मक्का में बांग्लादेशी जोड़े की फांसी के बाद राजनयिक और प्रशासनिक चूक उजागर
सऊदी अरब के मक्का शहर में दो बांग्लादेशी नागरिकों—नजरुल इस्लाम बशीर और स्वीटी अख्तर को दी गई फांसी के बाद बांग्लादेशी राजनयिक हलकों और विदेश मंत्रालय में भारी हड़कंप मच गया है। इस संवेदनशील मामले में सामने आई रिपोर्टों और गोपनीय राजनयिक मेमो ने जेद्दा स्थित बांग्लादेशी दूतावास और महावाणिज्य दूतावास (Jeddah Mission) की भारी लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। यह बात सामने आई है कि सऊदी अधिकारियों ने फांसी दिए जाने से ठीक 14 दिन पहले यानी 30 सितंबर को 97 बांग्लादेशी कैदियों की एक आधिकारिक सूची जेद्दा में बांग्लादेशी मिशन को सौंपी थी। इस सूची में इन दोनों कैदियों का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज था। इसके बावजूद जेद्दा मिशन के अधिकारियों ने न तो इस सूची की गंभीरता से समीक्षा की, न ही उनके न्यायिक स्थिति और कानूनी मदद का जायजा लिया। जेद्दा मिशन की इस घोर निष्क्रियता का नतीजा यह हुआ कि 14 अक्टूबर को मक्का में दोनों नागरिकों की मौत की सजा पर अमल कर दिया गया और ढाका में विदेश मंत्रालय को इसकी भनक मीडिया रिपोर्टों के बाद ही लगी।
14 दिनों तक सोता रहा जेद्दा मिशन और अधिकारियों की ढिलाई पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश की विदेश सेवा प्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 सितंबर को मिली कैदियों की लिस्ट में नजरुल इस्लाम पर साइबर अपराध और स्वीटी अख्तर पर अवैध संबंध (व्यभिचार) के आरोपों का उल्लेख था। हालांकि सऊदी अधिकारियों द्वारा भेजी गई लिस्ट में मृत्युदंड दिए जाने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था, फिर भी जेद्दा मिशन के दूतावास अधिकारियों ने यह मान लिया कि इन्हें साधारण जेल की सजा होगी। अधिकारियों ने न तो सऊदी अदालत के दस्तावेज मांगे, न ही विदेश मंत्रालय को किसी प्रकार का कोई अलर्ट भेजा और न ही कैदियों को कोई कानूनी प्रतिनिधि उपलब्ध कराया। ढाका में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, जेद्दा मिशन की इस सुस्ती और अनदेखी के कारण ही दो नागरिकों की जान बचाने या उनकी सजा को कम कराने के लिए कोई कूटनीतिक प्रयास शुरू नहीं किया जा सका। बांग्लादेश के मानवाधिकार समूहों और परिजनों ने इसे जेद्दा मिशन की बहुत बड़ी विफलता करार दिया है।
सऊदी अधिकारियों के दावे और ढाका का कूटनीतिक रुख
सऊदी गृह मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, दोनों बांग्लादेशी नागरिकों को एक पवित्र स्थान के भीतर अमर्यादित कृत्य करने के आरोप में तज़ीर (Discretionary Punishment) के तहत मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे शाही फरमान मिलने के बाद निष्पादित किया गया। हालांकि, फांसी दिए जाने की सूचना से पहले बांग्लादेशी दूतावास को औपचारिक रूप से सूचित न किए जाने पर ढाका ने नाराजगी जताई है। बांग्लादेश ने सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर इस बात की जानकारी मांगी है कि दोनों कैदियों की अदालती सुनवाई के दौरान राजनयिक सहायता क्यों नहीं दी गई और उन्हें फांसी देने से पहले सूचित क्यों नहीं किया गया। वहीं दूसरी तरफ, बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने जेद्दा मिशन से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 14 दिन पहले लिस्ट मिलने के बाद भी राजनयिक स्तर पर चूक कहां हुई।
प्रवासियों की सुरक्षा और राजनयिक जवाबदेही पर बढ़ा दबाव
मध्य पूर्व और खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों बांग्लादेशी प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर यह घटना एक बहुत बड़ा झटका मानी जा रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि वियना कन्वेंशन (Vienna Convention on Consular Relations) के तहत विदेशों में अपने नागरिकों को कांसुलर सहायता देना हर देश का कर्तव्य है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि विदेशी मिशनों में तैनात अधिकारी अपने देश के नागरिकों के मामले में कितनी घोर लापरवाही बरतते हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही के बाद बांग्लादेश सरकार पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का चौतरफा दबाव बढ़ गया है।