शरीर की प्राकृतिक फिल्टर प्रणाली और किडनी का महत्व
हमारे शरीर के भीतर मौजूद किडनी (गुर्दे) भगवान द्वारा दी गई एक ऐसी अद्भुत और प्राकृतिक फिल्टर मशीन है, जो रोजाना हमारे खून को लगातार साफ करती है। खून में मौजूद टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थों), अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थों को छानकर मूत्र के रास्ते शरीर से बाहर निकालने की मुख्य जिम्मेदारी इन्हीं दो सेम के आकार वाले अंगों पर होती है। इसके अलावा, किडनी हमारे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाती है। लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियंत्रित खानपान, लगातार बढ़ते तनाव, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड बीपी) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां महामारी की तरह फैल रही हैं। शुरुआत में किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर कोई बड़ा संकेत नहीं देता, जिसके कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर अक्सर रुटीन चेकअप के दौरान किडनी की सही सेहत का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं, जिसमें क्रिएटिनिन टेस्ट सबसे प्रमुख पैमाना माना जाता है।
क्या होता है 'क्रिएटिनिन' और शरीर में इसका क्या काम है?
क्रिएटिनिन (Creatinine) एक प्रकार का वेस्ट प्रोडक्ट या रासायनिक अपशिष्ट पदार्थ है, जो हमारे शरीर की मांसपेशियों में होने वाले सामान्य चयापचय (Metabolism) और दैनिक गतिविधियों के दौरान बनता है। जब हमारी मांसपेशियां काम करती हैं, तो 'क्रेटीन' नामक यौगिक का उपयोग ऊर्जा के लिए होता है, जिसके उपरांत अवशेष के रूप में क्रिएटिनिन का निर्माण होता है। सामान्य स्थिति में, जब हमारी दोनों किडनियां स्वस्थ और पूरी क्षमता से काम कर रही होती हैं, तो वे रक्त को छानकर इस क्रिएटिनिन को मूत्र (यूरिन) के रास्ते शरीर से बाहर निकाल देती हैं। लेकिन यदि किसी कारणवश किडनी के फिल्टर करने वाले सूक्ष्म नेफ्रॉन्स (Nephrons) क्षतिग्रस्त हो जाते हैं या उनकी कार्यक्षमता में गिरावट आ जाती है, तो वे खून से क्रिएटिनिन को पूरी तरह से छानने में असमर्थ हो जाती हैं। नतीजतन, खून में क्रिएटिनिन का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है, जो सीधे तौर पर इस बात का संकेत होता है कि आपकी किडनी खतरे में है और वह ठीक से काम नहीं कर रही है।
रक्त में क्रिएटिनिन बढ़ने के सामान्य स्तर और खतरे की घंटी
हर व्यक्ति के शरीर में उम्र, लिंग और शारीरिक बनावट के आधार पर क्रिएटिनिन का सामान्य स्तर अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर स्वस्थ पुरुषों के शरीर में क्रिएटिनिन का सामान्य स्तर 0.6 से 1.2 मिलीग्राम प्रति डीएल (mg/dL) और महिलाओं में 0.5 से 1.1 मिलीग्राम प्रति डीएल के बीच माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की पैथोलॉजी रिपोर्ट में यह स्तर इससे ऊपर जाने लगता है, तो इसे मेडिकल भाषा में हाइपरक्रीटिनिनीमिया (Hypercreatininemia) कहा जाता है। यदि क्रिएटिनिन का स्तर लगातार बढ़ा हुआ मिलता है, तो यह क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) या किडनी फेलियर की शुरुआती चेतावनी हो सकती है। इसे समय रहते न पहचाना जाए, तो स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट जैसे कठिन दौर से गुजरना पड़ सकता है। खून में क्रिएटिनिन बढ़ने पर शरीर में कई तरह के सूक्ष्म बदलाव भी दिखने लगते हैं, जैसे पेशाब में झाग आना, बार-बार पेशाब आना (विशेषकर रात में), आंखों और चेहरे पर सूजन होना, तथा पैरों व टखनों में पानी भरना।
किडनी को स्वस्थ रखने और क्रिएटिनिन स्तर को नियंत्रित करने के आसान उपाय
यदि आपकी किसी जांच रिपोर्ट में क्रिएटिनिन का स्तर थोड़ा भी बढ़ा हुआ आया है, तो घबराने के बजाय तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर जीवनशैली में बड़े बदलाव करने की आवश्यकता है। सबसे पहले अपने शरीर में पानी की कमी न होने दें और रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी (कम से कम 8 से 10 गिलास) पिएं, ताकि किडनी को अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में आसानी हो। अपने भोजन में अत्यधिक नमक, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और पैकेटबंद चीजों का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, क्योंकि ये सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर और किडनी पर दबाव बढ़ाते हैं। इसके अलावा, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी पेनकिलर (दर्द निवारक दवाएं) या ओवर-द-काउंटर सप्लीमेंट्स खाने से बचें, क्योंकि ये दवाएं किडनी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। डायबिटीज और बीपी के मरीजों को अपनी शुगर और ब्लड प्रेशर को स्ट्रिक्ट कंट्रोल में रखना चाहिए। नियमित रूप से योग, प्राणायाम, हल्की वॉक और डॉक्टर द्वारा निर्देशित संतुलित आहार को अपनाकर आप अपनी किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित और स्वस्थ रख सकते हैं।