'उत्तराखंडी घुसपैठिया' बयान पर राज्यभर में गरमाई राजनीति
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की नजदीकियों के बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा कथित तौर पर दिए गए 'उत्तराखंडी घुसपैठिया' वाले बयान ने राज्य में एक बड़ा सियासी भूचाल ला दिया है। अखिलेश यादव के इस विवादित वक्तव्य के सामने आने के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत पूरा सत्तारूढ़ खेमा सपा अध्यक्ष के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में उनकी सहयोगी कांग्रेस पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। देवभूमि के स्वाभिमान और जनभावनाओं से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर अब आम जनता और सोशल मीडिया हस्तियों का गुस्सा भी सड़कों और इंटरनेट मीडिया पर खुलकर सामने आने लगा है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मुद्दा अब चुनाव पूर्व एक बड़ा सामाजिक-राजनीतिक जन-विवाद बनता दिख रहा है।
हल्द्वानी की इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी ने पहाड़ी अंदाज में कसा करारा तंज
अखिलेश यादव के इस विवादित बयान के खिलाफ अब हल्द्वानी की चर्चित और बेबाक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी का नाम भी जुड़ गया है। ज्योति अधिकारी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर कुमाऊंनी और हिंदी भाषा का अनूठा सम्मिश्रण करते हुए एक व्यंग्यात्मक वीडियो शेयर किया है, जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। ज्योति ने अखिलेश यादव के इस रुख पर चुटकी लेते हुए कहा कि लगता है "अखिलेश जी को थोड़ा 'छल' (पहाड़ी लोक-मान्यता के अनुसार नजर या ओपरी असर) लग गया है। वे एक-दो दिन में ठीक हो जाएंगे, लेकिन जब तक वे सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांग लेते, देवभूमि के लोग शांत बैठने वाले नहीं हैं।"
'हमर जवैं छी अखिलेश जी': 'दामाद' वाले रिश्ते से दिलवाई ससुराल की याद
वीडियो में ज्योति अधिकारी ने अत्यंत रोचक और पारंपरिक पहाड़ी मुहावरेदार लहजे में अखिलेश यादव को उत्तराखंड का 'जंवाई' (दामाद) करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख की पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव का मूल परिवार उत्तराखंड के पौड़ी (और बाद में देहरादून के जोगीवाला) से ताल्लुक रखता है, जिसके चलते अखिलेश देवभूमि के दामाद हैं। ज्योति ने कुमाऊंनी में तंज कसते हुए कहा, "यह जो अखिलेश जी छी, यू हमर जवैं छी। कै न्ह्योरो, हमर चेली मणी छ गड़बड़गो। अब जवैं क हम अब बुलौण, भली-भांति छ पुजिद्युल और शांत ह्वै जाला।" (अर्थात- अखिलेश जी हमारे दामाद हैं। लगता है हमारी बेटी की वजह से कुछ गड़बड़ हो गई है। अब दामाद जी को जब हम बुलाएंगे, तो उनकी अच्छी तरह खातिरदारी और पूजा करेंगे, फिर वे शांत हो जाएंगे)। इसके साथ ही उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि एक दामाद को अपने ससुराल वालों और उनके वीर-शहीदों के स्वाभिमान का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है।
देवभूमि के मान-सम्मान पर विपक्ष के मौन पर दागे तीखे सवाल
अपने संबोधन के दौरान केवल अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि ज्योति अधिकारी ने उत्तराखंड की स्थानीय विपक्षी पार्टियों और उनके नेताओं की चुप्पी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-तब छोटी-छोटी बातों पर सड़कों पर उतरने वाले और पुतले फूंकने वाले विपक्षी नेता तब पूरी तरह खामोश हो जाते हैं जब पहाड़ के गौरव, स्वाभिमान और वीर सैनिकों के मान-सम्मान पर हमला होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड वीरों, बलिदानियों और देव-संस्कृति की भूमि है। यहां की जनता अपने स्वाभिमान से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। जब तक सपा प्रमुख अपने 'घुसपैठिए' वाले बयान को वापस लेकर समस्त उत्तराखंडियों से बिना शर्त माफी नहीं मांग लेते, तब तक उनके खिलाफ यह जन-विरोध लगातार जारी रहेगा।