ओखोत्स्क सागर से पानी के भीतर से रूस का बड़ा और सनसनीखेज मिसाइल परीक्षण
वैश्विक तनाव और महाशक्तियों के बीच जारी सामरिक खींचतान के बीच रूस ने एक बार फिर अपनी विनाशकारी सैन्य और परमाणु क्षमता का प्रदर्शन करके पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि उसकी पैसिफिक फ्लीट की चौथी पीढ़ी की न्यूक्लियर-पॉवर्ड स्ट्रेटेजिक सबमरीन 'जनरलिस्सिमो सुवोरोव' ने ओखोत्स्क सागर में पानी के नीचे से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) 'बुलावा' का सफल परीक्षण किया है। समुद्र की गहराइयों में जलमग्न अवस्था में दागी गई इस मिसाइल ने हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हुए उत्तरी रूस के अर्खांगेल्स्क क्षेत्र में स्थित चीझा मिसाइल टेस्ट रेंज पर अपने निर्धारित लक्ष्य पर सटीकता से निशाना साधा। इस परीक्षण के बाद रूस ने यह साफ कर दिया है कि उसकी 'न्यूक्लियर ट्रायड' (परमाणु त्रिकोण) यानी थल, नभ और जल से परमाणु हमला करने की क्षमता पूरी तरह से चाक-चौबंद और अत्याधुनिक स्थिति में है।
'बुलावा' मिसाइल और 'जनरलिस्सिमो सुवोरोव' सबमरीन की मारक मारक क्षमता से खौफ में पश्चिमी देश
रूस द्वारा टेस्ट की गई 'बुलावा' (RSM-56 Bulava) अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल को दुनिया के सबसे आधुनिक और खतरनाक परमाणु हथियारों में गिना जाता है। यह मिसाइल एक साथ कई मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स (MIRVs) यानी अलग-अलग लक्ष्यों को साधने वाले परमाणु वारहेड्स ले जाने में पूरी तरह सक्षम है। इसके अलावा, जिस 'जनरलिस्सिमो सुवोरोव' बोरेई-ए क्लास न्यूक्लियर सबमरीन से इसे दागा गया, वह अपनी उन्नत स्टेल्थ तकनीक के कारण दुश्मन के रडार और सोनार सिस्टम को गच्चा देकर समुद्र की गहराइयों में पूरी तरह शांत रहकर हमला करने की क्षमता रखती है। रूसी नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक, इस मिसाइल टेस्ट के दौरान सबमरीन के सभी प्रणालियों, नेविगेशन और हथियार नियंत्रण प्रणालियों ने बिना किसी गड़बड़ी के शत-प्रतिशत सटीक काम किया। इस अभ्यास ने यह साबित कर दिया है कि रूसी बेड़े के पास दुश्मन के किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करने की अचूक क्षमता है।
वैश्विक तनाव और शांति वार्ताओं की सुगबुगाहट के बीच मास्को का बड़ा कूटनीतिक संदेश
रूस का यह आक्रामक सैन्य प्रदर्शन ऐसे वक्त में सामने आया है जब एक तरफ पूर्वी यूरोप में भू-राजनीतिक परिस्थितियां संवेदनशील बनी हुई हैं और दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संघर्ष विराम और शांति वार्ताओं को लेकर कूटनीतिक चर्चाएं जारी हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मास्को ने समुद्र की गहराई से यह परमाणु-सक्षम मिसाइल दागकर सीधे तौर पर अमेरिका और नाटो (NATO) सहयोगियों को अपनी लाल रेखाओं की याद दिलाई है। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य अपनी रणनीतिक निवारक (Strategic Deterrence) क्षमता का प्रदर्शन करना और यह संदेश देना है कि किसी भी संभावित सैन्य दबाव या सुरक्षा खतरे की स्थिति में रूस अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। इस मिसाइल दागे जाने की तस्वीरों और सैन्य अपडेट ने वाशिंगटन से लेकर ब्रुसेल्स तक के रक्षा विशेषज्ञों और वैश्विक थिंक-टैंकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
इंडो-पैसिफिक और आर्कटिक क्षेत्रों के भू-राजनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा गहरा असर
ओखोत्स्क सागर से दागी गई मिसाइल का आर्कटिक क्षेत्र के पास स्थित टेस्ट रेंज पर गिरना केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यह प्रशांत और आर्कटिक महासागरों में रूस के बढ़ते दबदबे को भी दर्शाता है। रूस पिछले कुछ वर्षों से अपने पूर्वी समुद्री बेड़े और आर्कटिक सैन्य अड्डों का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है। इस हालिया मिसाइल परीक्षण ने अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों, जैसे जापान और दक्षिण कोरिया, को भी अलर्ट मोड पर ला दिया है। रक्षा जानकारों का स्पष्ट कहना है कि रूस अपनी नौसैनिक रणनीतिक ताकत के दम पर दुनिया को यह दिखाने में कामयाब रहा है कि वह वैश्विक सुरक्षा समीकरणों में अपनी शर्तों पर ही किसी बातचीत की मेज पर आएगा, और उसका परमाणु शक्ति प्रदर्शन किसी भी विरोधी के लिए एक गंभीर चेतावनी है।