आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक में गूंजा आतंकवाद का मुद्दा

आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक में गूंजा आतंकवाद का मुद्दा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को पूरी मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा है। फिलीपींस में आयोजित हो रही महत्वपूर्ण आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM-Plus) के दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक सुरक्षा मंच से एक बहुत बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य प्रायोजित आतंकवाद (State-Sponsored Terrorism) मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और भारत जैसे देश अब इस तरह के छद्म युद्ध को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन के दौरान भारत के चर्चित और निर्णायक सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए यह साबित कर दिया कि नया भारत अपनी रक्षा और संप्रभुता के लिए किसी भी हद तक जाने में सक्षम है। उनका यह बयान वैश्विक कूटनीति में भारत के आक्रामक और स्पष्ट रक्षा रुख को दर्शाता है, जहां आतंकवाद को पनाह देने वाले देशों को अब सीधे तौर पर उनके अंजाम की चेतावनी दी जा रही है।

'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र कर भारत ने दुनिया को दिखाई अपनी सैन्य ताकत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में विशेष रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' का हवाला देते हुए भारत की बदलती सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का खुलकर प्रदर्शन किया। उन्होंने दुनिया के तमाम बड़े देशों और आसियान के प्रतिनिधियों को यह समझाया कि भारत अब चुपचाप बैठकर हमलों को सहने वाला देश नहीं है। आतंकवाद के गढ़ों और इसके षड्यंत्रकारियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह दिखा दिया कि भारत के पास सरहद पार बैठे आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर नेस्तनाबूद करने की अचूक क्षमता है। रक्षा मंत्री ने दो टूक अंदाज में कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन अगर कोई राष्ट्र या ताकत भारत को बेवजह उकसाने की कोशिश करती है, तो उसे बख्शा नहीं जाता। यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच भारत की मजबूत होती रक्षा स्थिति और कड़े रुख का एक स्पष्ट प्रमाण है।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियमों पर आधारित व्यवस्था और शांति की अपील

आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश देने के साथ-साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडो-पैसिफिक रीजन (Indo-Pacific Region) में शांति, स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से आसियान की केंद्रीयता और उसके साथ मजबूत रणनीतिक संबंधों को सर्वोपरि मानता है। एक खुले, समावेशी और नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय क्रम (Rules-Based International Order) की वकालत करते हुए उन्होंने क्षेत्रीय देशों से आपसी रक्षा सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने की प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने का आह्वान किया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में आर्थिक प्रगति और विकास के लिए यह बेहद जरूरी है कि सभी देश मिलकर सीमा पार से फैलने वाले आतंकवाद और असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ एकजुट हों। भारत का यह दृष्टिकोण क्षेत्र के छोटे और विकासशील देशों के लिए एक सुरक्षित माहौल तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और सामरिक धाक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस मुखर और स्पष्ट भाषण ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर यह साबित कर दिया है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र और बेबाक राय रखने से पीछे नहीं हटता। आसियान रक्षा मंत्रियों के मंच पर राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करना यह बताता है कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति अब पूरी तरह से आक्रामक और निवारक (Proactive and Deterrent) दृष्टिकोण पर आधारित है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की इस जीरो टॉलरेंस नीति को वैश्विक स्तर पर भी काफी सराहना मिल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से ड्रैगन यानी चीन और आतंकवाद को पोषित करने वाले अन्य पड़ोसी देशों को भी एक कड़ा कूटनीतिक संदेश मिला है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।