देश में 12.38 करोड़ एक्टिव क्रेडिट कार्ड्स का बना नया रिकॉर्ड
भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में डिजिटल पेमेंट तथा क्रेडिट कार्ड्स की पैठ लगातार नए रिकॉर्ड कायम कर रही है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) द्वारा जारी किए गए ताज़ा वित्तीय आंकड़ों के अनुसार देश में एक्टिव क्रेडिट कार्ड्स (Active Credit Cards) की कुल संख्या बढ़कर 12.38 करोड़ के पार पहुंच गई है। देश में क्रेडिट कार्ड संस्कृति का यह अभूतपूर्व विस्तार इस बात का साफ प्रमाण है कि मेट्रो शहरों से लेकर टायर-2 और टायर-3 शहरों तक आम जनता के बीच क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल अब रोज़मर्रा की ज़रूरतों और लाइफस्टाइल खर्चों के लिए एक आम माध्यम बन चुका है। बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की आक्रामक मार्केटिंग, लुभावने कैशबैक ऑफर्स, नो-कॉस्ट ईएमआई (No-Cost EMI) और रिवॉर्ड पॉइंट्स की बदौलत देश में क्रेडिट कार्ड यूजर्स की संख्या हर महीने लाखों की रफ्तार से बढ़ रही है।
कार्ड्स की संख्या तो बढ़ी, लेकिन क्या खर्च करने की रफ्तार में आ रही है सुस्ती?
हालांकि क्रेडिट कार्ड्स की बढ़ती संख्या के इस रिकॉर्ड आंकड़े के पीछे सितंबर महीने के जो खर्च संबंधी आंकड़े (Credit Card Spends Data) सामने आए हैं, उन्होंने बैंकिंग विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों को थोड़ा चौंका दिया है। आंकड़ों के मुताबिक जहां एक तरफ नए क्रेडिट कार्ड्स की कुल संख्या में लगातार इज़ाफा देखा जा रहा है, वहीं प्रति कार्ड होने वाले औसत खर्च (Average Spend per Card) और कुल मंथली ट्रांजैक्शन वैल्यू में मामूली गिरावट या सुस्ती दर्ज की गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता अब क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय पहले से अधिक सतर्क और अनुशासित नजर आ रहे हैं। अनियंत्रित ऑनलाइन शॉपिंग और भारी-भरकम ईएमआई के चलते बढ़ते कर्ज के बोझ से बचने के लिए आम ग्राहक अब बिना सोचे-समझे बेवजह खर्च करने से परहेज कर रहे हैं, जिससे क्रेडिट कार्ड्स के कुल ट्रांजैक्शन की ग्रोथ दर कुछ हद तक धीमी पड़ी है।
आरबीआई के सख्त नियम और अनसिक्योर्ड लोन को लेकर बैंकों की बढ़ती सतर्कता
क्रेडिट कार्ड स्पेंड्स की रफ्तार में आई इस नरमी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लिए गए हालिया नीतिगत फैसलों का भी बहुत बड़ा हाथ माना जा रहा है। आरबीआई ने अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन (Unsecured Personal Loans) और क्रेडिट कार्ड लोन में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए रिस्क वेटेज (Risk Weightage) की सीमा बढ़ा दी थी। केंद्रीय बैंक की इस सख्त हिदायत के बाद से देश के प्रमुख निजी और सरकारी बैंकों (जैसे एचडीएफसी बैंक, एसबीआई कार्ड, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक) ने नए क्रेडिट कार्ड जारी करने और क्रेडिट लिमिट (Credit Limit) बढ़ाने के नियमों में खासी सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इसके अलावा बैंक अब ग्राहकों की रीपेमेंट हिस्ट्री और क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) का भी बारीकी से मूल्यांकन कर रहे हैं ताकि डिफॉल्ट या एनपीए (NPA) के बढ़ते जोखिम को समय रहते रोका जा सके।
त्योहारी सीजन, ई-कॉमर्स सेल और डिजिटल क्रेडिट का भविष्य: आगे क्या होगा रुझान?
भले ही सितंबर महीने के आंकड़ों ने खर्च में थोड़ी सुस्ती के संकेत दिए हों, लेकिन वित्तीय बाज़ार के जानकारों का अनुमान है कि आगामी फेस्टिव सीज़न, दिवाली ऑफर्स और बड़ी ई-कॉमर्स सेल्स के दौरान क्रेडिट कार्ड से होने वाले कुल खर्च में एक बार फिर से ज़बरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के साथ क्रेडिट कार्ड को लिंक करने की सुविधा मिलने के बाद से भी छोटे किराना मर्चेंट्स और लोकल रिटेल स्टोर्स पर क्रेडिट कार्ड्स का इस्तेमाल काफी सुगम हो गया है। विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि भारतीय ग्राहक अब क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे लोन लेने के बजाय एक स्मार्ट पेमेंट टूल और कैश-फ्लो मैनेजमेंट के रूप में कर रहे हैं। आने वाले समय में 12.38 करोड़ का यह विशाल क्रेडिट कार्ड बेस भारतीय रिटेल और डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख स्तंभ बना रहेगा।