तस्कर बेखौफ होकर खुलेआम मौत का यह कारोबार चला रहे हैं।
मानव तस्करों का क्रूर जाल और समुद्र के बीच बेरहमी की खौफनाक दास्तान
जीवित बचे मुट्ठी भर भाग्यशाली प्रवासियों ने तस्करों की हैवानियत की जो दास्तान बयां की है, वह रूह कंपा देने वाली है। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब नाव में पानी भरने लगा और इंजन बंद हो गया, तो तस्करों ने नाव का वजन कम करने के लिए कई प्रवासियों को जबरन गहरे समंदर में धक्का दे दिया। मानव तस्कर अक्सर तटरक्षक जहाजों को दूर से देखते ही प्रवासियों को पानी में कूदने पर मजबूर कर देते हैं ताकि वे खुद गिरफ्तारी से बच सकें। जीवित बचे लोगों को जिबूती के माइग्रेंट रिस्पॉन्स सेंटर में पहुंचाया गया है, जहां उनकी शारीरिक चोटों और मानसिक आघात का इलाज किया जा रहा है। कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने पूरे परिवार, भाई-बहनों और बच्चों को डूबते देखा है और वे सदमे के चलते बात करने की स्थिति में भी नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चेतावनी और स्थायी समाधान की सख्त दरकार
इस भीषण हादसे के बाद संयुक्त राष्ट्र एजेंसी IOM ने वैश्विक समुदाय और अफ्रीकी सरकारों से तत्काल कड़े कदम उठाने की अपील की है। संगठन ने जोर देकर कहा कि जब तक पूर्वी अफ्रीकी देशों में गरीबी, राजनीतिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रहे भुखमरी के संकट को हल नहीं किया जाएगा, तब तक लोग इस तरह मौत के मुंह में कूदने को मजबूर होते रहेंगे। इसके साथ ही जिबूती और यमन की समुद्री सीमाओं पर मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है। लाल सागर का यह किनारा एक बार फिर निर्दोष इंसानों की कब्रगाह बन गया है, जो दुनिया के सबसे ताकतवर देशों से सवाल पूछ रहा है कि क्या केवल एक वक्त की रोटी और सुरक्षित जीवन की तलाश करने वालों की कीमत यही रह गई है।