बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने अपनी फिल्म 'पेद्दी' के कंटेंट पर तोड़ी चुप्पी
फिल्म इंडस्ट्री में अपने बेहतरीन अभिनय और संजीदा किरदारों के लिए पहचाने जाने वाली अभिनेत्री जान्हवी कपूर ने अपनी चर्चित फिल्म 'पेद्दी' (Peddi) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और साहसिक बयान दिया है। फिल्म के प्रदर्शन और उसमें महिलाओं के चित्रण को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जान्हवी कपूर ने बिना किसी झिझक के यह स्वीकार किया है कि इस फिल्म में महिलाओं को पूरी तरह से एक 'ऑब्जेक्ट' यानी वस्तु की तरह पेश किया गया था, जो कि पूरी तरह से गलत और महिला विरोधी था। एक हालिया साक्षात्कार के दौरान अपनी बात रखते हुए जान्हवी कपूर ने भावुक अंदाज में कहा कि इस तरह के किरदार या फिल्म का हिस्सा बनने के फैसले पर वह बेहद दुखी हैं और जिंदगी भर खुद को इस बात के लिए शर्मसार महसूस करेंगी। जान्हवी के इस ईमानदार और सीधे स्वीकारोक्ति ने पूरे बॉलीवुड और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है, जहां अभिनेत्रियों द्वारा फिल्मों में निभाए जाने वाले स्टीरियोटाइपिकल किरदारों पर सवाल उठ रहे हैं।
'औरतों को 100% ऑब्जेक्टिफाई किया गया', जान्हवी कपूर ने बयां किया अपना पछतावा
जान्हवी कपूर ने इंटरव्यू के दौरान फिल्म मेकिंग के उस दौर को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को साइन किया था, तब कहानी का खाका अलग लग रहा था, लेकिन स्क्रीन पर जिस तरह से सीन ढाले गए, उसने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिल्म 'पेद्दी' में महिला पात्रों की स्वतंत्रता, गरिमा और उनके अस्तित्व को दरकिनार करते हुए उन्हें केवल पुरुषों के दृष्टिकोण से एक वस्तु के रूप में दिखाया गया था। जान्हवी ने कहा, "एक अभिनेत्री और एक महिला होने के नाते जब मैं आज पीछे मुड़कर उस फिल्म को देखती हूं, तो मुझे बेहद आत्मग्लानि होती है। औरतों का यह 100 प्रतिशत वस्तुकरण (Objectification) समाज को एक गलत संदेश देता है, और मुझे इसका हिस्सा होने पर गहरा अफसोस है।" उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने करियर में आगे केवल ऐसे किरदारों का चुनाव करना चाहती हैं जो महिलाओं को सशक्त और सम्मानजनक रूप में प्रस्तुत करते हों।
सिनेमा में महिला उत्पीड़न और ऑब्जेक्टिफिकेशन पर इंडस्ट्री में शुरू हुई नई बहस
जान्हवी कपूर के इस बयान के बाद फिल्म समीक्षकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम दर्शकों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कई लोग जान्हवी कपूर की इस ईमानदारी और अपनी गलती को स्वीकार करने की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि बॉलीवुड और क्षेत्रीय सिनेमा में कमर्शियल सक्सेस और बॉक्स ऑफिस हिट के नाम पर आखिर कब तक महिला पात्रों को केवल ग्लैमर या वस्तु के तौर पर दिखाया जाता रहेगा। जान्हवी का यह कदम बॉलीवुड की उन चंद अभिनेत्रियों की लिस्ट में उन्हें खड़ा करता है, जो फिल्म के रिलीज होने के बाद भी अपने काम का निष्पक्ष और कड़ा आत्मविश्लेषण करने से पीछे नहीं हटतीं। इस घटनाक्रम ने फिल्म निर्देशकों और पटकथा लेखकों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि दर्शक अब सिनेमा में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान देखना चाहते हैं।
भविष्य के प्रोजेक्ट्स और किरदारों को लेकर जान्हवी कपूर ने लिया बड़ा फैसला
फिल्म 'पेद्दी' के अनुभव से सबक लेते हुए जान्हवी कपूर ने अपनी आने वाली फिल्मों और स्क्रिप्ट सिलेक्शन को लेकर बहुत सख्त मापदंड तय कर लिए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में वह किसी भी ऐसी फिल्म या सीन का हिस्सा नहीं बनेंगी जो महिलाओं की छवि को ठेस पहुंचाता हो या उनका गलत तरीके से चित्रण करता हो। जान्हवी के इस बयान से उनके प्रशंसकों के बीच उनके प्रति सम्मान और बढ़ गया है, क्योंकि किसी मुख्यधारा की अभिनेत्री द्वारा खुद की ही फिल्म की इतनी बेबाकी से आलोचना करना बहुत दुर्लभ माना जाता है। मनोरंजन जगत के जानकारों का मानना है कि जान्हवी कपूर की यह पहल अन्य युवा कलाकारों को भी स्क्रिप्ट चुनते समय अधिक सतर्क और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देगी।