चौथे कार्यकाल की दावेदारी से पहले शी जिनपिंग का बड़ा एक्शन

चौथे कार्यकाल की दावेदारी से पहले शी जिनपिंग का बड़ा एक्शन

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) और वहां की सत्तारूढ़ संरचना में एक बार फिर से भारी राजनीतिक भूचाल आ गया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सत्ता पर पकड़ और मजबूत करने तथा चौथे कार्यकाल की दावेदारी की राह निष्कंटक बनाने के लिए अपनी ही पार्टी और सेना (PLA) पर बड़ा प्रशासनिक 'चाबुक' चलाया है। बीजिंग में आयोजित सेंट्रल कमेटी के प्लैनम बैठक के दौरान एक साथ 33 उच्च पदस्थ अधिकारियों और वरिष्ठ सैन्य जनरलों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इसे आधुनिक चीनी इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक और सैन्य सफाई (Purge) में से एक माना जा रहा है। जिन अधिकारियों को निष्कासित किया गया है, उनमें शीर्ष सैन्य आयोग से जुड़े कई दिग्गज जनरल और केंद्रीय समिति के सदस्य शामिल हैं। इस अप्रत्याशित फैसले ने न केवल बीजिंग के कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर चीनी नेतृत्व के आंतरिक समीकरणों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

2027 के नेशनल कांग्रेस से पहले सत्ता का केंद्रीकरण और सैन्य पर सख्ती

कम्युनिस्ट पार्टी का अगला 21वां नेशनल कांग्रेस 2027 में आयोजित होना प्रस्तावित है, जहां शी जिनपिंग औपचारिक रूप से अपने लगातार चौथे पांच साल के कार्यकाल की घोषणा कर सकते हैं। लेकिन उससे ठीक पहले पार्टी के आंतरिक शासन को 'शुद्ध' करने और किसी भी संभावित विद्रोह या असंतोष को दबाने के लिए यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। हालिया प्लैनम में जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, निष्कासित नेताओं पर "राजनीतिक अनुशासन के गंभीर उल्लंघन", भ्रष्टाचार, और पार्टी के प्रति निष्ठाहीनता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विशेष रूप से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर जारी भ्रष्टाचार और गुटबाजी को जड़ से खत्म करने के नाम पर यह कार्रवाई की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि सैन्य नेतृत्व को पूरी तरह से रीस्ट्रक्चर करके जिनपिंग यह संदेश देना चाहते हैं कि चीनी सशस्त्र बलों की कमान पर केवल और केवल उनका एकाधिकार है।

'चाबुक' के पीछे की रणनीति: 6 लाख से अधिक अधिकारियों पर गिर चुकी है गाज

साल 2012 में सत्ता में आने के बाद से ही शी जिनपिंग ने 'एंटी-करप्शन' अभियान को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। आंकड़ों के अनुसार, केवल चालू वर्ष के पहले नौ महीनों में ही पार्टी अनुशासन तंत्र ने 6,80,000 से अधिक निचले व उच्च स्तरीय अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। पार्टी द्वारा जारी बयानों में कहा गया है कि शिथिल शासन और पार्टी के भीतर कमजोर होती पकड़ को दुरुस्त करने के लिए 'चाकू को अंदर तक घुमाने' (Turning the knife inwards) की जरूरत थी। जिनपिंग के तीसरे कार्यकाल के दौरान निष्कासित केंद्रीय समिति के सदस्यों की संख्या रिकॉर्ड 51 तक पहुंच चुकी है। बैठक में जिस तरह से केवल 162 पूर्ण सदस्य उपस्थित हुए और कुल उपस्थिति historic low दर्ज की गई, वह यह दर्शाता है कि बीजिंग के पावर कॉरिडोर में इस समय डर और अविश्वास का माहौल चरम पर है।

क्या चीन के सैन्य और राजनीतिक ढाँचे पर पड़ेगा इसका प्रतिकूल असर

जिन 33 नेताओं को बाहर किया गया है, उनमें सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के प्रमुख कमांडर और अंतर्राष्ट्रीय विभाग के पूर्व प्रमुख लियू जियानचाओ जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सैन्य आयोग में अब केवल शी जिनपिंग और उनके अति-वफादार सहयोगी जनरल झांग शेंगमिन ही प्रमुख भूमिका में बचे हैं। रक्षा और कूटनीति से जुड़े शीर्ष जनरलों और नीति-निर्माताओं के एक झटके में हटने से पीएलए की ऑपरेशनल तैयारियों पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में उच्च स्तरीय पद खाली होने से पार्टी के भीतर नए योग्य उम्मीदवारों की भी कमी महसूस होने लगी है। इसके बावजूद जिनपिंग का ध्यान आर्थिक मोर्चों या सुधारों के बजाय केवल राजनीतिक वफादारी और कड़े अनुशासन पर केंद्रित दिखाई दे रहा है।

वैश्विक पटल पर चीनी आक्रामकता और भावी राजनीति की दिशा

शी जिनपिंग द्वारा अपने प्रतिद्वंद्वियों और संदिग्ध अधिकारियों का सफाया करने के इस फैसले का असर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और वैश्विक कूटनीति पर पड़ना तय है। जब सत्ता पूरी तरह से एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित हो जाती है, तो फैसले लेना भले ही त्वरित हो जाता है, लेकिन नीतिगत गलतियों का जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है। अमेरिका, भारत और पड़ोसी देशों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सेना में जारी इस अभूतपूर्व तख्तापलट के बाद चीन अपनी विदेश नीति में कितना आक्रामक या सतर्क रुख अपनाता है। 2027 की नेशनल कांग्रेस की तरफ बढ़ते चीन में अब जिनपिंग को चुनौती देने वाला कोई प्रभावी गुट नहीं बचा है। यह पूरी घटना यह साबित करती है कि अपने चौथे कार्यकाल की राह में आने वाले हर छोटे-बड़े रोड़े को साफ करने के लिए शी जिनपिंग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।