फिलीपींस में ADMM-Plus सम्मेलन के दौरान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय वार्ता में गूंजा मुद्दा
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा गलियारों में एक बार फिर भारत और अमेरिका के बीच सैन्य समझौतों को लेकर तल्खी देखने को मिली है। फिलीपींस के सेब्यू (Cebu) शहर में आयोजित आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) के इतर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री (Secretary of War) पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) के साथ एक बेहद अहम द्विपक्षीय बैठक की। इस उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को दिए जा रहे अमरीकी सैन्य सहायता पैकेज, विशेष रूप से पाकिस्तानी वायु सेना के F-16 फाइटर जेट बेड़े के रखरखाव, सॉफ्टवेयर और उन्नत एवियोनिक्स अपग्रेडेशन को लेकर भारत की गंभीर आपत्तियों को बेहद कड़े शब्दों में दर्ज कराया। रक्षा मंत्री की इस दो टूक और सीधी बातचीत ने वाशिंगटन को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस्लामाबाद को दी जाने वाली किसी भी प्रकार की उन्नत सैन्य तकनीक या वित्तीय मदद भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधा खतरा है, जिसे नई दिल्ली कभी स्वीकार नहीं करेगी।
686 मिलियन डॉलर के अमरीकी पैकेज पर भारत ने जताया गहरा एतराज
अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए गए लगभग 686 मिलियन डॉलर के F-16 मेंटेनेंस और मॉडर्नाइजेशन पैकेज पर भारत लंबे समय से अपनी असहमति जताता आ रहा है। इस सैन्य डील में F-16 विमानों के लिए लिंक-16 डेटा लिंक, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, उन्नत एवियोनिक्स और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट शामिल हैं, जो इन लड़ाकू विमानों को 2040 तक युद्ध योग्य बनाए रखने में मदद करेंगे। पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ के सामने राजनाथ सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका भले ही इस सौदे को आतंकवाद विरोधी अभियानों (Counter-Terrorism Support) की आड़ में सही ठहराने की कोशिश करे, लेकिन इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान इन अमरीकी F-16 विमानों और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हमेशा भारत के खिलाफ आक्रामक अभियानों में ही करता आया है। भारत ने अमेरिका को याद दिलाया कि 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद हुई हवाई झड़प के दौरान भी पाकिस्तानी सेना ने भारत के खिलाफ F-16 विमानों का ही गलत इस्तेमाल किया था।
आतंकवाद पर 'दोहरे मापदंड' और चीनी-ईरानी लीक का दिया सख्त हवाला
इस बैठक के दौरान भारत के रक्षा मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे पर अपनाए जाने वाले 'दोहरे मापदंडों' (Double Standards) पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवादियों को पनाह देते हैं, प्रशिक्षण प्रदान करते हैं और उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाते हैं, उनके खिलाफ दुनिया भर को 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनानी होगी। इसके साथ ही भारतीय कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, राजनाथ सिंह ने अमेरिका को यह आगाह भी किया कि पाकिस्तान को दी जा रही अत्याधुनिक और संवेदनशील अमरीकी सैन्य तकनीक भविष्य में चीन या ईरान जैसे तीसरे देशों के हाथों में लीक हो सकती है या उनके साथ साझा की जा सकती है। इस तरह का रक्षा हस्तांतरण न केवल दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय सैन्य संतुलन को बिगाड़ता है, बल्कि खुद अमेरिका के वैश्विक सामरिक हितों के लिए भी एक बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।
इंडो-पैसिफिक रीजन में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत
पाकिस्तान के मुद्दे पर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज कराने के बावजूद दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान भारत-अमेरिका मेजर डिफेंस पार्टनरशिप (Major Defence Partnership) और दोनों देशों के बीच हुए 10-वर्षीय रक्षा ढांचे के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं (Defence Supply Chains) को मजबूत बनाने, खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान और सैन्य तकनीकों के सह-विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बाद में सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण में भारत और अमेरिका की रक्षा साझीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, भारत ने यह भी साफ कर दिया कि इंडो-पैसिफिक में सहयोग और पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद, दोनों विषय एक साथ नहीं चल सकते और अमेरिका को अपने क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना होगा।