बॉलीवुड दिग्गज नसीरुद्दीन शाह के बयान पर बरसे पुनीत इस्सर
बीआर चोपड़ा के आइकॉनिक धारावाहिक 'महाभारत' में दुर्योधन का ऐतिहासिक किरदार निभाने वाले मशहूर अभिनेता पुनीत इस्सर अपने बेबाक बयानों को लेकर एक बार फिर जबरदस्त सुर्खियों में हैं। बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा हाल ही में देश के राजनीतिक माहौल, छात्रों के प्रदर्शनों और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर दी गई टिप्पणियों पर पुनीत इस्सर का गुस्सा फूट पड़ा है। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू के दौरान पुनीत इस्सर ने नसीरुद्दीन शाह को अपना वरिष्ठ और गुरु तो स्वीकार किया, लेकिन उनके राजनीतिक विचारों और 'सिलेक्टिव आउटरेज' (चुनिंदा मुद्दों पर बोलना) पर कड़ा एतराज जताया। पुनीत इस्सर का कहना है कि जब देश या दुनिया के सामने दूसरे कई बड़े राष्ट्रीय मुद्दे खड़े होते हैं, तब ऐसे दिग्गज खामोशी साधे रहते हैं, लेकिन कुछ खास राजनीतिक घटनाक्रमों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने आ जाते हैं।
वामपंथी और नक्सल-समर्थक नजरिए पर सीधा हमला
इंटरव्यू के दौरान पुनीत इस्सर ने कहा कि कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ अभिनेता हर मसले को एक खास चश्मे से ही देखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कुछ चर्चित कलाकार और बुद्धिजीवी केवल एकतरफा, वामपंथी (Leftist) और नक्सल-समर्थक (Naxal-leaning) विचारधारा के तहत ही अपनी राय रखते हैं। कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) में छात्रों के प्रदर्शन और जेएनयू जैसे परिसरों से जुड़े मुद्दों पर नसीरुद्दीन शाह के समर्थन को लेकर पुनीत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो लोग आतंकवादी या आपराधिक मामलों में सजा काट चुके तत्वों या देशविरोधी नारों का समर्थन करने वाले समूहों के पक्ष में खड़े होते हैं, उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है। पुनीत का मानना है कि राष्ट्र हित के मुद्दों पर सभी कलाकारों का दृष्टिकोण एकसमान और जिम्मेदार होना चाहिए।
'लोकतंत्र में अगर सरकार नहीं पसंद तो चुनावी मैदान में उतरें'
पुनीत इस्सर ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला देते हुए नसीरुद्दीन शाह और उनके विचारों से सहमति रखने वालों को एक खुली चुनौती भी दे डाली। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी राय रखने और सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर आपको मौजूदा सरकार और उसकी नीतियों से इतनी ही ज्यादा परेशानी है, तो बाहर बैठकर केवल भाषण देने या बयानबाजी करने के बजाय सीधे चुनावी मैदान में उतरिए। चुनाव लड़िए, जनता का समर्थन हासिल कीजिए और इस सरकार को हराकर सत्ता से बाहर कर दीजिए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की मौजूदा सरकार को भारत की करोड़ों जनता ने अपने बहुमूल्य वोट देकर चुना है, इसलिए जनमत का सम्मान किया जाना चाहिए।
कला जगत में राजनीतिक ध्रुवीकरण पर तेज हुई तीखी बहस
पुनीत इस्सर के इस तीखे बयान के बाद सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में राजनीतिक एक्टिविज्म (Celebrity Activism) को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक वर्ग जहां पुनीत इस्सर के राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए विरोध दर्ज कराने के विचार का खुलकर समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा वर्ग नसीरुद्दीन शाह के विचार अभिव्यक्ति के अधिकार और स्वतंत्र आलोचना का बचाव कर रहा है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब बॉलीवुड के दो दिग्गज कलाकार एक-दूसरे के विपरीत राजनीतिक विचारों को लेकर आमने-सामने आए हों, लेकिन 'दुर्योधन' के इस कड़े रुख ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में जारी राजनीतिक विभाजन को एक बार फिर जगजाहिर कर दिया है।