अजीत डोवाल पहुंचे बीजिंग, भारत-चीन सीमा विवाद पर क्या पिघलेगी रिश्तों पर जमी बर्फ?
भारत और चीन के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवाल दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बीजिंग पहुंच चुके हैं। चीनी विदेश मंत्री और अपने समकक्ष वांग यी के साथ वे भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) की 25वें दौर की उच्च स्तरीय बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चले आ रहे तनाव के बाद, इस अहम यात्रा को द्विपक्षीय रिश्तों की बर्फ पिघलाने और सामान्य स्थिति की बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
बीजिंग में उच्च स्तरीय बैठकों का दौर और कूटनीतिक हलचल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने बीजिंग पहुंचने के बाद चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग को मजबूत करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। यह मुलाकात इस लिहाज से भी बेहद खास है क्योंकि यह भारत और चीन के बीच सीमा मामलों को सुलझाने के मुख्य चैनल यानी स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स मेकैनिज्म के तहत आयोजित की जा रही है, जो दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है।
सीमा पर शांति और स्थिरता ही रिश्तों की सबसे बड़ी शर्त
भारत की ओर से यह रुख बेहद स्पष्ट रहा है कि जब तक सीमा पर पूरी तरह से शांति और बहाली नहीं होती, तब तक द्विपक्षीय संबंधों में सामान्यता आना मुमकिन नहीं है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल ही में इस बात पर जोर दिया था कि सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति ही दोनों देशों के आपसी रिश्तों का भविष्य तय करती है। डोवाल और चीनी नेतृत्व के बीच हो रही इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैंगोंग, गलवान या अन्य संवेदनशील इलाकों में उपजे तनाव को पीछे छोड़कर भविष्य में किसी भी सैन्य टकराव से बचा जा सके और सीमा पर अमन-चैन कायम रहे।
आगामी अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों और कूटनीतिक भविष्य पर नजर
यह उच्च ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगामी कूटनीतिक आयोजनों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि एनएसए अजीत डोवाल की यह बीजिंग यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर राजनीतिक संवाद को फिर से पटरी पर लाने का काम कर रही है। हालांकि, दशकों पुराने सीमा विवाद का रातों-रात समाधान निकलना आसान नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा लगातार बातचीत के दरवाजे खुले रखना इस बात का संकेत है कि भारत और चीन अपने मतभेदों को प्रबंधित करने और कूटनीतिक रास्तों से आगे बढ़ने के लिए गंभीर हैं।